Gangubai Kathiawadi

Gangubai Kathiawadi: कहानी माफिया डॉन की, जिसे उसके पति ने 500 रुपये के लिए कोठे पर बेच दिया

  • 60 के दशक में गंगूबाई कठियावाड़ी (Gangubai Kathiawadi) मुंबई के कमाठीपुरा में वेश्यालय चलाती थी
  • इस फिल्म में गंगूबाई (Gangubai Kathiawadi) का किरदार आलिया भट्ट निभा रही हैं, फिल्म में अजय देवगन और इमरान हाशमी भी नजर आएंगे

[avatar user=”Shraddha Srivastava” size=”thumbnail” align=”left”]By Shraddha Srivastava[/avatar]

संजय लीला भंसाली की आने वाली फिल्म गंगूबाई काठियावाड़ी (Gangubai Kathiawadi) काफी समय से चर्चा में बनी हुई है। इस फिल्म में गंगूबाई काठियावाड़ी (Gangubai Kathiawadi) का किरदार आलिया भट्ट निभा रही हैं। फिल्म में अजय देवगन और इमरान हाशमी के साथ अभिनेता विजय राज भी नजर आएंगे। इस फिल्म की कहानी गंगूबाई काठियावाड़ी (Gangubai Kathiawadi) के जीवन पर केंद्रित है। लेकिन क्या आप जानते हैं की असल जिंदगी में गंगूबाई को उसके पति ने मुंबई के कोठे को महज 500 रुपये में बेच दिया था। आपको बताते हैं गंगूबाई की असली कहानी के बारे में जिनके ऊपर ये फिल्म बनी है।

गंगूबाई का असली नाम हरजीवनदास काठियावाड़ी था, जो कि गुजरात के काठियावाड़ की रहने वाली थी। 1939 में जन्मी, हरजीवन गुजरात के काठियावाड़ के एक बहुत ही एक रईस परिवार की बेटी थी। बचपन में गंगू फिल्मों में हीरोइन बनने के सपने देखा करती थी। 16 साल की उमर में ही उसे अपने पिता के अकाउंटेंट रमनिक लाल से प्यार हो गया था। गंगू अपना घर छोड़कर उसी अकाउंटेंट के साथ भागकर मुंबई चली आई।

हरजीवनदास काठियावाड़ी की उमर नादान थी और उसका दिल ख्यालों की दुनिया में ही खोया रहता था। प्यार में पड़ी हरजीवन के साथ रमनिक लाल ने शादी कर ली लेकिन शादी के बाद उसके धोखेबाज पति रमनिक लाल ने महज 500 रुपये के लिए उसे मुंबई के ही कमाठीपुरा के एक कोठे पर बेच दिया था। इसके बाद गंगू का जीवन नर्क से भी बदतर हो गया और यहीं से हरजीवनदास के गंगूबाई काठियावाड़ी बनने की कहानी शुरू हुई।

हुसैन जेदी ने अपनी किताब ‘माफिया क्वींस ऑफ मुंबई’ में गंगूबाई काठियावाड़ी की पूरी कहानी बताई है। उनकी किताब के अनुसार उस समय का माफिया डॉन करीम लाला की गैंग के एक आदमी ने गंगूबाई का बालात्कार किया था। उस आदमी ने गंगूबाई को बहुत मारा-पीटा भी था। गंगूबाई को कहीं से पता चला कि उसके साथ बदसलूकी करने वाला आदमी करीम लाला की गैंग का है। करीम लाला माफिया डॉन जरूर था, लेकिन उसके दरवाजे से कभी कोई फारिणादी खाली हाथ नहीं लौटता था। करीम लाला अपनी दरियादिली और इन्साफ के लिए भी जाना जाता था। इसके बाद गंगूबाई ने करीम लाला से मुलाकात कर इन्साफ मांगा था। जिसके बाद करीम लाला ने अपने गैंग के उस आदमी को सजा दी थी। गंगूबाई ने करीम लाला को राखी बांध कर अपना भाई बना लिया था।

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माफिया डॉन करीम लाला की बहन बनने का बाद गंगूबाई का कद बढ़ गया था। इसके बाद पति की धोखेबाजी और समाज की दरिंदगी का शिकार हुई गंगूबाई आगे चलकर मुंबई की सबसे बड़ी फीमेड डॉन में से एक बनी। वह कमाठीपुरा की कोठेवाली गंगूबाई बन गई। धीरे-धीरे कमाठीपुरा का पूरा कंट्रोल भी गंगूबाई के हाथ में आ गया। गंगूबाई का काम भले ही कोठा चलाना था, लेकिन वो बहुत नेकदिल थी, इसलिए सेक्स वर्कर्स उसे ‘गंगू मां’ बुलाते थे। गंगूबाई ने अपने वेश्‍यालय में कभी किसी लड़की के साथ जबरदस्‍ती नहीं की। वो सिर्फ उसी को कोठे पर रखती थी, जो अपनी मर्जी से आती थीं। गंगूबाई सेक्स वर्कर्स के अधिकारों के लिए एक आवाज बन गईं थी।

Gangubai Kathiawadi

गंगूबाई की धमक ऐसी थी कि उसकी बिना इजाजत कोई भी गैंगस्‍टर या बड़े से बड़ा माफिया कोठे या कमाठीपुरा में कदम नहीं रखता था। गंगूबाई ने अपने जीवन में न सिर्फ सेक्‍स वर्कर्स के लिए काम किया, बल्‍कि‍ वो अनाथ बच्‍चों का भी सहारा बनीं। गंगूबाई ने कई अनाथ और बेघर बच्चों को गोद भी लिया था। इन बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी भी गंगूबाई ने ही ली थी।

गंगूबाई ने सेक्‍स वर्कर्स के अध‍िकार और हितों के लिए अपनी आवाज खूब बुलंद की। मुंबई के आजाद मैदान में सेक्स वर्कर्स के हक में गंगूबाई का भाषण वहां के हर छोटे-बड़े अखबारों की सुर्ख‍ियां बना था। 60 के दशक में वो एकमात्र कोठामालकिन थी जिसके पास खुद की बेंटले कार थी। हुसैन जैदी की किताब में यहां तक जिक्र है कि गंगूबाई उस समय देश के प्रधानमंत्री रहे जवाहरलाल नेहरू से भी मुलाक़ात की थी।

अब गंगूबाई की इसी कहानी को संजय लीला भंसाली अपनी आने वाली फिल्म गंगूबाई काठियावाड़ी में दिखाने वाले हैं। ये फिल्म इसी साल 30 जुलाई को रिलीज़ होने वाली है। गंगूबाई की कहानी और उनके किरदार के साथ संजय लीला भंसाली और आलिया भट्ट कितना न्याय कर पाते हैं ये तो अब फिल्म रिलीज के बाद ही पता चलेगा।

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