सांसद बृजभूषण शरण सिंह के साथ माईनेशन न्यूज़ टीम की बातचीत
- “अच्छे को अच्छा कहना और गलत पर लगाम लगाना सभी राजनैतिक दल के नेताओ का प्रथम कर्तव्य होना चाहिए”
- “ऑनलाइन शिक्षा का माध्यम सभी को उपलब्ध कराने के लिए देश मे सेट-अप विकसित करने की जरूरत है”
- “कुछ नादानों की वजह से अल्पसंख्यक समुदाय के लोगो को भी कटघरे में खड़ा होना पड़ा”
बृजभूषण शरण सिंह, यह नाम भारतीय राजनीती में किसी परिचय का मोहताज नहीं है। 8 जनवरी 1957 को उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के गांव बिसनोहरपुर में जन्मे बृजभूषण शरण सिंह वर्तमान में उत्तर प्रदेश की कैसरगंज लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के सांसद हैं। वर्ष 2019 की 17वीं लोकसभा चुनाव में भाजपा के टिकट से चुनाव लड़ते हुए बृजभूषण शरण सिंह अपने निकटतम प्रतिद्धंदी बसपा के चंद्रदेव यादव को 2,61,601 वोटों से हराकर 6वीं बार लोकसभा सांसद बने। वर्ष 1991 में 10वीं लोकसभा के चुनाव में भाजपा के टिकट पर पहली बार सांसद बने व उसके बाद वर्ष 1999 (13वीं लोकसभा), 2004 (14वीं लोकसभा), 2009 (15वीं लोकसभा), 2014 (16वीं लोकसभा) में भी सांसद रहे हैं। इसके अलावा बृजभूषण शरण सिंह रेसलिंग फेडरेशन ऑफ़ इण्डिया (WFI) के अध्यक्ष भी हैं।
राजनीति के अलावा वर्तमान कैसरगंज सांसद का समाजसेवा और शिक्षा में भी बहुत महत्वपूर्ण योगदान है। 50 से भी अधिक शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े बृजभूषण शरण सिंह ‘अशिक्षा’ को समाज व देश के लिए कलंक मानते हैं और इसलिए इनसे जुड़े सभी शैक्षणिक संस्थानों में गरीब व निर्धन बच्चों की शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। बचपन से ही कुश्ती और खेलकूद में माहिर बृजभूषण शरण सिंह का जुड़ाव पर्यावरण और साहित्य से भी रहा है।
My Nation News और newsdelhincr.com के संवाददाता मयंक शुक्ला व अन्य टीम सदस्यों ने भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये देश से जुड़े मौजूदा हालातों को लेकर बातचीत की व उनके विचार भी सुने। पेश हैं पूरी बातचीत के प्रमुख अंश :
सवाल: आपके अपने लोकसभा क्षेत्र में कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए किस प्रकार की व्यवस्थाएं की गई हैं?
जवाब: मेरे लोकसभा क्षेत्र में कोरोना संक्रमण का अभी बहुत हल्का प्रभाव है। गिने चुने कुल 2 दर्जन संक्रमित लोग मिले है और सब के सब बाहर से संक्रमित होकर ही यहां पहुचे थे। राहत भरी खबर ये है कि अब तक एक दर्जन से भी अधिक लोग ठीक होकर घर वापस जा चुके है। फिर भी लॉक डाउन के कारण किसी निर्बल परिवार को भूखा न सोना पड़े, इसके लिए मैं सभी थानों, पुलिस चौकियों और ब्लॉकों पर राहत किट लगातार भेजता रहा हूँ। जेल में बंद कैदियों को मुलाकात बन्द होने के कारण किसी सामान की कमी महसूस न हो इसलिए गोंडा और बहराईच कारागार में दो बार दैनिक उपयोग के सामान के साथ सब्जी, बिस्कुट, नमकीन भी भेजने का काम किया। यही नही, लॉकडाउन के दौरान मैं अपने लोकसभा क्षेत्र में रोज एक दिन जाता हूँ और महिलाओं, दिव्यांगों, विधवाओं को सोशल डिस्टैन्सिंग फॉलो करते हुए एक जगह बुला कर उनकी कोई समस्या हो तो उसका समाधान कराने के साथ कैसे इस बीमारी से बचाव करें, छोटी-छोटी टिप्स दिया और सबको आर्थिक सहयोग भी प्रदान करता रहता हूँ।
सवाल: लॉकडाउन के बाद देश में ऑनलाइन एजुकेशन काफी तेजी से चलन में आया है। मेट्रो सिटीज़ के लिए तो यह बहुत आम बात है लेकिन गांव-कस्बों और छोटे शहरों के बच्चों के लिए इसे आप एक अवसर के तौर पर देखते हैं या एक चैलेंज के तौर पर क्योंकि अमूमन यहां के बच्चे टेक्नोलॉजी से बहुत ज़्यादा अछूते रहे जाते हैं।
