Aryan Khan Drugs Case: आर्यन खान को आज भी नहीं मिली जमानत? जानिए कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं

<p style="text-align: justify;"><strong>मुंबई</strong>: ड्रग्स मामले में गिरफ्तार शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को गुरुवार को भी जमानत नहीं मिली. अब आर्यन को कम से कम 6 दिन और आर्थर रोड जेल में ही रहना पड़ेगा. स्पेशल एनडीपीएस कोर्ट ने जमानत याचिका पर फैसला 20 अक्टूबर तक के लिए सुरक्षित रखा है. एनडीपीएस कोर्ट के सामने NCB की तरफ से ASG अनिल सिंह ने अपनी लंबी बात रखी. यहां पढ़िए आखिर कोई क्या-क्या दलीलें दी गईं&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>आर्यन खान को क्यों नहीं मिली जमानत</strong><br />स्पेशल एनडीपीएस कोर्ट के सामने ASG अनिल सिंह ने पहले एक-एक करके कई जजमेंट पढ़े. लंच ब्रेक के बाद एएसजी अनिल सिंह ने कहा, "ब्रेक से पहले वाली बात को वो खत्म कर रहे हैं. शोविक के जजमेंट के बाद अब इसी तरह के दूसरे जजमेंट की बात कर रहे हैं. इस जजमेंट में आरोपी ने अपने बयान को रिट्रेक्ट (Retract) किया था, लेकिन इसके बावजूद अदालत ने इस मामले में बयान को अहमियत दी थी. अब तीसरे जजमेंट की बात कर रहे हैं. रिट्रेक्टेक्शन (Retraction) का मुद्दा ट्रायल में उठाया जा सकता है, अभी नहीं. अब एक और जजमेंट का जिक्र हो रहा है जिसमें कहा गया है कि अगर रिकवरी नहीं की गई. अदालत ने कहा कि आरोपी के पास posession नहीं मिलने का यह मतलब नहीं है कि उनपर सेक्शन 37 नहीं लग सकता."</p> <p style="text-align: justify;">अनिल सिंह ने आगे कहा, ‘साजिश से जुड़े एक जजमेंट की चर्चा की जा रही है जिसमें कहा गया कि साजिश सीधे नहीं होती है, सीक्रेटली ही होती है जिसकी जानकारी साजिशकर्ता और उनके लोगों को होती है. इसलिए अगर इससे जुड़े कोई गवाह या सबूत मिलते हैं तो भी इसपर कार्रवाई की जा सकती है. इस मामले में साजिश को सीधे साबित ना करते हुए परिस्थिति के जरिए इसे बताया गया था.'</p> <p style="text-align: justify;"><strong>"यह महात्मा गांधी का देश है इसलिए ड्रग्स पर रोक लगनी चाहिए"</strong><br />ASG अनिल सिंह ने आगे कहा, "एक और जजमेंट का जिक्र किया जा रहा है जिसमें कहा गया कि अदालत को यह देखना चाहिए कि जमानत मिलने के बाद क्या आरोपी दोबारा ऐसा गुनाह कर सकता है या नहीं. अबतक कुल मिलाकर 8 जजमेंट पढ़े जा चुके हैं. इन जजमेंट के ज़रिए मैं यही कहना चाहता हूं कि हम सभी मामलों को गंभीरता से ले रहे हैं. एक दूसरे मामले में हमारे अधिकारियों को मारा भी गया था. हम जान जोखिम में डालकर कार्रवाई करते हैं. समाज में खासतौर पर युवाओं पर इसका असर पड़ा है. आरोपियों के वकीलों ने अदालत में कहा है कि यह युवा है, बच्चे हैं, इन्हें जमानत दी जानी चाहिए, मैं इसे सही नहीं मानता. मैं अदालत के सामने कहता हूं कि इस मामले से युवाओं के भविष्य के बारे में पता चलेगा. यह महात्मा गांधी का देश है इसलिए ड्रग्स पर रोक लगनी चाहिए. हम इस मामले में पूरे चेन और कनेक्शन पर नजर बनाए रखे हुए हैं. अब भी मामला शुरुआती स्टेज पर है और आगे जाकर और भी चीजें सामने आएगी. इसलिए मैं नहीं चाहता कि कम से कम इस स्टेज पर इन्हें जमानत नहीं दिया जाए.