ABP Ideas of India: मेरा नाम खान है इसलिए पाकिस्तान जाने की सलाह ज्यादा दी जाती है – कबीर खान

<p style="text-align: justify;">बॉलीवुड के तीन बड़े डायरेक्टर कबीर खान, आनंद एल राय और नागेश कुकनूर ने एबीपी न्यूज के आइडियाज ऑफ इंडिया समिट 2022 में शामिल होकर फिल्मों को लेकर खुलकर बातचीत की. इस दौरान फिल्मों पर होने वाले विवादों और सोशल मीडिया पर होने वाली चर्चा पर भी इन बॉलीवुड डायरेक्टर्स ने अपनी राय रखी.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>सोशल मीडिया पर ज्यादा नेगेटिविटी</strong><br />अपने राष्ट्रवाद और देशप्रेम को लेकर कबीर खान ने कहा कि, जो भी मैं फिल्म बनाता हूं वो मेरी पर्सनैलिटी का रिफ्लेक्शन है. आजकल राष्ट्रवाद और देशभक्ति में फर्क आ गया है. राष्ट्रवाद के लिए आपको एक विलेन चाहिए होता है, लेकिन देशभक्ति के लिए कोई काउंटर प्वाइंट नहीं चाहिए होता है. इस बार मेरी वही कोशिश थी. मेरी कुछ ऐसी फिल्में हैं, जिसमें मैंने बहुत सारे तिरंगे दिखाए लेकिन वो नहीं चलीं. कबीर खान ने आजकल राष्ट्रवाद को लेकर गलत भाषा के इस्तेमाल पर कहा कि, आजकल सोशल मीडिया की वजह से लोगों को छूट मिल गई है. कई साल पहले वो ऐसा नहीं कर पाते थे. ये सब देखकर बुरा लगता है, सोशल मीडिया की नेगेटिविटी उसकी पॉजिटिव चीजों से ज्यादा हो गई हैं. मैं लड़ने नहीं निकला हूं, कहानी सुनाने निकला हूं. क्योंकि मेरा नाम खान भी है इसलिए गो टू पाकिस्तान ज्यादा कहा जाता है. एक बार पाकिस्तान गया था, तब वहां लश्कर ने कहा था कि गो बैक टू इंडिया. मैं ना इधर का रहा ना उधर का.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;">डायरेक्टर कबीर खान ने बॉलीवुड और हॉलीवुड फिल्मों में अंतर को लेकर कहा कि, असल में कहानी सुनाने का तरीका ही ऑडियंस को पकड़ता है. स्टोरी टेलिंग का ही तरीका चलेगा, फिर चाहे उसमें कुछ भी हो. मुझे नहीं लगता है कि हॉलीवुड और हमारी इंडस्ट्री में कुछ ज्यादा अंतर है. हालांकि बजट का बहुत बड़ा फर्क है, वहां वीएफएक्स पर कई गुना ज्यादा पैसा खर्च किया जाता है.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>अब अलग तरह की कहानी सुनाना हुआ आसान – आनंद एल राय</strong><br />फिल्म डायरेक्टर आनंद एल राय ने मौजूदा दौर की फिल्मों को लेकर कहा कि, जब एक कहानी चुनी जाती है तो मेरे लिए समाज के साथ आने वाली जनरेशन बहुत ताकत देती है. मेरी कहानी के लिए मुझे इनसे ही ताकत मिलती है. आज से 10 या 15 साल पहले वो कहानी मैं नहीं सुना सकता था, लेकिन अब मेरे पास वो ऑडियंस है जिसे मैं अपनी कहानी सुना सकता हूं.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;">मशहूर डायरेक्टर आनंद एल राय ने अलग तरह की फिल्मों को लेकर कहा कि, अपने साथ इतना कर लेना कि मैं आगे बढ़कर एक नई कहानी को चुन सकूं. मुझे हमेशा लगता है कि फिल्म मेकर की फिल्म नहीं चलना उसकी हार नहीं है, ये उसे एक कदम और आगे बढ़ाता है. यानी आगे बेहतर किया जाता है.&nbsp;</p>

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Team My Nation News
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