वाराणसी। Banaras Hindu University (BHU) में जल्द ही Anthropological Survey of India (AnSI) का फील्ड स्टेशन स्थापित किया जाएगा। इस संबंध में मंगलवार को दोनों संस्थानों के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह घोषणा BHU के विज्ञान संस्थान के प्राणीशास्त्र विभाग में आयोजित पैलियोजेनोमिक्स और पैलियोआर्कियोलॉजी विषयक संगोष्ठी के समापन समारोह के दौरान की गई, जिसका उपस्थित शिक्षकों, शोधार्थियों और छात्रों ने जोरदार स्वागत किया।
अनुसंधान और शिक्षा को मिलेगा नया आयाम
BHU के कुलपति Ajit Kumar Chaturvedi और AnSI के निदेशक B. V. Sharma ने बताया कि यह फील्ड स्टेशन प्राणीशास्त्र विभाग में स्थापित किया जाएगा। इस सहयोग के जरिए इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च, शिक्षा और बायो-कल्चरल हेरिटेज संरक्षण को नई दिशा मिलेगी। कुलपति प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि यह साझेदारी जैविक और सांस्कृतिक मानवविज्ञान के क्षेत्र में शोध क्षमता को कई गुना बढ़ाएगी और समाज से जुड़े अनुसंधानों को भी गति देगी।
पंचकर्म और माइक्रोबायोम रिसर्च को मिलेगा बढ़ावा
कुलपति ने बताया कि गट माइक्रोबायोम रिसर्च ने पंचकर्म जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैज्ञानिक रूप से समझने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि यह नया सहयोग भविष्य में ऐसे कई इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च प्रोजेक्ट्स के द्वार खोलेगा।
राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण साझेदारी
AnSI के निदेशक प्रो. बी.वी. शर्मा ने कहा कि BHU अपनी उत्कृष्ट शोध परंपरा और सुविधाओं के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि इस फील्ड स्टेशन की स्थापना से देश की जनजातीय, सांस्कृतिक और जैव-सांस्कृतिक विविधता के अध्ययन में नए आयाम जुड़ेंगे।
81 साल बाद काशी में AnSI की वापसी
इतिहास का जिक्र करते हुए प्राणीशास्त्र विभाग के प्रमुख M. Singaravel ने बताया कि AnSI की स्थापना 1945 में वाराणसी में हुई थी, जिसे बाद में 1951 में कोलकाता स्थानांतरित कर दिया गया था। अब 81 वर्षों बाद AnSI फिर से काशी में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगा, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक कदम है।
इस MoU पर BHU की ओर से रजिस्ट्रार Arun Kumar और AnSI की ओर से प्रो. बी.वी. शर्मा ने हस्ताक्षर किए। BHU और AnSI के बीच यह समझौता न केवल शिक्षा सहयोग को मजबूत करेगा बल्कि भारत की जैव-सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और शोध को भी नई दिशा देगा। इस मौके पर विज्ञान संकाय के डीन राजेश कुमार श्रीवास्तव समेत कई वरिष्ठ प्रोफेसर और शोधकर्ता मौजूद रहे।
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ईशा यादव पिछले 6 वर्षों से मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और अपनी जिम्मेदार व जमीनी रिपोर्टिंग के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत न्यूज़ रिपोर्टिंग से की और धीरे-धीरे राजनीतिक तथा सामाजिक विषयों की गंभीर कवरेज में अपनी अलग पहचान बनाई।
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वर्तमान में ईशा यादव My Nation News में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं। इस भूमिका में वे राजनीतिक घटनाक्रम, सामाजिक सरोकारों और विशेष रिपोर्ट्स पर काम करते हुए विश्वसनीय और प्रभावशाली पत्रकारिता को आगे बढ़ा रही हैं।
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