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>ड्रग्स केस के दूसरे आरोपी मुनमुन धमीचा पर क्या दलीलें दी गईं</strong><br />यहां पर अनिल सिंह ने आर्यन खान पर अपना पक्ष रखकर अपनी बात पूरी कर ली. इसके बाद उन्होंने दूसरे ड्रग्स केस के आरोपी मुनमुन धमीचा पर बात की. अनिल सिंह ने अदालत को बताया कि मुनमुन के पास से भी ड्रग्स NCB को मिला था. इसके बाद मुनमुन के वकील ने कहा, "जिन आरोपियों को गिरफ्तार कर 27A सेक्शन लगाया गया था, कॉमर्शियल क्वांटिटी जब्त किए गए थे. मुनमुन से ऐसा कुछ नहीं मिला है. मुनमुन का नाम साजिश में जोड़ा गया. लेकिन यह सही नहीं है, हम पहले से ही कर रहे हैं कि ना ही आर्यन खान और ना ही अरबाज के साथ कोई लेना देना था. फिर भी हमें साथ में जोड़ा जा रहा है, मुझे इससे अलग करना चाहिए. मेरे रूम से स्मॉल क्वांटिटी मिला था, कॉमर्शियल नहीं, मुझे जमानत दी जानी चाहिए."</p> <p style="text-align: justify;"><strong>आर्यन खान के वकील ने क्या दलीलें दी</strong><br />इसके बाद आर्यन खान के वकील अमित देसाई ने अदालत के सामने अपनी बात रखी. उन्होंने कहा, "इस बात में कोई दो राय नहीं कि पूरी दुनिया ड्रग्स से लड़ रही है. हमें आजादी मिली है, उस आजादी को बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है. जिस तरह ASG ने कहा, युवाओं को भविष्य के लिए अपने सेहत का ख्याल रखना चाहिए. मैं यह सही मानता हूं. NCB जो कार्रवाई करती है उसकी तारीफ की जानी चाहिए. मेरा बस यही कहना है कि जो कार्रवाई हो, वो कानून के दायरे में हो. इसके लिए भी हमने आजादी के समय बहुत लड़ाई लड़ी थी. यह सब करते हुए यह भी याद रखना बहुत जरूरी है कि जब हम आजादी के लिए लड़े थे, तब हम संविधान के लिए लड़े, लोगों के आजादी को बनाए रखने और उनके अधिकार के लिए लड़े. हम उनके अधिकार को नजरंदाज नहीं कर सकते और ना ही बिना कानून कोई कार्रवाई कर सकते हैं.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;">आर्यन के वकील ने आगे कहा, "अलग अलग तरह के ड्रग्स होते हैं और समय के साथ ही सरकार ने तय किया है कि ऐसे कौन से ड्रग्स है जिसपर कार्रवाई की जानी चाहिए. दूसरे ड्रग्स ऐसे भी हैं जिसपर दूसरे तरह से कदम उठाने चाहिए. साल 2017 में सरकार ने जो समाज में चल रहा है उस पर ध्यान देते हुए एक पॉलिसी डॉक्यूमेंट जारी किया था. एनसीबी को लेकर जिसमें उन्होंने इससे किस तरह से लड़ा जाए, उसके लिए भी कई दिशानिर्देश दिए थे.</p> <p style="text-align: justify;">उन्होंने कहा, "सबसे ऊपर पैडलर थे, उसके बाद ट्रैफिकर और उसके बाद कंज्यूमर. इसमें यही कहा गया कि इससे लड़ने के लिए सबसे पहले पैडलर और ट्रैफिकर पर कार्रवाई की जानी चाहिए. बच्चों के ड्रग्स लेने पर लिखा गया था कि इन बच्चों को सेंसिटाइज किया जाना चाहिए. आज ASG ने कई जजमेंट पढ़े. लेजिस्लेटिव में बदलाव किया जाना चाहिए. 2004 की एक कॉपी अदालत को दी गई जिसमें कहा गया है कि जहां ज्यादा क्वांटिटी में ड्रग्स मिलता है, वहां पर ज्यादा सजा दी जानी चाहिए. NDPS में अवैध तस्करी के लिए भी कड़ी सजा का प्रावधान है. लेकिन उसमें सुधारात्मक दृष्टिकोण की बात भी लिखी गई है. उन लोगों के लिए जो एडिक्टेड हैं. मैं यह नहीं कह रहा कि मेरा क्लाइंट एडिक्टेड है, मैं केवल वो दस्तावेज पढ़ रहा हूं."