कैग की रिपोर्ट में खुलासा, राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों से ज्यादा खतरनाक हैं बीबीएमपी की सड़कें

<p style="text-align: justify;">हाईटेक सिटी के रूप में मशहूर बैंगलोर का एक ऐसा चेहरा भी सामने आया है जिसकी कल्पना शायद आपने कभी नहीं की होगी. जी हां, भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि बैंगलोर में BBMP की सड़कें राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों की तुलना में ज्यादा खतरनाक हैं. यह खतरनाक रास्ता औसतन 19-20 प्रति किलोमीटर है और राहगीरों के लिए ज्यादा खतरनाक है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>ब्लैक स्पॉट चिह्नित, फिर भी कार्रवाई नहीं</strong></p> <p style="text-align: justify;">कैग की इस रिपोर्ट ने राज्य के राजमार्गों पर 8.87 किमी, प्रमुख जिला सड़कों पर 8.43 किमी और राष्ट्रीय राजमार्गों पर 7.39 पर प्रति किमी का खतरनाक रास्ता बताया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सैंपल के से पता चलता है कि बीबीएमपी की सड़कें राज्य की किसी भी अन्य प्रमुख सड़कों की तुलना में अधिक खतरनाक हैं. सड़क प्रबंधन एजेंसियां भी ब्लैक स्पॉट की समय पर पहचान और सुधार करने में विफल रही हैं. इस वजह से लगातार बड़े हादसे हो रहे हैं.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>हो चुके हैं कई बड़े हादसे</strong></p> <p style="text-align: justify;">रिपोर्ट में कहा गया है कि कर्नाटक राज्य सड़क सुरक्षा नीति, 2015 में निर्धारित लक्ष्य पर काम करने की जरूरत तक अधिकारियों ने महसूस नहीं की है, जबकि हादसे लगातार बढ़ रहे हैं. अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो 2015 में 17.32% बड़े सड़क हादसे हुए थे, जबकि 2020 में यह आंकड़ा बढ़कर 30 प्रतिशत तक पहुंच गया. हालांकि इस दौरान सड़क हादसों की वजह से होने वाली मौतों में &nbsp;22.24 प्रतिशत की गिरावट आई है. 2015 में रोड एक्सिडेंट में 10,856 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 2020 में 9,760 लोगों ने सड़क हादसों में जान गंवाई. बुधवार को कैग की यह रिपोर्ट विधानसभा में पेश की गई.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>नहीं बनाए गए हैं नियम</strong></p> <p style="text-align: justify;">कैग की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कर्नाटक राज्य सड़क सुरक्षा प्राधिकरण के कार्यों को करने के लिए अक्टूबर 2021 तक आवश्यक नियम तैयार नहीं किए गए थे. यह भी बताया गया है कि किस तरह कई लोगों को ड्राइविंग लाइसेंस और फिटनेस सर्टिफिकेट नियमों का पालन किए बिना ही दिए गए. स्वास्थ्य विभाग ने 22 जिलों में ट्रॉमा केयर सेंटर (टीसीसी) की स्थापना के लिए कोई प्लानिंग नहीं की. 90,000 मामलों में दुर्घटना में घायल लोगों को समय पर इलाज नहीं मिल सका.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें</strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="पूर्व टेनिस स्टार शारापोवा और फॉर्म्युला वन रेसर शूमाकर पर गुरुग्राम में धोखाधड़ी का केस दर्ज" href="https://www.abplive.com/news/india/fraud-case-registered-against-maria-sharapova-and-michael-schumacher-in-gurugram-2083200" target="">पूर्व टेनिस स्टार शारापोवा और फॉर्म्युला वन रेसर शूमाकर पर गुरुग्राम में धोखाधड़ी का केस दर्ज</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="जी-23 की बैठक में चुनावी हार को लेकर प्रियंका गांधी पर उठे सवाल, नेताओं ने कहा- पार्टी चला रहे कुछ सनकी लोग" href="https://www.abplive.com/news/india/congress-g23-leaders-questions-on-priyanka-gandhi-asked-why-general-secretaries-incharge-did-not-resign-criticise-leadership-sonia-gandhi-2083168" target="">जी-23 की बैठक में चुनावी हार को लेकर प्रियंका गांधी पर उठे सवाल, नेताओं ने कहा- पार्टी चला रहे कुछ सनकी लोग</a></strong></p>

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Team My Nation News
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