जवाब: ऑनलाइन शिक्षा उच्च शिक्षा में ज्यादा उपयोगी है लेकिन प्रारंभिक शिक्षा में ऑनलाइन शिक्षा से शिक्षा का उद्देश्य परिपूर्ण नही होगा। ऑनलाइन शिक्षा एक विकल्प है पर इस विकल्प से छात्रों की सभी आवश्कताओं का समाधान होगा, ऐसा मुझे नही लगता। थ्योरी तो साधन संपन्न लोग ऑनलाइन शिक्षा से ले सकते है पर प्रैक्टिकल के लिए तो लैब की जरूरत पड़ेगी। इसलिए शिक्षा के एक भाग की पूर्ति तो इससे होती है लेकिन शिक्षा के दूसरे पहलू इससे पूर्ण नही होते। इसलिए अल्पकाल के लिए तो इसका सहारा लिया जा सकता है लेकिन शिक्षा का ये माध्यम सबको उपलब्ध होगा, ऐसा सेटअप अभी भारत मे विकसित करने की जरूरत पड़ेगी।
सवाल: आपने बहुत साल पहले ‘हरा भरा गोंडा’ नाम से एक मिशन शुरू किया था और अभी लॉकडाउन ने पूरी दुनिया को प्रकृति का वो रूप दिख दिया जिसकी किसी ने कभी कल्पना भी नही की थी। प्रदूषण खत्म, नदियों का पानी साफ इत्यादि तो आपका क्या सोचना है कि ‘हरा भरा गोंडा’ जैसा मिशन पूरे देश में होना चाहिए?
जवाब: ईश्वर द्वारा बनाई गई हर चीज का अपना महत्व है। किसी न किसी रूप में मानव जीवन के लिए यह सब उपयोगी है। हम अपने ज्ञान से उसका कितना उपयोग अपने लिए करते है ये हम पर निर्भर करता है। विगत वर्षों में मानव ने पर्यावरण को अपनी कमाई का जरिया बना लिया और जम कर दोहन हुआ इसलिए पर्यावरण का संतुलन बिगड़ गया जिसके परिणाम अच्छे नही मिले। मैंने इसको महसूस किया लाखो की तादाद में पेड लगवाए, लोगो को पेड लगाने के लिए प्रेरित किया। मैंने 1996 में ये नारा दिया था ‘स्वच्छ देवीपाटन मंडल, स्वस्थ देवीपाटन मंडल और साक्षर देवीपाटन मंडल। मोदी जी ने भी 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद स्वछता के मिशन को देश भर में आगे बढ़ाया। लेकिन प्रकृति में इतना सामर्थ्य है कि खुद को संतुलित कर सके इसलिए एक दैवीय संकट ने नदियों को निर्मल कर दिया प्रदूषण का स्तर घटा दिया।
सवाल: पूरे देश मे तबलीगी जमात को लेकर बहुत सवाल उठाए गए। जिस तरफ से इन लोगों में देश भर में अपने आप को छिपाया, मोबाइल बंद कर दिए, अस्पतालों में एडमिट हुए तो वहां भी अशोभनीय हरकतें की जैसे खाने को लेकर, नर्सों व स्वास्थ्यकर्मियों के साथ। ऐसे बहुत सारे मामले सामने आए।
जवाब: ये दुर्भाग्यपूर्ण था लोगो को समझ नही है इसलिए ऐसे कारनामे हुए। मैं ऐसे लोगों की कड़ी निंदा करता हूं जिन्होंने इस महामारी को छिपाने की कोशिश की और डॉक्टरों के साथ अशोभनीय व्यवहार किया। अगर उन्हें समझ होती तो खुद सामने आते अपना चेकअप कराते और ईलाज कराते। जमातियों की वजह से समस्या बढ़ी, इस बात से इनकार नही किया जा सकता और ये भी सच है कि कुछ नादानों की वजह से अल्पसंख्यक समुदाय के लोगो को भी कटघरे में खड़ा होना पड़ा। मैं सिर्फ इतना कहूंगा कि धर्म का भक्त होना अच्छा है लेकिन धर्म-भक्ति के दौड़ में खुद अपनी जान गवां देना, यह जहिलपन है। खुदा ऐसे लीगो को सद्बुद्धि दे।
सवाल: प्रवासी मजदूरों का पलायन लगातार जारी है। सरकार ने विशेष ट्रेनें चलाईं, अपनी तरफ से मजदूरों की हर संभव मदद का ऐलान किया बावजूद इसके अभी तक पलायन नही रुका है और गरीब मजदूर पैदल, ट्रकों और जैसे तैसे करके अपने गांवो और घरों तक जाने की कोशिश कर रहे हैं। आखिर सरकार के अथक प्रयासों के बाद भी ऐसी स्थिति बनी हुई है, इसकी क्या वजह हो सकती है?