</p> <p style="text-align: justify;"><strong>आर्यन के वकील के भी पढ़े जजमेंट</strong><br />आर्यन के वकील ने कहा, "मैं निजी तौर पर कुछ नहीं कह रहा, बल्कि सुप्रीम कोर्ट, विधान मंडल और सरकार की बात कर रहा हूं और उन्होंने ही माना है कि अगर क्वांटिटी के आधार ओर सजा का प्रावधान तय होगा. सुप्रीम कोर्ट के अलग अलग जजमेंट हैं इसपर. ASG ने अलग अलग जजमेंट पढ़े, इसलिए मेरा भी कर्तव्य है कि मैं भी कुछ जजमेंट पढूं. 2018 के एक जजमेंट को आधा जा रहा है जिसमें कहा गया है कि बिना जांच पर किसी तरह की बाधा लाए जमानत दी जा सकती है. एजेंसी जांच जारी रख सकती है, लेकिन जमानत दी जा सकती है."</p> <p style="text-align: justify;">उन्होंने कहा, ‘ASG ने 24 अगस्त 2021 का एक जजमेंट नहीं पढ़ा, जिसमें बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरोपियों की कम उम्र को देखते हुए कहा था कि इन्हें सुधार का एक मौका मिलना चाहिए और अगर दोबारा भविष्य में ऐसा होता है, तब इसपर कार्रवाई की जानी चाहिए. यानी अदालत ने उम्र देखते हुए राहत दी थी. मीडिया का काम है जागरूकता पैदा करना, इस तरह के जजमेंट से बहुत जागरूकता फैलती है.'</p> <p style="text-align: justify;">अमित देसाई ने अदालत के सामने कहा, ‘हाईकोर्ट के एक मामले में ASG ने कहा था कि सेलेब्रिटी और प्रभावशाली व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए. मुझे पता है कि वो बात करते हुए भी अनिल सिंह अपना खुद की बात नहीं, अपने क्लाइंट की बात रख रहे थे. इसपर हाई कोर्ट ने कहा था ‘I don’t agree, everyone is equal before the law. Each case has to be decided in its own merit despite the status of the accused. मेरे क्लाइंट को लेकर डिपार्टमेंट ने लीगल लाइन क्रॉस किया हो सकता है ताकि अदालत जमानत न दे.'</p> <p style="text-align: justify;"><strong>अमित देसाई ने आगे कहा-</strong></p> <ul> <li style="text-align: justify;">मान भी लें कि consumption का confession हुआ है. इसमें भी ज्यादा से ज्यादा 1 साल की सजा हो सकती है. इस सब पर भी ट्रायल में हम लगातार चर्चा करेंगे. लेकिन यह सच है कि हमने रिट्रेक्शन फाइल किया, वो रिकॉर्ड पर है और हमने अदालत के रिकॉर्ड से भी इस रिट्रेक्शन का कॉपी निकाला है. मैं केवल कानून के दायरे में रहकर ही सब बात कर रहा हूं.&nbsp;</li> <li style="text-align: justify;">इस अदालत में मोबाइल फोन को लेकर भी चर्चा की गई. इसमें फैक्ट साबित करने के लिए मैं आपको NCB से जुड़े एक दस्तावेज बताता हूं जिसमें NCB ने कहा है कि उन्होंने आर्यन खान के फोन को सीज किया था, Voluntary handover नहीं लिखा गया है. अगर सीज किया जाएगा तो उसका अलग से पंचनामा होना चाहिए. यह कानून भूल गए हैं. जब्ती ज्ञापन का कहीं कोई जिक्र नहीं है. साथ ही जिससे यह लिया गया है, उसे दोबारा यह हैंडओवर किया जाना चाहिए.&nbsp;</li> <li style="text-align: justify;">मैं केवल फैक्ट पर ही बात कर रहा हूं. अबतक केवल इंवेस्टिगेशन ही चल रहा है, ट्रायल नहीं शुरू हुआ है. चाहे फोन को स्वेच्छा से लिया गया या सीज किया गया वो बाद में तय कर सकते हैं, जो भी हुआ. आप मेरे अधिकार को मुझसे नहीं छीन सकते. आपने बताया नहीं कि अगर जमानत दिया गया, तो जांच पर इसका असर कैसे पड़ेगा.