’85 फीसदी से ज्यादा किसान संगठन कृषि कानूनों के पक्ष में थे’- SC की कमेटी के सदस्य का दावा

<p style="text-align: justify;">तीन कृषि कानूनों का अध्ययन करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त समिति इसे पूरी तरह निरस्त नहीं करने के पक्ष में थी. समिति ने इसके बजाय निर्धारित मूल्य पर फसलों की खरीद का अधिकार राज्यों को देने और आवश्यक वस्तु कानून को खत्म करने का सुझाव दिया था. समिति के तीन सदस्यों में से एक ने सोमवार को रिपोर्ट जारी करते हुए ये बात कही.</p> <p style="text-align: justify;">पुणे के किसान नेता अनिल घनवट ने कहा कि उन्होंने तीन मौकों पर समिति की रिपोर्ट जारी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखा था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिलने के कारण वह इसे खुद जारी कर रहे हैं. समिति के दो अन्य सदस्य अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी और कृषि अर्थशास्त्री प्रमोद कुमार जोशी मौजूद नहीं थे.</p> <p style="text-align: justify;">स्वतंत्र भारत पार्टी के अध्यक्ष घनवट ने कहा, &lsquo;&lsquo;मैं आज यह रिपोर्ट जारी कर रहा हूं. तीनों कानूनों को निरस्त कर दिया गया है. इसलिए अब इसकी कोई प्रासंगिकता नहीं है.&rsquo;&rsquo; घनवट के अनुसार, रिपोर्ट से भविष्य में कृषि क्षेत्र के लिए नीतियां बनाने में मदद मिलेगी.</p> <p style="text-align: justify;">हितधारकों के साथ समिति की द्विपक्षीय बातचीत से जाहिर हुआ कि केवल 13.3 प्रतिशत हितधारक तीन कानूनों के पक्ष में नहीं थे. घनवट ने कहा, &lsquo;&lsquo;3.3 करोड़ से अधिक किसानों का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग 85.7 प्रतिशत किसान संगठनों ने कानूनों का समर्थन किया.&rsquo;&rsquo;</p> <p style="text-align: justify;">ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से प्राप्त जवाब से जाहिर हुआ कि लगभग दो-तिहाई उत्तरदाता कानूनों के पक्ष में थे. ई-मेल के माध्यम से प्राप्त जवाब से यह भी पता चला कि अधिकतर लोग कानूनों का समर्थन करते हैं.&nbsp;घनवट ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के बैनर तले आंदोलन करने वाले 40 संगठनों ने बार-बार अनुरोध करने के बावजूद अपनी राय प्रस्तुत नहीं की.</p> <p style="text-align: justify;">समिति ने तीन कृषि कानूनों पर 19 मार्च 2021 को अपनी सिफारिशें प्रस्तुत की थीं, जिसमें अन्य बातों के अलावा किसानों को सरकारी मंडियों के बाहर निजी कंपनियों को कृषि उपज बेचने की अनुमति देने की बात कही गई.</p> <p style="text-align: justify;">उत्तर प्रदेश और पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले पिछले साल नवंबर में नरेंद्र मोदी नेतृत्व वाली सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को निरस्त कर दिया था. घनवट ने कहा कि समिति ने राज्यों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रणाली को कानूनी रूप देने की स्वतंत्रता समेत कानूनों में कई बदलावों का भी सुझाव दिया था.</p> <p style="text-align: justify;">समिति ने यह भी सुझाव दिया था कि &lsquo;ओपन एंडेड&rsquo; खरीद नीति को बंद कर दिया जाना चाहिए और एक मॉडल अनुबंध समझौता तैयार किया जाना चाहिए.</p> <p style="text-align: justify;">प्रधानमंत्री <a title="नरेंद्र मोदी" href="https://www.abplive.com/topic/narendra-modi" data-type="interlinkingkeywords">नरेंद्र मोदी</a> ने 19 नवंबर को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा करते हुए कहा कि सरकार कृषि क्षेत्र के सुधारों के लाभों के बारे में विरोध करने वाले किसानों को नहीं समझा सकी.