जवाब: प्रवासी मजदूरों की घर वापसी की समस्या अब बहुत हम हो चुकी है। पर ये सच है कि मजूदरो को घर वापसी मे बहुत समस्याओं का सामना करना पड़ा। इसके लिए कोई एक व्यक्ति जिम्मेदार नही है। राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वयन न होने के कारण मजदूरों के घर वापसी पर अच्छे से ध्यान नही दिया गया। इसलिए लोग पैदल और फिर ट्रकों पर बैठ कर जाने को मजबूर हुए। खैर जब कोई भी राष्ट्रव्यापी संकट का दौर आएगा तो सामान्य दिनो की सुविधाएं मिलने में व्यवधान आना स्वाभाविक है।
सवाल: जबसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने देश के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार आर्थिक पैकेज को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना कर रही हैं। उनका कहना है कि जनता राहत की उम्मीद लगा रही थी लेकिन सबको ‘शून्य’ मिला है और पैकेज में राज्यों के लिए कुछ भी नही है।
जवाब: कुछ तो लोग कहेंगे, लोगो का काम है कहना। भारतीय राजनीति का ये एक दुर्भाग्यपूर्ण पहलू है। काम कितना भी अच्छा क्यों न हो, विपक्ष हमेशा नकारात्मक सवाल उठाता रहता है। अच्छे को अच्छा कहना और गलत पर लगाम लगाना सभी राजनैतिक दल के नेताओ का प्रथम कर्तव्य होना चाहिए। लेकिन ऐसा होता नही है। यह देश की प्रगति में एक बड़ी बाधा है। वैसे जनता को सब मालूम है और जनता उसके अनुसार फैसला भी करने लगी है। अब अगर सच को झूठ साबित करने का कोई पार्टी प्रयास करती है तो जनता खुद उनको नकारने लगी है। शायद पूर्ण बहुमत की सरकार बनना इसी समझ का नतीजा है। अब 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज से राहुल गांधी, सोनिया गांधी, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, लालू यादव सरीखे नेताओ का व्यक्तिगत फायदा भले न हो लेकिन इससे देश के व्यापारियों उद्योगपतियों, कामगारों, किसानों, नौकरी करने वालो को जरूर लाभ मिलेगा। यह भी सही है कि घर बैठ कर राह निहारने वालो को न पहले कुछ मिला है, न अब मिलेगा और न ही आने वाली कोई दूसरी सरकार ही देगी। जो ईमानदारी के काम करना चाहता है इसका लाभ लेने का प्रयास करेगा और उसको जरूर इस पैकेज का लाभ मिलने वाला है। अब वो दौर नही रहा कि जनता के पैकेज का पैसा किसी पार्टी के नेता के स्विस बैंक अकाउंट में जमा हो।
सवाल: प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा पिछले कई दिनों से लगातार बसों को अंदर जाने की परमिशन को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार पर लगाए जा रहे आरोपों पर आपके क्या विचार हैं?
जवाब: जब जमीन बंजर हो जाती है तो उसको उपजाऊ बनाने के लिए किसान को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। लगातार दोहन से पुराने नेताओ ने कांग्रेस की जमीन बंजर कर डाली है। अब राहुल हो या प्रियंका, इनको न तो राजनीति की जमीनी हकीकत का ज्ञान है न ही देशवासियो की भावना को समझने की क्षमता है। इसलिए मुझे नही लगता है कि राजीनीति में अभी इनका कोई भविष्य है। इनको देश की परिस्थिति, देशवासियों की समस्या का गहन अध्ययन करना चाहिए। चतुर राजनीति का फलसफा जिन्हें नही पता होगा उन पर दांव हमेशा उल्टे पड़ेंगे जैसे प्रियंका खुद फस गयी बस के विवाद में, यह उनकी राजनीतिक अनुभवहीनता है।
सवाल: कोरोनावायरस जैसी महामारी पर देशवासियों को क्या सन्देश देना चाहते हैं?
जवाब: कोरोनावायरस मानव जनित महामारी दुनिया के लिए है घातक है लेकिन भारत की माटी में इसको झेलने की छमता है। यह हर भारतीय के लिए संकट के दौर में सुखद पहलू है। हमारी रफ-तफ जीवन शैली विषम परिस्थिति को झेलने और उससे उबरने की छमता है। बीमारियों को बर्दाश्त करने की ताकत के साथ-साथ आयुर्वेदिक पद्धति को अपनाना, गरम काढ़े का इस्तेमाल, गरम मसालों के इस्तेमाल से बहुत सारे लोग बिना अंग्रेजी दवा खाये खुद को स्वस्थ कर लेते है। इसलिए कॅरोना से भारतवासियों को घबराने की जरूरत नही लेकिन एहतियात जरूर बरते और प्रतिदिन तुलसी, काली मिर्च, कच्ची हल्दी के काढ़े का इस्तेमाल करते रहें। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी जी ने अपने सम्बोधन में बताया था कि गरम पानी पीते रहें, मास्क पहनें, घरों में सफाई रखें, सोशल डिस्टैन्सिंग बनाये रखें और जब जरुरी हो तभी घर के बाहर निकलें, आप को कुछ नही होगा मेरा दावा है।
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