</li> <li style="text-align: justify;">जब हम इस मामले को देखेंगे तो फैक्ट यही है कि अगर जमानत पर इन्हें छोड़ा गया, तब भी इनके जांच पर कोई असर नहीं पड़ेगा. इसलिए यह बार-बार अब केवल कमर्शियल क्वांटिटी का जिक्र कर रहे हैं और कह रहे हैं कि एक बड़ी साजिश है, जिसके लिए ड्रग्स को सीज किए गए हैं.</li> <li style="text-align: justify;">कानून और सरकारी पॉलिसी के अनुसार हम सबसे पीछे हैं, हम कंज्यूमर हैं, लेकिन यह कंज्यूमर को ही जेल में रखना चाहते हैं, सुधार करने के बजाए. सरकारी पॉलिसी, विधायी नीति और जजमेंट कहते हैं कि स्मॉल क्वांटिटी में भी जमानत दी जा सकती है.</li> <li style="text-align: justify;">रिया चक्रवती के मामले में भी कहा गया कि भले ही नियम के अनुसार, स्मॉल क्वांटिटी मिलने पर गैर जमानती मामला दर्ज होता है, लेकिन अदालत ने इसपर भी टिप्पणी दी है.&nbsp;</li> <li style="text-align: justify;">2 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया, आज 14 अक्टूबर है. यह लगातार कह रहे हैं कि जांच जारी है. 3 अक्टूबर को गिरफ्तारी की गई, बयान दर्ज किए गए. &nbsp;4 अक्टूबर को दोबारा अदालत में उसे प्रोड्यूस किया गया, जिसके बाद 7 अक्टूबर तक दोबारा रिमांड में भेजा गया. उस समय भी मजिस्ट्रेट ने कहा कि 2 अक्टूबर से 7 अक्टूबर तक जो जांच की जानी चाहिए थी, वो हो गया और उसके बाद न ही कोई बयान ली गई, न ही कुछ हुआ. इसलिए अदालत ने उस समय इस मामले में पुलिस कस्टडी नहीं बढ़ाई. तब भी यह इंटरनेशनल ड्रग्स का जिक्र कहा गया.</li> <li style="text-align: justify;">इस मामले में जो भी तार जोड़े जाने थे, वो जोड़े गए. इन्होंने ही कहा कि आर्यन ने आचित का नाम लिया. आचित के रिमांड में कहा गया कि आर्यन और अरबाज ने आचित का नाम लिया. अब यह मुझसे जुड़ा हुआ नहीं क्योंकि आचित को भी गिरफ्तार किया गया. आचित स्मॉल क्वांटिटी के आयात गिरफ्तार किया गया.</li> <li style="text-align: justify;">अमित देसाई ASG से कह रहे हैं कि आपने फैक्ट के नाम पर बहुत कुछ गलत कहा, उसे ही मैं सही कर रहा हूं. अमित देसाई अपनी बात आगे बढ़ा रहे हैं. कह रहे हैं कि आर्यन की जो जांच की जानी चाहिए थी वो हो गई. यह कमर्शियल क्वांटिटी की बात कर रहे हैं. जिससे कमर्शियल क्वांटिटी मिली, उसका नाम अब्दुल है. उसका नाम न ही आर्यन ने दिया, न ही अरबाज ने दिया और न ही आचित ने. तो फिर आखिर इनके साथ मेरा क्या लेना देना है. यह फैक्ट है जो रिमांड एप्लीकेशन में कहा गया है.</li> <li style="text-align: justify;">शोविक के जजमेंट की बात ASG ने की. उसी जजमेंट का जिक्र मैं कर रहा हूं. उसमें अदालत ने यह भी अपनी निगरानी में शोविक के सभी दूसरे पैडलर से तार जोड़ने के बाद भी कहा कि शोविक ड्रग्स लेता नहीं था बल्कि वो पैडलर से लेकर सुशांत को देता था. इसलिए उसे एक अहम बात मानी गई थी और ड्रग्स सप्लाई का आरोप लगा था.