- इन्कमटैक्स रिटर्न भरने की अंतिम तारीख 31 जुलाई से बढ़ाकर 30 नवंबर की गई और टीडीएस में 25% कटौती की गयी
- पीएफ कंट्रीब्यूशन की लिमिट को 12% से घटाकर 10% किया गया
- 100 से कम कर्मचारी वाली कंपनियों में 15 हजार से कम सैलरी वालों का पीएफ पीएफ कंट्रीब्यूशन सरकार देगी
- 25 मार्च के बाद पूरे होने वाले प्रोजेक्ट के कम्प्लीशन के लिए रियल एस्टेट डेवलपर्स को 6 महीने की राहत दी गई
संवाददाता मयंक शुक्ला की विशेष रिपोर्ट
नई दिल्ली। कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन के कारण उत्पन्न हुए इकनोमिक स्लोडाउन से उबरने इसे एक औद्योगिक अवसर में बदलने के लिए पीम मोदी द्वारा देश के लिए घोषित 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज में से तीन लाख करोड़ रुपए का कोलेट्रल फ्री ऋण एमएसएमई को दिया जायेगा। इसके साथ ही सरकार ने एमएसएमई की परिभाषा बदलते हुये मध्यम उद्यम के कारोबार की सीमा को बढ़ाकर 100 करोड़़ रुपए कर दिया गया है। इसके साथ ही 20 लाख करोड़ रुपए के आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज 15 महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं जिनमें 6 घोषणाएं MSME के लिए, 3 Tax, 2 Employee Provident Fund, 2 Non Banking Finance व एक-एक घोषणा Power Distribution और Real Estate Sector के लिए थीं।
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिये आर्थिक पैकेज के पहले चरण की घोषणा करते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत विभिन्न क्षेत्रों के लिए पैकेज की घोषणा की जा रही है और अभी लगातार अलग-अलग क्षेत्रों के लिए भी घोषणाएं की जाएंगी।
1. मंदी की मार झेल रहे छोटे उद्योगों के लिए 20 हजार करोड़ रुपए
मंदी की मार झेल रहे छोटे उद्योगों के लिए 20 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है जिससे Non Performing Assets हुए या संकट झेल रहे करीब दो लाख से अधिक MSME को फायदा मिलेगा। इसके लिए सरकार Credit Gaurantee Fund Trust For Micro and Small Enterprises को पैसा देगी और यह ट्रस्ट बैंकों को पैसा देगा फिर बैंकों से उद्योगों को फंड मिलेगा। MSME में 50 हजार करोड़ रुपए का निवेश किया जायेगा और जो बेहतर कारोबार कर रहे हैं उनके लिए 10 हजार करोड़ रुपए के फंड की स्थापना की जायेगी जिससे MSME को Stock Market में लिस्ट कराने में सहायता मिलेगी।
2. MSME की परिभाषा बदली गयी
सरकार ने MSME की परिभाषा बदलते हुये मध्यम उद्यम के कारोबार की सीमा को बढ़ाकर 100 करोड़़ रुपए कर दिया गया है। MSME की नई परिभाषा में माइक्रो उद्यम में एक करोड़ रुपए तक का निवेश किया जा सकेगा और इसके कारोबार की सीमा पांच करोड़ रुपए होगी और इसी तरह से लघु उद्यम में 10 करोड़ रुपए का निवेश किया जा सकेगा और इसका कुल टर्नओवर 50 करोड़ रुपए का होगा। मध्यम उद्यम में 20 करोड़ रुपए तक निवेश होगा और इसका कुल टर्नओवर 100 करोड़ रुपए तक का होगा।
सरकार ने अब से मैन्यूफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के लिए छोटे उद्योगों की परिभाषा एक समान कर दी है। माइक्रो यानी बहुत छोटे उद्योग वे कहलाएंगे जहां इन्वेस्टमेंट 1 करोड़ का है और टर्नओवर 5 करोड़ का है। स्मॉल यानी छोटे उद्योग वे कहलाएंगे जहां इन्वेस्टमेंट 10 करोड़ का है और टर्नओवर 50 करोड़ का है। मीडियम यानी मझले उद्योग वे कहलाएंगे जहां इन्वेस्टमेंट 20 करोड़ का और टर्नओवर 100 करोड़ का है। इस नयी परिभाषा से अब ज्यादा से ज़्यादा उद्योग एमएसएमई के दायरे में आएंगे।
3. Income Tax Return की तारीख 30 नवंबर तक बढ़ाई
Financial Year 2019-2020 के लिए Income tax Return भरने की अंतिम तारीख 31 जुलाई से बढ़ाकर अब 30 नवंबर कर दी गई है। Tax Audit की आखिरी तारीख भी 30 सितंबर से बढ़ाकर 31 अक्टूबर की गई है। इसके अलावा TDS व TCS में 25% की कटौती की जाएगी जिसके चलते Taxpayers पर 50 हजार करोड़ रुपए का भार कम पड़ेगा। टीडीएस का यह नया रेट कल से 31 मार्च 2021 तक लागू रहेगा।
