Bus Politics
- बसपा सुप्रीमो ने राजस्थान की कांग्रेस सरकार को कंगाल व अमानवीय कहा
- भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा बस राजनीति को लेकर कांग्रेस का दोगलापन बताया
संवाददाता: संचयिता चतुर्वेदी – लखनऊ
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लखनऊ। कोटा से उत्तर प्रदेश लाए गए छात्रों के लिए राजस्थान सरकार ने योगी से 36 लाख रुपये किराया मांगा है। इस किराए के बाद अब एक और खुलासा हुआ है कि कोटा से छात्रों को लाते समय रास्ते में बस का डीजल खत्म हो गया तो आधी रात को यूपी सरकार से 19 लाख रुपये वसूले गए, तब बसों को डीजल दिया गया।
1. राजस्थान की कांग्रेसी सरकार द्वारा कोटा से करीब 12000 युवा-युवतियों को वापस उनके घर भेजने पर हुए खर्च के रूप में यूपी सरकार से 36.36 लाख रुपए और देने की जो माँग की है वह उसकी कंगाली व अमानवीयता को प्रदर्शित करता है। दो पड़ोसी राज्यों के बीच ऐसी घिनौनी राजनीति अति-दुखःद। 1/3
— Mayawati (@Mayawati) May 22, 2020
2. लेकिन कांग्रेसी राजस्थान सरकार एक तरफ कोटा से यूपी के छात्रों को अपनी कुछ बसों से वापस भेजने के लिए मनमाना किराया वसूल रही है तो दूसरी तरफ अब प्रवासी मजदूरों को यूपी में उनके घर भेजने के लिए बसों की बात करके जो राजनीतिक खेल खेल कर रही है यह कितना उचित व कितना मानवीय? 2/3
— Mayawati (@Mayawati) May 22, 2020
इस मामले को लेकर चल रहे विवादों के बीच बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी कांग्रेस से नाराजगी दिखते हुए कहा कि राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकार को 36.36 लाख रुपये का बिल भेजकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। यह बिल कोटा से यूपी लाए गए बच्चों के लिए 70 बसें उपलब्ध करवाने को लेकर भेजा गया है। उन्होंने अपने आधिकारिक ट्ववीट के माध्यम से कहा कि राजस्थान की कांग्रेस सरकार द्वारा कोटा से करीब 12000 युवक-युवतियों को वापस उनके घर भेजने पर हुए खर्च के रूप में यूपी सरकार से 36.36 लाख रुपये और देने की जो मांग की गई है, वह उसकी कंगाली व अमानवीयता को प्रदर्शित करता है। इसे घटिया राजनीति ही कहा जाएगा। दो पड़ोसी राज्यों के बीच ऐसी घिनौनी राजनीति अति-दुखद है।
कोटा से उत्तर प्रदेश के students को वापिस लाते समय UP के कुछ बसों को डीज़ल की आवश्यकता पड़ गयी ..दया छोड़िए ..आधि रात को दफ़्तर खुलवा कर प्रियंका वाड्रा की राजस्थान सरकार ने UP सरकार से पहले 19 लाख रुपए लिए और उसके बाद बसों को रवाना होने दिया
वाह रे मदद।#दोगली_कांग्रेस pic.twitter.com/QQexV1BlVq— Sambit Patra (@sambitswaraj) May 21, 2020
वहीं बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी कांग्रेस को खरी-खोटी सुनाते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार प्रवासी श्रमिकों पर दया की बात कर रही है। उनकी दया तब कहां गई थी जब कोटा में फंसे छात्रों को यूपी लाने के नाम पर राज्य सरकार से वसूली की गई। संबित पात्रा ने कहा कि बसों का डीजल खत्म हो गया था। फंसे छात्रों की मदद करने की बजाए गहलोत सरकार ने वसूली की। संबित ने इस मामले में ट्वीट करके लिखा, ‘कोटा से उत्तर प्रदेश के छात्रों को वापस लाते समय UP के कुछ बसों को डीज़ल की आवश्यकता पड़ गई। दया छोड़िए, आधी रात को दफ़्तर खुलवा कर प्रियंका वाड्रा की राजस्थान सरकार ने यूपी सरकार से पहले 19 लाख रुपये लिए और उसके बाद बसों को रवाना होने दिया। वाह रे मदद।’ इस ट्वीट के आगे उन्होंने हैश टैग दोगली कांग्रेस किया। संबित ने इस ट्वीट में वह चेक भी पोस्ट किया है जो यूपी सरकार ने राजस्थान में डीजल के लिए दिया था।
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दरअसल यूपी सरकार को 1,000 बस देने के कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के प्रस्ताव पर सियासत चल ही रही थी कि इसी बीच राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने यूपी सरकार को 36.36 लाख रुपये का बिल थमा दिया है। यह बिल कोटा से यूपी लाए गए बच्चों के लिए 70 बसें उपलब्ध करवाने का है। इसको लेकर सरकार ने कांग्रेस की नीयत पर सवाल खड़ा करना शुरू कर दिया है।
उत्तर प्रदेश के 12 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं लॉकडाउन में फंस गए थे। योगी सरकार ने इन बच्चों को सरकारी संसाधन पर घर पहुंचाने का फैसला किया था। राजस्थान गई यूपी रोडवेज की बसों व राजस्थान सरकार की ओर से दी गई 70 बसों के डीजल के लिए यूपी सरकार 19.76 लाख रुपये का भुगतान पहले ही कर चुकी है। अब 36.36 लाख रुपये बसों के किराए का बिल राजस्थान रोडवेज की ओर से यूपी रोडवेज को भेजा गया है। भुगतान शीघ्र कराने की अपेक्षा की गई है।
उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि एक ओर कांग्रेस यूपी के प्रवासियों के लिए नि:शुल्क बसें देने का दावा करती है और दूसरी तरफ उसकी ही पार्टी की सरकार यूपी लाए गए बच्चों का किराया मांग रही है।
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राजस्थान सरकार के परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास का कहना है कि यूपी सरकार ने हमसें इमर्जेंसी में बसें मांगी थी और उसका भुगतान करने को कहा था। हमने तत्काल अनुबंधित और निजी बसें उपलब्ध करवाईं थीं। हमें उनका भुगतान करना है इसलिए हमने यूपी सरकार को बिल भेजा है। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि हमारे पास जो प्रारंभिक सूचना वहां के प्रशासन से मिली थीं, उसके हिसाब से करीब 10 हजार छात्र-छात्राओं का पंजीकरण हुआ था। इसके हिसाब से 560 बसें हमने भेजी थीं। 17 अप्रैल से 19 अप्रैल तक यह प्रक्रिया चली। वहां पहुंचने पर करीब 2 हजार छात्र-छात्राएं और बढ़ गए। ऐसे में उनके हित को देखते हुए राजस्थान सरकार से बसों के लिए मदद मांगी गई थी। राजस्थान रोडवेज की ओर से आपातकालीन सेवा के नाम पर 70 बसें उपलब्ध करवाईं गईं। इसके कुछ बच्चों को फतेहपुर सीकरी तक और कुछ बच्चों को झांसी बॉर्डर तक लाया गया था।
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