MAKE IN INDIA: कहीं “मेक इन इंडिया” साबित न हो “फेक इन इंडिया”

Make in India: प्रधानमंत्री मोदी के सम्बोधन को सुनने के लिए 12 मई शाम 8 बजे पूरा देश इस इन्तेजार में था कि अब कुछ अच्छा और नया सुनने को मिलेगा पर लॉक डाउन खत्म करने पर पीएम मोदी ने कहा लॉकडाउन 4.0 की गाइडलाइंस के बारे में 18 मई से पहले बता दिया जाएगा।

संवाददाता: संचयिता चतुर्वेदी – लखनऊ

प्रधानमंत्री मोदी के सम्बोधन को सुनने के लिए 12 मई शाम 8 बजे पूरा देश इस इन्तेजार में था कि अब कुछ अच्छा और नया सुनने को मिलेगा पर लॉक डाउन खत्म करने पर पीएम मोदी ने कहा लॉकडाउन 4.0 की गाइडलाइंस के बारे में 18 मई से पहले बता दिया जाएगा। पीएम मोदी ने कोरोना आपदा से निपटने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है, जो भारत की जीडीपी का 10 फीसदी है। आपको ये भी समझना होगा कि पिछला और आज का पैैकेज का मिलाकर है यह राशि।

पीएम ने कहा कि इस पैकेज के बारे में विस्तार से जानकारी बाद में वित्त मंत्री द्वारा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि ये आर्थिक पैकेज देश के उस श्रमिक के लिए है, देश के उस किसान के लिए है जो हर स्थिति, हर मौसम में देशवासियों के लिए दिन रात परिश्रम कर रहा है। ये आर्थिक पैकेज हमारे देश के मध्यम वर्ग के लिए है, जो ईमानदारी से टैक्स देता है, देश के विकास में अपना योगदान देता है। पीएम मोदी ने अपने सम्बोधन में कहा कि कोरोना से हमें बचना भी है और आगे बढ़ना भी है। इतनी बड़ा आपदा भारत के लिए संदेश और एक अवसर लेकर आई है। मैं एक उदाहरण के साथ बताना चाहता हूं कि जब कोरोना संकट शुरू हुआ तो भारत में एक भी पीपीई किट नहीं बनती थी न ही एन95 मास्क का उत्पादन होता था। लेकिन आज स्थिति ये है कि भारत में ही हर रोज 2 लाख PPE और 2 लाख एन-95 मास्क बनाए जा रहे हैं। हम ऐसा इसलिए कर पा रहे हैं क्योंकि आपदा को हमने अवसर में बदल दिया है। ऐसा आत्मनिर्भरता, आत्मबल और आत्मविश्वास से ही संभव है।

आत्मनिर्भरता, ग्लोबल सप्लाई चेन में कड़ी स्पर्धा के लिए भी देश को तैयार करती है। आपने भी अनुभव किया है कि बीते 6 वर्षों में जो रिफॉर्म्स हुए, उनके कारण आज संकट के इस समय भी भारत की व्यवस्थाएं अधिक सक्षम, अधिक समर्थ नज़र आईं हैं। अब रिफॉर्म्स के उस दायरे को व्यापक करना है। ये रिफॉर्मस खेती से जुड़ी पूरी सप्लाई चेन में होंगे, ताकि किसान भी सशक्त हो और भविष्य में कोरोना जैसे किसी दूसरे संकट में कृषि पर कम से कम असर हो।  ये आर्थिक पैकेज हमारे कुटीर उद्योग, गृह उद्योग, हमारे लघु-मंझोले उद्योग, हमारे MSME के लिए है, जो करोड़ों लोगों की आजीविका का साधन है। जो आत्मनिर्भर भारत के हमारे संकल्प का मजबूत आधार है। ये आर्थिक पैकेज देश के उस श्रमिक के लिए है, देश के उस किसान के लिए है जो हर स्थिति, हर मौसम में देशवासियों के लिए दिन रात परिश्रम कर रहा है। ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ की अहम कड़ी के तौर पर काम करेगा। हाल में सरकार ने कोरोना संकट से जुड़ी जो आर्थिक घोषणाएं की थीं, जो रिजर्व बैंक के फैसले थे, और आज जिस आर्थिक पैकेज का ऐलान हो रहा है, उसे जोड़ दें तो ये करीब-करीब 20 लाख करोड़ रुपए का है। ये पैकेज भारत की GDP का करीब-करीब 10 प्रतिशत है। इन सबके जरिए देश के विभिन्न वर्गों को, आर्थिक व्यवस्था की कड़ियों को, 20 लाख करोड़ रुपए का संबल मिलेगा, सपोर्ट मिलेगा।

20 लाख करोड़ रुपए का ये पैकेज, 2020 में देश की विकास यात्रा को, आत्मनिर्भर भारत अभियान को एक नई गति देगा। विश्व के सामने भारत का मूलभूत चिंतन, आशा की किरण नजर आता है। भारत की संस्कृति, भारत के संस्कार, उस आत्मनिर्भरता की बात करते हैं जिसकी आत्मा वसुधैव कुटुंबकम है। सोचने वाली बात ये है, की भले ही प्रधानमंत्री मोदी एक अच्छे वक्ता के रूप में जनता को सपने अच्छे दिखा रहे पर खुद की ही बातो से फसते भी नज़र आये। अपने सम्बोधन में जिस तरहा प्रधानमंत्री ने वोकल फ़ॉर लोकल के अपने उद्योग और व्यपार को प्रमोट करने की बात की है। कुछ समय पहले ही प्रधानमंत्री जी के द्वारा ही देश मे FDI का आगमन हुआ था। जिसका सीधा अर्थ है कि विदेशी कंपनियां भारत के उद्योगों में अपना पैसा निवेश करेगी। अब एक बड़ा सवाल है कि जब बाहर के निवेश करने की बात आएगी तो विदेशी कंपनियां भारत का इतना व्यापक बाज़ार कैसे छोड़ पाएगी? अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने जिन किसान भाइयों की बात कही थी, ये वही किसान है जो लोन, महंगे दामों पर बीज खाद, और बढ़ती महंगाई में मिलते कम सरकारी दामो को लेकर आये दिन धरना प्रदर्शन करते है यहाँ तक आत्महत्या भी करते सरकार कुछ नही सुनती?

 

 

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