
<p style="text-align: justify;">यूक्रेन और रूस के बीच जंग जारी है, जो अब भीषण रूप लेती जा रही है. ऐसे में यूक्रेन में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए भारत सरकार प्रयास कर रही है. ऐसे में एक भारतीय नागरिक हरजोत को कीव में गोली लगी है.</p> <p style="text-align: justify;"> हरजोत के माता पिता अब जल्द ही उनकी सकुशल वापसी चाहते हैं. साथ ही वे उन सभी भारतीयों के लिए भी चिंतित हैं, जो यूक्रेन में जंग के हालात के बीच फंसे हुए हैं. हरजोत के माता-पिता भारत सरकार से यही गुहार लगा रहे हैं कि वहां फंसे भारतीयों को सकुशल वापस देश लाया जाए. उन्हें उनके हाल पर न छोड़ा जाए. उनके लिए बस आदि का भी इंतजाम किया जाए, ताकि वे लोग जिस शहर में फंसे हुए हैं. वहां से आसानी से बॉर्डर तक पहुंच पाए.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>’26 फरवरी को हरजोत से हुई थी बात'</strong></p> <p style="text-align: justify;">माता-पिता ने बताया कि हरजोत से हमारी बात 26 फरवरी को हुई थी. उसके बाद 4 दिनों तक उससे कोई बात नहीं हुई. हमारे मन में बहुत ही बुरे-बुरे ख्याल आ रहे थे. डर लग रहा था कि वह ठीक ठाक है भी या नहीं. इसी बीच 2 दिन पहले हमारे पास फोन आया. हरजोत ने हम से बात की और बताया कि उसे 4 गोलियां लगी हैं, लेकिन वह ठीक है. वह कीव के एक अस्पताल में भर्ती है. </p> <p style="text-align: justify;">हरजोत ने बताया कि सभी यूक्रेन से बाहर निकलने का प्रयास कर रहे थे. वह पहले एक मेट्रो स्टेशन में गया था, लेकिन उस मेट्रो स्टेशन में इंडियन को अंदर नहीं जाने दिया. हरजोत ने एक कैब ली. उसमें तीन और लोग भी सवार थे, जो अलग-अलग देशों के थे. वह कैब से किसी बॉर्डर की तरफ जा रहे थे. तभी रास्ते में उन्हें रोककर गोलियां मारी गईं.</p> <p style="text-align: justify;">गोलियां चलाने वाले यूक्रेन के थे या रूस के थे, ये नहीं पता. गोली लगते ही हरजोत बेहोश हो गया था. फिर उसे जब होश आया तो वह अस्पताल में था. वहां पर उसको काफी मदद की जा रही है. वहां के डॉक्टर उसकी अच्छी तरह से देखरेख कर रहे हैं. उसको एक गोली बाजू में लगी थी, जो फिर बाजू को छूकर छाती के अंदर घुस गई. दो गोली उसके पैरों में लगी हैं. उसके पैर में फ्रैक्चर भी हो गया है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>’भारतीय दूतावास का रवैया नहीं था ठीक'</strong></p> <p style="text-align: justify;">हरजोत के माता-पिता ने ये भी कहा कि जिस अस्पताल में हरजोत एडमिट है, भारतीय दूतावास उसके नजदीक है. हरजोत ने वहां संपर्क कर उन्हें अपने बारे में बताया तो दूतावास के कर्मचारियों और अधिकारियों का रवैया सही नहीं था. हरजोत घायल है और उसे दूतावास में आने के लिए कहा जा रहा था.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>’परमात्मा का शुक्र है कि हरजोत जीवित है'</strong></p> <p style="text-align: justify;">हरजोत के माता-पिता ने कहा, हमारे मन में अब इसी बात का संतोष है कि हमारा बेटा जीवित है और ठीक है. हम भारत सरकार से यही गुहार लगाते हैं कि वे यूक्रेन में फंसे भारतीयों को उनके हाल पर न छोड़ें. उन्हें बाहर निकालने के लिए पूरी तरीके से सहायता उपलब्ध करवाएं. वहां पर अभी एडवाइजरी जारी कर यह कहा जा रहा है कि आप लोग नजदीकी बॉर्डर पर पहुंचें, लेकिन जहां पर युद्ध छिड़ा हो वहां पर खुद-ब-खुद कैसे कोई बॉर्डर तक पहुंच सकता है. सरकार को चाहिए कि किसी तरीके से बातचीत करते हुए यूक्रेन में फंसे भारतीयों को सकुशल निकालने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाए. </p> <p style="text-align: justify;">उन्होंने कहा, जो भी जहां फंसा हुआ है उन्हें नजदीकी बॉर्डर तक पहुंचाने के लिए बस आदि की व्यवस्था भी की जाए. हमें इस बात के लिए भी चिंता है कि वहां पर काफी संख्या में भारतीय हैं, वे सभी सुरक्षित रहें और सभी सुरक्षित अपने घर अपने वतन लौटें.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>’सफेद चादर में लिपटीं लाशें करती थीं चिंतित</strong></p> <p style="text-align: justify;">हरजोत के माता-पिता ने बात करते हुए अपना दर्द साझा किया और कहा कि जब 4 दिनों तक हरजोत से उनकी बात नहीं हो पाई थी, तो वे लगातार न्यूज़ चैनल देख रहे थे. न्यूज़ चैनल में दिखाई जा रही सफेद चादर में लिपटी लाशों को देखकर उन्हें चिंता होती थी. उनके मन में डर पैदा होता था. बुरे ख्याल आते थे कि कहीं उनमें से कोई एक लाश हरजोत की न हो. लेकिन ऊपर वाले का शुक्र है कि हरजोत जीवित है. अब बस हम यही चाहते हैं कि वह जल्द से जल्द हमारे पास लौट आए.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>जुलाई 2021 में गया था विदेश</strong></p> <p style="text-align: justify;">हरजोत के पिता केसर सिंह ने बताया कि हरजोत जुलाई 2021 में पढ़ाई के लिए यूक्रेन गया था. वहां से फिर वह स्पेन चला गया. उसने वहां पर लैंग्वेज कोर्स में दाखिला लिया, लेकिन फीस ज्यादा थी. इसलिए वह वापस यूक्रेन आ गया और वहां की एक यूनिवर्सिटी में लैंग्वेज का कोर्स करने लगा. वह साथ में पार्ट टाइम जॉब भी कर रहा था. सब कुछ अच्छा चल रहा था, लेकिन अचानक से यह जंग शुरू हो गई.</p>
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