
<p style="text-align: justify;"><strong>Intelligence Alert In J&K:</strong> अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद अब जम्मू कश्मीर में अफगानिस्तान से ड्रग्स की तस्करी बढ़ने का अलर्ट खुफिया एजेंसियों ने जारी किया है. इन रिपोर्ट्स के बीच जम्मू-कश्मीर पुलिस के एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने सीमा से लेकर शहर तक निगरानी और चौकसी बढ़ा दी है.अफगानिस्तान पर तालिबान ने पूरी तरह से कब्जा कर लिया है और अब तालिबान अफगानिस्तान में अपनी सत्ता को सुदृढ़ करने में लगा है.</p> <p style="text-align: justify;">ऐसे में अफगानिस्तान में सरकार बनाने और उसे चलाने के लिए तालिबान को पैसे की जरूरत है. इस समय जबकि दुनियाभर की नज़रे तालिबान पर है और दुनियाभर के प्रतिबंध तालिबान पर लगे हैं, ऐसे में अंदेशा जताया जा रहा है कि तालिबान पैसे की कमी को पूरा करने के लिए नशे की तस्करी को बढ़ावा देगा.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>पैसे लिए तालिबान देगा नशे को बढ़ावा</strong></p> <p style="text-align: justify;">अगर आंकड़ों की मानें तो इससे पहले जब 1996 से 2001 तक अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा था, तब अफगानिस्तान में अफीम की पैदावार अपने चरम पर थी और अब माना यही जा रहा है कि पैसे की कमी को पूरा करने के लिए तालिबान एक बार फिर नशे की पैदावार को बढ़ावा देगा. और इस नशे की पैदावार को पाकिस्तान से होते हुए भारत भेजने की कोशिश करेगा.</p> <p style="text-align: justify;">अफगानिस्तान से आ रही हैं खबरों के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस के एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने सीमा से अफगानिस्तान की संभावित नशे की तस्करी पर नजर रखने के लिए एक एक्शन प्लान बनाया है.<br /><br />यूनाइटेड नेशन्स आफिस ऑफ ड्रग्स कंट्रोल के आंकड़ों के मुताबिक:<br />- 1996 से 2001 तक अफगानिस्तान में अफ़ीम का प्रति हेक्टेयर उत्पादन सर्वाधिक था.<br />- अफ़ग़ानिस्तान के 80 प्रतिशत नशे के बड़े व्यापारी तालिबान के समर्थन में है.<br />- तालिबान का 60 प्रतिशत बजट अफीम के कारोबार पर निर्भर है.<br />- अफ़ग़ानिस्तान में पूरे विश्व की 90 प्रतिशत अफ़ीम की खेती की जाती है.<br />- तालिबान अफ़हीम से करीब 40 मिलियन यूएस डॉलर की कमाई करता है, जिसका इस्तेमाल हथियार खरीदने में होता है.<br />- अफ़ग़ानिस्तान में सबसे अधिक अफीम की पैदावार हेलमंद और कंधार में होता है, जो इस समय तालिबान के क़ब्ज़े में है.<br />- 2017 के बाद अफ़ग़ानिस्तान के 37 प्रतिशत इलाके तालिबान के क़ब्ज़े में है, जहां सब से अधिक अफीम की पैदावार होती है.<br /><strong>जम्मू कश्मीर में खुफिया एजेंसियां सतर्क</strong></p> <p style="text-align: justify;">अफगानिस्तान से संभावित नशे की तस्करी को रोकने के लिए इस एक्शन प्लान के तहत जहां सीमा पर बीएसएफ सेना चौकसी बरत रही है, वहीं अंदरूनी इलाके में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मोर्चा संभाला हुआ है. वहीं जम्मू-कश्मीर पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टॉस्क फ़ोर्स के पारंपरिक रूट पर नजर रख रही है, जहां से नशे की खेप भारत में आने की संभावना है. इसके साथ ही एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स तमाम ऐसे नशे के तस्करों को भी रेडार पर लिया है, जो इस समय पाकिस्तान के रास्ते आने वाले अफगानिस्तानी नशे को जम्मू कश्मीर ला सकते हैं.<br /><br />वही, एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का दावा है कि पाकिस्तान के रास्ते जो नशे की खेप भेजी जा सकती है, उसमें पाकिस्तान ड्रोन का भी इस्तेमाल कर सकता है. लेकिन, पाकिस्तान की तरफ से आने वाली हर नशे की खेप को भारतीय सीमा में आने से रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं.</p> <p><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/odmHZVWb7ws" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
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