- कोरोना (Corona) मरीजों के इलाज के लिए प्राइवेट अस्पतालों ने बहुत अधिक फीस चार्ज किये
- समिति ने कहा कि स्थायी मूल्य निर्धारण प्रक्रिया से देश में कई मौतों को टाला भी जा सकता था
- जिन डॉक्टरों ने इस महामारी के खिलाफ लड़ाई में अपनी जान दे दी, उन्हें शहीद के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए
[avatar user=”Mayank Shukla” size=”thumbnail” align=”left”]By Mayank Shukla[/avatar]
नई दिल्ली। एक संसदीय समिति की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कोविड-19 (Covid-19 Corona virus) के बढ़ते मामलों के बीच सरकारी अस्पतालों में हुई बेड की कमी और कोरोना (Corona) मरीजों के इलाज के लिए विशेष दिशा-निर्देशों के अभाव में प्राइवेट अस्पतालों ने बहुत ज़्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पैसे लिए। इसके साथ ही समिति ने यह भी कहा कि स्थायी मूल्य निर्धारण प्रक्रिया से देश में कई मौतों को टाला भी जा सकता था। स्वास्थ्य संबंधी स्थाई संसदीय समिति के अध्यक्ष राम गोपाल यादव ने राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को ‘कोविड-19 महामारी का प्रकोप और इसका प्रबंधन’ की रिपोर्ट सौंपी।
भारत सरकार द्वारा कोविड-19 महामारी से निपटने के संबंध में यह किसी भी संसदीय समिति की सबसे पहली रिपोर्ट है। समिति ने कहा कि 130 करोड़ की आबादी वाले देश में स्वास्थ्य पर खर्च ‘बेहद कम है’ और भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था की नाजुक प्रणाली के कारण इस महामारी से प्रभावी तरीके से मुकाबला करने में एक बड़ी रुकावट आई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि समिति सरकार से सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में अपने निवेश को बढ़ाने की अनुशंसा करती है।
समिति ने सरकार से कहा कि दो साल के भीतर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 2.5 प्रतिशत तक के खर्च के राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करें क्योंकि वर्ष 2025 के निर्धारित समय अभी काफी दूर हैं और उस समय तक सार्वजनिक स्वास्थ्य को जोखिम में नहीं रखा जा सकता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में 2025 तक जीडीपी का 2.5 प्रतिशत स्वास्थ्य सेवा पर सरकारी खर्च का लक्ष्य रखा गया है जो 2017 में 1.15 प्रतिशत था।
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समिति ने कहा कि यह पाया गया कि देश के सरकारी अस्पतालों में बेड की संख्या कोविड (Covid-19 Corona virus) और गैर-कोविड मरीजों की बढ़ती संख्या के लिहाज से पर्याप्त नहीं थी। निजी अस्पतालों में कोविड के इलाज के लिए विशिष्ट दिशा-निर्देशों के न होने से मरीजों को अत्यधिक शुल्क देना पड़ा। समिति ने जोर दिया कि सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और महामारी के मद्देनजर सरकारी और निजी अस्पतालों के बीच बेहतर साझेदारी की जरूरत है। समिति ने कहा कि जिन डॉक्टरों ने इस महामारी (Covid-19 Corona virus) के खिलाफ लड़ाई में अपनी जान दे दी, उन्हें शहीद के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए और उनके परिवार को भी पर्याप्त मुआवजा दिया जाना चाहिए।
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