</p> <p style="text-align: justify;">निरस्त किए गए तीन कृषि कानून – कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) कानून, कृषक (सशक्तीकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार कानून और आवश्यक वस्तुएं (संशोधन) कानून थे. तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करना दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन करने वाले 40 किसान संगठनों की प्रमुख मांगों में से एक था.</p> <p style="text-align: justify;">विरोध प्रदर्शन नवंबर 2020 के अंत में शुरू हुआ और संसद द्वारा तीन कानूनों को निरस्त करने के बाद समाप्त हुआ. तीनों कानून जून 2020 में लागू हुए थे और नवंबर 2021 में निरस्त कर दिए गए थे.&nbsp;एमएसपी प्रणाली को कानूनी रूप देने की किसान संगठनों की मांग पर समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि मांग ठोस तर्क पर आधारित नहीं थी और इसे लागू करना संभव नहीं है.</p> <p style="text-align: justify;">रिपोर्ट में कहा गया, &lsquo;&lsquo;गेहूं और चावल के लिए, खरीद पर सीमा होनी चाहिए जो जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) की जरूरतों के अनुरूप हो. &lsquo;ओपन एंडेड&rsquo; खरीद नीति को बंद करने की आवश्यकता है क्योंकि यह कुछ निश्चित रूप से कृषि उत्पादन की संरचना को बदल रही है.&rsquo;&rsquo;</p> <p style="text-align: justify;">समिति ने कम से कम दस साल आगे कैसे बढ़ना है, इस पर कुछ विकल्प दिए. रिपोर्ट में कहा गया, &lsquo;&lsquo;समिति ने जिन विकल्पों पर विचार-विमर्श किया, उनमें से एक यह है कि केंद्र सरकार द्वारा राज्यों में गेहूं और चावल की खरीद, भंडारण और पीडीएस पर उत्पादन, खरीद और गरीबी को उचित महत्व देने वाले उद्देश्य के आधार पर वर्तमान खर्च आवंटित किया जाए.&rsquo;&rsquo;</p> <p style="text-align: justify;">रिपोर्ट के मुताबिक, &lsquo;&lsquo;राज्यों को अपने-अपने क्षेत्र में किसानों का सहयोग करने और गरीब उपभोक्ताओं की रक्षा करने के लिए अपने स्वयं के दृष्टिकोण विकसित करने की स्वतंत्रता दी जानी चाहिए.&rsquo;&rsquo;</p> <p style="text-align: justify;">घनवट ने कहा कि वह जल्द ही कृषि नीति पर एक चर्चा पत्र लेकर आएंगे और कृषि सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में अक्टूबर में दिल्ली में एक लाख से अधिक किसानों की एक रैली भी आयोजित करेंगे.</p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Watch: मोटरसाइकिल रेस शुरू होने के ठीक पहले हुआ भयानक हादसा, बाइक ने हवा में खाई 9 पलटी" href="https://www.abplive.com/sports/motorcycle-crash-in-indonesian-motogp-warmup-session-marc-marquez-missed-out-2085266" target="">Watch: मोटरसाइकिल रेस शुरू होने के ठीक पहले हुआ भयानक हादसा, बाइक ने हवा में खाई 9 पलटी</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Russia Ukraine War: पुतिन को सता रहा जहर देकर हत्या करने का डर, पर्सनल स्टाफ के 1000 कर्मचारियों को काम से निकाला!" href="https://www.abplive.com/news/world/russia-ukraine-war-putin-removed-his-1000-personal-staff-employee-after-getting-input-of-poison-risk-2085405" target="_blank" rel="noopener">Russia Ukraine War: पुतिन को सता रहा जहर देकर हत्या करने का डर, पर्सनल स्टाफ के 1000 कर्मचारियों को काम से निकाला!</a></strong></p>

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