संगीतमयी राम कथा का आयोजन:सिद्धार्थनगर में कथावाचक ने कहा- कौशल्याजी कभी उन्हें गोद में लेकर हिलाती-डुलाती और कभी पालने में लिटाकर झुलाती थीं

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