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Parijaat Tree: जिले का पौराणिक वृक्ष बचाने के लिए गृह-मंत्री को लिखा पत्र

पारिजात वृक्ष (Parijaat Tree) जो पूरे प्रदेश में दो ही वृक्ष है जहाँ लोग पूरी आस्था से मन्नते मांगते हैं और उनकी मनोकामनाये पूरी भी होती है लेकिन शासन-प्रशासन की लापरवाही से सड़न और कीड़ो के कारण वृक्ष खोखला होता जा रहा है।

संवाददाता: मयंक शुक्ला

सुलतानपुर। शहर की पैराणिक विरासत पारिजात वृक्ष (Parijaat Tree) क्षतिग्रस्त होता जा रहा है। शहर के आध्यात्मिक और सामाजिक सरोकार रखने वाले लोग इसके संरक्षण में लगे हुए है। परन्तु सड़न और कीड़ो के कारण वृक्ष खोखला होता जा रहा है। समय रहते यदि इस ओर ध्यान नही दिया गया तो देवतुल्य वृक्ष का संरक्षण कर पाना बहुत मुश्किल हो जाएगा। लगभग पांच वर्ष पूर्व अनदेखी के कारण ही इस वृक्ष की मोटी डाली स्वतः गिर गयी थी।

 

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इस वृक्ष पर आस्था रखने वाले लोगों का मानना है कि इस वृक्ष पर शासन प्रशासन ने इस वृक्ष को संरक्षण नही दिया।विषय के जानकार लोगों ने इस पर ध्यान नही दिया तो वृक्ष को बचाया नही जा सकेगा। इस वृक्ष के साथ करोड़ो लोगों की आस्था जुड़ी हुई है।

 

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ज्योतिषाचार्य पं. दिनेश तिवारी

ज्योतिषाचार्य पं. दिनेश तिवारी का कहना है कि सुलतानपुर ज़िले में पारिजात वृक्ष (Parijaat Tree) करोड़ों लोगो की आस्था का केंद्र है। पारिजात वृक्ष (Parijaat Tree) जो पूरे प्रदेश में दो ही वृक्ष है जहाँ लोग पूरी आस्था से मन्नते मांगते हैं और उनकी मनोकामनाये पूरी भी होती है। युवा वर्ग अपने प्रेम को पाने, शादी शुदा महिलाए अपने सुहाग के लिए मन्नते मांगती हैं। श्रद्धा का ये मेला प्रत्येक शुक्रवार और सोमवार को लगता है जहां लोग पूरी श्रद्धा से इस वृक्ष को नमन कर अपनी मनोकामनाये मांगते है। सुलतानपुर के इस पारिजात वृक्ष (Parijaat Tree) की सही आंकलन कोई नहीं कर पाया है। जिले के बुज़ुर्ग इस वृक्ष को सैकड़ो साल पुराना बताते हैं।

 

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मानवाधिकार कार्यकर्ता अभिषेक सिंह ने इस वृक्ष के संरक्षण के लिए गृहमंत्री को पत्र लिखा है जिसमे लिखा है कि पौराणिक धरोहर पारिजात वृक्ष (कल्पवृक्ष) लगातार क्षतिग्रस्त होता जा रहा है, जो अत्यधिक चिंता का विषय है। यहां करोड़ो लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। बताया जाता है कि यह वृक्ष विश्व मे सिर्फ दो ही स्थानों पर है। इसके साथ ही अन्य बहुत सी आध्यात्मिक मान्यताएं इस वृक्ष के साथ जुड़ी हुई हैं।

 

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आध्यात्मिक एवम समाजसेवी संस्थाएं वृक्ष के संरक्षण की पुरजोर कोशिश कर रही हैं। वृक्ष में सड़न पैदा हो गयी है। कुछ वर्ष पूर्व उसकी मोटी टहनी सड़न के कारण टूट कर गिर गयी थी। स्थानीय प्रशासन इस ओर ध्यान नही दे रहा है। उन्होंने मांग कि है कि वृक्ष के संरक्षण हेतु अविलम्ब आवश्यक कदम उठाएं ताकि पैराणिक धरोहर को संरक्षित किया जा सके।

 

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