उत्तर प्रदेश के अमेठी में महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) की एक नयी मिसाल देखने को मिल रही है। जिले की 682 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत 250 से अधिक महिलाओं को मेड के पदों पर नियुक्ति की गयी है। इसके पहले इन सभी पदों पर सिर्फ पुरुषों की नियुक्ति की जाती थी।
[avatar user=”Shubham Baranwal” size=”thumbnail” align=”left”]By Shubham Baranwal[/avatar]
अमेठी। उत्तर प्रदेश के वीवीआईपी जिले व स्मृति ईरानी के संसदीय क्षेत्र अमेठी में महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) की एक नयी मिसाल देखने को मिल रही है। दरअसल मोदी सरकार में मंत्री स्मृति ईरानी के नेतृत्व में मनरेगा योजना के तहत महिलाओं को बड़ी जिम्मेदारी मिली है। जिले की 682 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत 250 से अधिक महिलाओं को मेड के पदों पर नियुक्ति की गयी है। गौरतलब है कि इसके पहले इन सभी पदों पर सिर्फ पुरुषों की नियुक्ति की जाती थी। पहली बार इन पदों पर महिलाओं की नियुक्ति का श्रेय केंद्रीय मंत्री व अमेठी सांसद स्मृति ईरानी को दिया जा रहा है।

अमेठी के डीएम अरुण कुमार ने कहा कि महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) को लेकर केंद्र सरकार का निर्देश भी है कि महिलाओं की भागेदारी बधाई जाए। ऐसे में मनरेगा योजना में ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को शामिल किया जा रहा है। इसके साथ ही जिले के गांवों में चल रहे कार्यों में बड़ी संख्या में काम कर रहे मजदूरों में महिलाओं की संख्या बढ़ाने का काम किया जा रहा है। फिलहाल ढाई सौ से अधिक महिलायें मेड का काम कर रही हैं। इसके अलावा गांवों में सामुदायिक शैचालय व पंचायत भवन का कार्य भी तेजी से चल रहा है। शासन के निर्देशानुसार महिलाओं को काम दिया जा रहा है।

अमेठी की सीडीओ अंकुर लाठेर ने कहा कि महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) के लिए सरकार की तरफ से निर्देश हैं। मेड के कार्य के लिए महिलाओं को ही चुना जा रहा है। कुल मनरेगा मजदूरों में अब 35 फीसद महिलाएं हैं। अब तक अमेठी जिले में कुल 682 ग्राम पंचायतों में 250 के आसपास महिला मेड को सेलेक्ट किया जा चुका है। यदि जनपद में मेड के पदों पर महिलाएं नियुक्त होंगी तो ऐसे महिला मजदूर और आगे आकर काम करेंगी।
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अमेठी में पंचायत चुनाव संपन्न होने के बाद गांवों में मनरेगा के तहत विकास कार्य शुरू हो गए हैं। ग्राम प्रधान अपने-अपने इलाकों में सड़क, तालाब, नालियां और खड़ंजा निर्माण करवा रहे हैं। मनरेगा के तहत गांव के दिहाड़ी मजदूरों को काम मिल रहा है। ऐसी स्थिति में सरकारी स्तर पर 15 से 20 मजदूरों पर एक मेड रखने का प्रावधान है, जिनकी देखरेख में काम होता है। वैसे इसके पहले इस पोस्ट पर पुरुषों को नियुक्त किया जाता रहा है। लेकिन इस बार सरकार निर्देशों के अनुसार महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) को बढ़ावा देने के लिए मेड के पदों पर महिलाओं की नियुक्ति के निर्देश दिए गए हैं।
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