<p style="text-align: justify;"><strong>Ukraine-Russia War:</strong> रूस-यूक्रेन जंग का आज 12वां दिन है. अब तक दोनों देशों के बीच दो दौर की बातचीत हुई लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकल पाया. आज दोनों देशों के बीच शांति के प्रयासों को लेकर तीसरे दौर की बैठक होगी. इस बीच यह खबर सामने आ रही है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद बात करेंगे.</p> <p style="text-align: justify;">रूस लगातार अपना हमला यूक्रेन पर तेज करता जा रहा है. अब तक यूक्रेन के कई शहर हमले में पूरी तरह तबाह हो चुके हैं साथ है सैकड़ों की जान जा चुकी है. वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्कि भी रूस के सामने हार मानने को तैयार नहीं है. रूस-यूक्रेन के बीच इस बढ़ते तनाव को देखते हुए अब इजरायल, फ्रांस और तुर्की समझौता कराने की कोशिश में जुटे हुए हैं. बता दें, रूस और यूक्रेन आज तीसरे दौर की बातचीत के लिए आमने-सामने बैठेंगे. इससे पहले हुई दो दौर की बातचीत में कोई नतीजा नहीं निकला है.</p> <p style="text-align: justify;">इजराइल के प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने कहा है कि उनका देश यूक्रेन संकट का कूटनीतिक समाधान तलाशने में सहायता जारी रखेगा, भले ही उसके इस प्रयास के सफल होने की संभावना बहुत कम हो. बेनेट ने अपने मंत्रिमंडल की बैठक में रविवार को यह टिप्पणी की थी. उन्होंने मास्को में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक औचक बैठक से लौटने के कुछ घंटे बाद मंत्रिमंडल की बैठक की. वहीं, फ्रांस के राष्ट्रपति से पुतिन ने एक बार फिर बात की. फ्रांस ने कहा कि उनकी बातचीत में कुछ भी उत्साहजनक नहीं था. वहीं, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने यूक्रेन में तत्काल सामान्य युद्धविराम की अपील की. उन्होंने रविवार को रूसी नेता व्लादिमीर पुतिन से टेलीफोन पर बात की.</p> <p style="text-align: justify;">आपको बता दें, रूस के राष्ट्रपति पुतिन यूक्रेन के खिलाफ छेड़ी गई इस जंग को रोकने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्होंने कहा है कि ऐसा तब होगा जब यूक्रेन उनकी शर्तें मान लेता है. ये दावा तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैयप एर्दोगन से बातचीत के आधार पर किया गया है. रविवार को तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन और राष्ट्रपति पुतिन में बातचीत हुई थी.</p> <p style="text-align: justify;">आपको बता दें कि रूस की एक बड़ी शर्त ये है कि यूक्रेन (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) नेटो में शामिल न हो. रूस कई सालों से इस बात को कहता रहा है कि यूक्रेन को जो करना है वो करे, लेकिन वो नेटो में शामिल न हो. रूस का दावा है कि यूक्रेन के नेटो का सदस्य बनने से हमारी सुरक्षा पर खतरा पैदा होता है. गौरलतब है कि जानकारों का मानना है कि रूस के यूक्रेन से जंग का मुख्य कारण यही है. बता दें, रूस-यूक्रेन के इस युद्ध में अब तक 15 लाख लोग विस्थापित हो सुके हैं. साथ ही सैकड़ों जवानों की मौत हो चुकी है. इस मौत के आंकड़े में आम नागरिक शामिल हैं.</p> <p> </p>
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