मौत के मंजर का सामना करने वाले कब तक रहेंगे बेघर ?

<p>मलाड के कुरान विलेज के अम्बेडकर नगर बस्ती के ऊपर, संजय गांधी नेशनल पार्क से जुड़ी एक बाउंड्री वाल जिसे बीएमसी ने बनाया था। साल 2019 में बारिश के दिनों में गिर जाने से करीब 32 लोगों की जान चली गई थी। उस वक्त पीड़ित परिवारों को बीएमसी ने दूसरी जगह शिफ्ट करने का वादा किया था। कुछ परिवारों को शिफ्ट भी किया गया लेकिन अभी भी 100 से ज्यादा पीड़ित परिवार खतरे के बीच रहने को मजबूर हैं। सिर्फ बारिश के दिनों में बीएमसी इन परिवारों को उठाकर कहीं दूसरी जगह दो-तीन महीनों के लिए रख देती है। जबकि इनके पास घर के सभी सरकारी डाक्यूमेंट्स मौजूद हैं। लेकिन सरकार की तरफ से कोई सुनवाई ना होने के बाद अब यह परिवार 10 महीने अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं। इसी बस्ती में रहने वाली, धरने पर बैठी मुन्नी बताती हैं कि उस साल जब दीवार गिरी थी तो पानी और मलवा इतनी तेजी से आया था कि उनकी बस्ती के 32 लोगों की जान गई थी जिसमें से उनका 22 साल का एक बेटा था । अपनी दुख भरी कहानी बताते बताते वो रोने लगती हैं उनका कहना है कि हमारे साथ के कुछ लोगों को सरकार ने दूसरी जगह पर रहने के लिए घर दे दिया है लेकिन उन्हें अभी तक घर नहीं मिला हर साल जब बारिश आती है तो उन्हें वही तस्वीर नजर के सामने दिखती है वहीं मौत का मंजर।</p>

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