4: EPF Contribution अब 12% की जगह 10% होगा
सरकार ने Private Sector में काम करने वाले कर्मचारियों इन-हैण्ड सेलरी बढ़ने के उद्देश्य से अगले तीन महीने के लिए Employee Provident Fund (EPF) में दिए जाने वाले Contribution में भी कमी की है। अभी तक कर्मचारियों के वेतन का 12% EPF में जमा होता है और साथ ही Employer भी इतनी ही राशि EPF में जमा कराता है। अब Private Sector के Employer और Employees का Contribution 12-12% से घटाकर 10-10% कर दिया गया है। कर्मचारी के EPF Account में अब उसके वेतन के 24% की बजाय 20% के बराबर राशि ही जमा होगी। हालांकि ऐसे कर्मचारियों को जो प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज के दायरे में नहीं आते और केंद्र और राज्य सरकारों के पब्लिक एंटरप्राइज में काम करने वालों के लिए 12-12% का Contribution जारी रहेगा।
5. EPF में 2500 करोड़ का सपोर्ट
100 कर्मचारियों की लिमिट तक ऑर्गनाइज़ेशन जिनमें 90 फीसद कर्मचारियों का वेतन 15 हजार रुपए से कम है उन्हें पूर्व में दी गई छूट की सीमा तीन महीने और बढ़ा दी गई है। इससे पहले सरकार ने कहा था कि ऐसे ऑर्गनाइज़ेशन के कर्मचारियों और एम्प्लायर दोनों की तरफ से दिया जाने वाला मार्च, अप्रैल और मई का शेयर सरकार जमा कराएगी जिसकी अवधि भी अब अगस्त तक बढ़ा दी गई है और इससे 3.67 लाख इंडस्ट्री में काम करने वाले 72.22 लाख कर्मचारी को फायदा होगा और अर्थव्यवस्था में 2,500 करोड़ रुपए की Liquidity भी बढ़ेगी।
6. Real Estate Developers को बड़ी राहत
Real Estate Sector को राहत देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सभी सरकारी एजेंसियां सभी ठेकेदारों को कंस्ट्रक्शन और कमोडिटी एवं कॉन्ट्रैक्ट को पूरा करने के लिये 6 महीने की समयसीमा बढ़ाएंगी यानी ऐसे रियल एस्टेट डेवलपर्स जिनके प्रोजेक्ट 25 मार्च या उसके बाद पूरे होने थे, ऐसे प्रोजेक्ट के रजिस्ट्रेशन और कम्प्लीशन की टाइमलाइन अब 6 महीने के लिए बढ़ा दी जाएगी जिसके लिए अलग से किसी तरह के आवेदन की जरूरत नहीं होगी। ऐसे में अगर रेगुलेटरी अथॉरिटी को जरूरी लगता है तो वे कम्प्लीशन की टाइमलाइन को तीन और महीने के लिए भी बढ़ा सकते हैं। टाइमलाइन बढ़ने से अपने आप ही रियल एस्टेट प्रोजेेक्ट्स को नया प्रोजेक्ट कम्प्लीशन सर्टिफिकेट मिल जाएगा जिसके लिए केंद्र राज्यों को एडवाइजरी जारी करेगा।
7. छोटे उद्योगों को 3 लाख करोड़ रुपए का Automatic Loan
इस अभियान के तहत एमएसएमई के लिए तीन लाख करोड़ रुपए का कोलेट्रल फ्री ऑटोमैटिक लोन देने का भी प्रावधान किया गया है। यह लोन चार साल के लिए होगा और पहले साल यानि 12 महीने तक प्रिंसिपल अमाउंट का भुगतान नहीं करना होगा और इसके बदले में कोई गारंटी नहीं देनी होगी और न ही कोई गारंटी फीस लगेगी। इसके तहत 100 करोड़ रुपए के कारोबार वाले एमएसएमई को 25 करोड़ रुपए तक का लोन मिलेगा। यह योजना 31 अक्टूबर 2020 तक उपलब्ध होगी।
8. 200 करोड़ रुपए तक के सरकारी टेंडर में देश के उद्योगों को मौका
अभी तक ग्लोबल टेंडर की वजह से विदेशी कंपनियां टेंडर हासिल करने की दौड़ में होती थीं और छोटे घरेलू उद्योगों को मौका नहीं मिलता था लेकिन अब सरकार अगर 200 करोड़ रुपए तक की खरीद करेगी तो उसके लिए ग्लोबल टेंडर जारी नहीं किया जाएगा। जनरल फाइनेंशियल रूल्स में बदलाव किया जाएगा ताकि देश के छोटे उद्योगों को टेंडर हासिल करने का मौका मिल सके।
9. Power Disribution कंपनियों को मदद
Power Contribution कंपनियों को 90 हजार करोड़ रुपए की मदद मिलेगी क्योंकि उनके रेवेन्यू में काफी कमी आई है। यह मदद पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन डिस्कॉम कंपनियों कोमिलेगी क्योंकि अभी डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों को पावर जनरेशन कंपनियों और ट्रांसमिशन कंपनियों को 94 हजार करोड़ रुपए चुकाने हैं लेकिन उनके पास पैसे की कमी है।
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