लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले की रहने वाली राजश्री शुक्ला आज महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं। कभी सीमित संसाधनों में जीवन बिताने वाली राजश्री ने आज ‘विद्युत सखी’ के रूप में अपनी अलग पहचान बना ली है। उनकी यह सफलता सरकारी योजनाओं और उनके खुद के संघर्ष व मेहनत का परिणाम है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शुरू की गई ‘विद्युत सखी’ पहल ने राजश्री को न सिर्फ रोजगार दिया, बल्कि उन्हें समाज में सम्मान भी दिलाया। वह घर-घर जाकर बिजली बिल जमा करने का काम करती हैं, जिससे ग्रामीणों को लंबी लाइनों से छुटकारा मिला है।
राजश्री अब तक 81,000 से अधिक बिजली बिल जमा करा चुकी हैं और करीब 18 करोड़ रुपये की राशि विभाग में जमा करवा चुकी हैं। उनकी सालाना आय अब 10 लाख रुपये से अधिक हो चुकी है, जो यह साबित करती है कि सही अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
राजश्री ‘राधा स्वयं सहायता समूह’ से जुड़ी हैं और उन्होंने साल 2021 में महज 30,000 रुपये की बैंक सहायता से यह काम शुरू किया था। शुरुआत में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने गांव-गांव जाकर जागरूकता अभियान चलाए और लोगों को डिजिटल पेमेंट व सरकारी योजनाओं की जानकारी दी।
उनकी मेहनत और ईमानदारी ने धीरे-धीरे गांव वालों का विश्वास जीत लिया। आज स्थिति यह है कि महिलाएं खुद उन्हें बिल जमा करने के लिए बुलाती हैं। उनका यह भरोसा ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया है।
राजश्री शुक्ला की इस उपलब्धि को राज्य स्तर पर भी सराहा गया है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उन्हें उपमुख्यमंत्री Keshav Prasad Maurya द्वारा लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में सम्मानित किया गया।
इसके अलावा, 9 नवंबर 2024 को आयोजित ‘आकांक्षा हाट’ कार्यक्रम में भी उन्हें सम्मान मिला। वहीं, स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर भी उन्हें कई बार प्रशंसा पत्र दिए जा चुके हैं।
उनकी उपलब्धियों के चलते उन्हें 15 अगस्त 2024 को प्रधानमंत्री द्वारा दिल्ली के लाल किले पर आयोजित कार्यक्रम में भी आमंत्रित किया गया, जहां उन्होंने ध्वजारोहण समारोह देखा। साथ ही ग्रामीण विकास मंत्रालय के कार्यक्रम में भी उन्हें विशेष आमंत्रण मिला।
आज उत्तर प्रदेश में हजारों ‘विद्युत सखी’ सक्रिय रूप से काम कर रही हैं और करोड़ों रुपये के बिजली बिल जमा कर राज्य की व्यवस्था को मजबूत बना रही हैं। यह पहल न केवल महिला सशक्तिकरण बल्कि डिजिटल और ग्रामीण विकास का भी सशक्त उदाहरण बन चुकी है।
राजश्री शुक्ला की कहानी यह साबित करती है कि जब सरकारी योजनाएं सही दिशा में लागू होती हैं और लोग उन्हें अपनाते हैं, तो बदलाव न केवल संभव होता है बल्कि स्थायी भी होता है।
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