ईरान और इजरायल (Iran-Israel War) के बीच जारी युद्ध अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। 24 दिनों से चल रही इस जंग के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख अचानक बदलता नजर आ रहा है। जो ट्रंप कुछ दिन पहले तक ईरान को “पूरी तरह बर्बाद” करने की धमकी दे रहे थे, अब वही शांति की बात कर रहे हैं।
हालात इतने बदल चुके हैं कि ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर पांच दिन तक हमला नहीं करने की घोषणा कर दी है, जिसे एक तरह का “आधा युद्धविराम” माना जा रहा है।
तेल अवीव पर ईरान का बड़ा हमला
ईरान ने 24 मार्च को इजरायल की राजधानी तेल अवीव पर जबरदस्त हमला किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्लस्टर बमों के जरिए कई बड़े धमाके किए गए, जिनमें 100 किलो तक वजनी बम शामिल थे। हमले के बाद तेल अवीव में भारी तबाही देखने को मिली और कई इलाकों में मलबा और धुएं का गुबार छा गया।
क्यों बदला ट्रंप का रुख?
ट्रंप के रुख में बदलाव के पीछे कई बड़े कारण सामने आ रहे हैं:
- खाड़ी देशों (कतर, UAE, बहरीन) की चेतावनी
- तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी
- अमेरिका के अंदर बढ़ता विरोध
- नाटो और सहयोगी देशों का साथ न मिलना
- विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप अब दबाव में हैं और यही वजह है कि वे युद्ध के बजाय बातचीत की दिशा में बढ़ रहे हैं।
क्या दुनिया युद्धविराम की ओर बढ़ रही है?
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान, तुर्किए और मिस्र जैसे देश अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता कर रहे हैं। अमेरिका ने 15 पॉइंट का प्रस्ताव भी ईरान को भेजा है, लेकिन अभी तक इस पर कोई स्पष्ट सहमति नहीं बनी है। ईरान ने साफ कर दिया है कि युद्ध केवल उसकी शर्तों पर ही खत्म होगा।
क्या है ग्राउंड ऑपरेशन की तैयारी?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के पास अब सीमित विकल्प बचे हैं। अगर बातचीत असफल होती है तो अमेरिका को ईरान की जमीन पर सैनिक उतारने का जोखिम उठाना पड़ सकता है, लेकिन यह कदम बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। ईरान का कठिन भूगोल और होर्मुज स्ट्रेट पर उसका नियंत्रण अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
ट्रंप-नेतन्याहू के प्लान फेल?
इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद का यह अनुमान गलत साबित हुआ कि युद्ध शुरू होते ही ईरान में जनता विद्रोह कर देगी। इसके उलट, ईरान की जनता अपनी सरकार और सेना के साथ खड़ी नजर आ रही है। इससे अमेरिका और इजरायल की रणनीति पर सवाल खड़े हो गए हैं।
ईरान-इजरायल युद्ध अब सिर्फ दो देशों का संघर्ष नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और ऊर्जा संकट से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। ट्रंप का बदलता रुख इस बात का संकेत है कि अब जंग से ज्यादा बातचीत ही समाधान का रास्ता बन सकती है।
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ईशा यादव पिछले 6 वर्षों से मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और अपनी जिम्मेदार व जमीनी रिपोर्टिंग के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत न्यूज़ रिपोर्टिंग से की और धीरे-धीरे राजनीतिक तथा सामाजिक विषयों की गंभीर कवरेज में अपनी अलग पहचान बनाई।
समसामयिक घटनाओं की सूक्ष्म समझ, तथ्यों की पड़ताल और स्पष्ट प्रस्तुति उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषताएँ हैं। फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने आम जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया और संतुलित दृष्टिकोण के साथ खबरों को सामने रखा।
वर्तमान में ईशा यादव My Nation News में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं। इस भूमिका में वे राजनीतिक घटनाक्रम, सामाजिक सरोकारों और विशेष रिपोर्ट्स पर काम करते हुए विश्वसनीय और प्रभावशाली पत्रकारिता को आगे बढ़ा रही हैं।
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