</li> <li style="text-align: justify;">आज फॉरेन नेशनल से भी जोड़ा गया और MEA से बात शुरू होने की बात कही गई. मुझे नहीं पता कि क्या ऐसे बातचीत हुई भी या नहीं, लेकिन मैं केवल यह कह सकता हूं कि आज का जनरेशन जिस इंग्लिश का इस्तेमाल करता है, उसे हमारे उम्र वाले टॉर्चर मानेंगे. इसलिए जिस बयान और जो शब्दों का इस्तेमाल वो करते हैं, उससे ऐसा शक आ सकता है कि इसमें क्या कोई बड़ी साजिश है. कई बार ऐसा नहीं होता है और यह जनरेशन गैप की वजह से हमें लगता है. यह लड़का किसी भी तरह अवैध ड्रग्स से नहीं जुड़ा है.</li> <li style="text-align: justify;">अदालत को देखना चाहिए को जो चैट है वो क्या है.. क्या वो मजाक है, क्या वो कुछ और है या वो लोग केवल बात कर किसी चीज पर हंस रहे हैं. आज की दुनिया बहुत अलग है. यह जो चैट है वो निजी है. मैं मानता हूं कि ऐसे चैट से पहले बहुत कुछ निकला है, लेकिन यह मामला वैसा नहीं है.</li> <li style="text-align: justify;">आजकल सिनेमा में लोग ड्रग्स की बात करते हैं, क्योंकि वो इसपर बात करते हैं, किताब लिखी जाती है, क्या इसका यह मतलब है कि यह सब नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े हुए हैं? Context क्या है, यह देखना बहुत महत्त्वपूर्ण है. जो मुझे जानकारी मिली हुई है,उसके अनुसार फोन में कोई रेव पार्टी का ज़िक्र नहीं है.&nbsp;</li> <li style="text-align: justify;">आप साजिश की संभावना कहते हुए जमानत का विरोध नहीं कर सकते. बॉम्बे हाईकोर्ट के एक जजमेंट का जिक्र किया जा रहा है जिसमें चैट मेसेज पर अदालत ने कहा कि यह &nbsp;extra judicial कॉन्फेशन है और यह एक वीक फॉर्म है. आर्यन इस मामले में जो सहयोग है, वो करेंगे, लेकिन आप इनसे इनका अधिकार नहीं छीन सकते.&nbsp;</li> <li style="text-align: justify;">इसलिए मैं चाहता हूं कि इस मामले में उसे ज़मानत दी जानी चाहिए.&nbsp;</li> </ul> <p style="text-align: justify;"><strong>ASG अनिल सिंह ने फिर रखी अपनी बात</strong><br />इसके बाद ASG अनिल सिंह ने कहा, जहां तक बात फैक्ट की है, उसमें अनिल देसाई कहते हैं कि उन्हें नहीं पता कि व्हाट्सएप्प चैट में क्या है, लेकिन फिर भी बता रहे हैं कि व्हाट्सएप्प में किस तरह की बातें होती हैं. लेकिन यह चैट क्या है, यह मुझे पता है और अदालत को भी पता है.</p> <p style="text-align: justify;">यहां पर अनिल देसाई ने अनिल सिंह को टोका. इसपर अनिल सिंह ने कहा, ‘आपने आधे घंटे तक बात की, मुझे केवल 2 मिनट चाहिए. मैं केवल अदालत से कहूंगा कि मैंने आपको कई फैक्ट दिए हैं, आप उसके आधार पर अपना फैसला लीजिए.'</p> <p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें-</strong><br /><strong><a href="https://www.abplive.com/news/india/mumbai-cruise-drugs-case-ndps-court-reserves-order-on-bail-application-of-aryan-khan-ann-1982274">Aryan Khan Drugs Case: 20 अक्टूबर तक जेल में ही रहेंगे Aryan Khan, अदालत ने जमानत पर फैसला रखा आज सुरक्षित</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a href="https://www.abplive.com/news/india/bsf-jurisdiction-punjab-congress-mla-pargat-singh-on-captain-amrinder-singh-he-is-with-bjp-only-1982279">Punjab News: BSF के अधिकार क्षेत्र पर कैप्टन के बयान को लेकर मंत्री परगट सिंह ने जताई आपत्ति, कहा- वे BJP के साथ हैं</a></strong></p>

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