Samajwadi Party Leader धर्मेंद्र सिंह (बब्लू भपटा) के साथ My nation News टीम की बातचीत

  • देश के प्रधानमंत्री जनता के लिए नहीं बल्कि पूँजीपतियों के लिए काम कर रहे हैं: सपा नेता धर्मेंद्र सिंह
  • लॉकडाउन का फैसला भारत सरकार ने बिना किसी तैयारी और जल्दबाजी में किया
  • अखिलेश यादव के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में विकास की गंगा बह रही थी और योगी जी के नेतृत्व में साम्प्रदायिक नफरत फ़ैल रही है
  • समाजवादी पार्टी से गठबंधन तोड़कर मायावती ने उत्तर प्रदेश की जनता के साथ धोखा किया

उत्तर प्रदेश की राजनीति में धर्मेंद्र सिंह उर्फ़ बब्लू भपटा अपनी एक अलग ही पहचान बना चुके हैं। 24 जून 1975 को सुलतानपुर (उत्तर प्रदेश) के भदैया ब्लॉक के भपटा गाँव के एक साधारण से परिवार में जन्मे धर्मेंद्र सिंह (बब्लू भपटा) के पिता सूर्य नारायण सिंह सिंचाई विभाग में साधारण कर्मचारी थे। सपा के युवजन सभा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी में प्रदेश महासचिव रहे धर्मेंद्र सिंह ग्रेजुएशन करने इलाहबाद विश्विद्यालय गए जहां से उन्होंने अपनी छात्र राजनीति की शुरुआत की। छात्र राजनीति में सफलता का परिणाम रहा कि पूर्व मुख्यमंत्री व समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने धर्मेंद्र सिंह को समाजवादी पार्टी में शामिल कर सक्रीय राजनीति में उतरने का मौका दिया।

सपा नेता धर्मेंद्र सिंह अखिलेश यादव को अपना मार्गदर्शक मानते हैं

अखिलेश यादव को अपना मार्गदर्शक मानने वाले धर्मेंद्र सिंह (बब्लू भपटा) वर्ष 2005 से 2010 जिला पंचायत सदस्य रहे व 2013 से 2018 तक कोऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन भी रहे हैं। इनकी मां सरोजनी देवी 2005 से लगातार भदैया की ब्लॉक प्रमुख हैं। समाजसेवा में बढ़कर चढ़कर हिस्सा लेने वाले धर्मेंद्र सिंह (बब्लू भपटा) जंजीरा दास इंटरमीडियट कॉलेज के प्रबंधक भी हैं।

राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के दौरान धर्मेंद्र सिंह (बब्लू भपटा) काफी सक्रिय रहे और व्यक्तिगत तौर पर अपने क्षेत्र के गरीबों व क्षेत्र से गुजरने वाले प्रवासी मजदूरों को खाना, पानी व राशन महैया कराया। इसके अलावा जरुरत मंदों को आर्थिक मदद के रूप में धनराशि भी उपलब्ध कराई।

लॉकडाउन के दौरान अपने क्षेत्र के लोगों की लगातार सभी तरह से सहायता करते रहे

My Nation News और newsdelhincr.com के संवाददाता देवेंद्र ठाकुर व अन्य टीम सदस्यों ने सपा नेता व समाजसेवी धर्मेंद्र सिंह (बब्लू भपटा) से देश के मौजूदा हालातों को लेकर बातचीत की व उनके विचार भी सुने। पेश हैं पूरी बातचीत के प्रमुख अंश:

 

सपा नेता धर्मेंद्र सिंह (बब्लू भपटा) के साथ माईनेशन न्यूज़ टीम की बातचीत

 

लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों के आवागमन की एक समस्या लगातार बनी रही, बहुत से मजदूरों को जान गंवानी पड़ी, अपने और अपने परिवारों की जिंदगियां ताक पर रखकर पैदल, ट्रकों और जैसे तैसे गाँव वापसी के लिए संघर्ष करना पड़ा। इसके लिए किसे जिम्मेदार मानेंगे और क्यों?
-लॉकडाउन का फैसला भारत सरकार ने बिना किसी तैयारी और जल्दबाजी में किया जिसके चलते हुई अफरातफरी में प्रवासी मजदूरों और कामगारों को हजारों किलोमीटर की यात्रा पैदल ही करने को मजबूर होना पड़ा। पूरे देश ने गरीब मजदूरों की दुर्दशा देखी कि गरीब मजदूर किस तरह बिना खाना-पानी के पैदल, साइकिल, टेम्पो और ट्रकों से बोरियों की तरह लदकर अपने गांव-घरों की तरफ जाने का प्रयास कर रहा है। घर वापसी कर रहे मजदूरों के चलते सड़कों का मंजर भयावह हो गया था। सरकार न जाने इन मजदूरों से किस अपराध का बदला ले रही थी। भोजन के अभाव में, ट्रकों से दबकर, रेल के ट्रैक पर कटकर न जाने कितने मजदूरों की मौत हुई। औरंगाबाद और औरैया की घटना तो एक उदाहरण मात्र है। रेलवे के पास करीब 20,000 ट्रेनें हैं जिसकी औसत प्रतिदिन की क्षमता करीब 2.30 करोड़ यात्रियों की है लेकिन उसका उपयोग नही किया गया। जब चहुँओर अलोचना हुई तो महीनों तक केवल 84 ट्रेने ही चलाई गई। कितनी ट्रेने रास्ता भटक गयीं, सैकडो लोग भोजन केअभाव में ट्रेन में ही बेहाल हो गए। हिंदुस्तान के इतिहास में ये वक्त काला अध्याय के तौर पर जाना जायेगा और जनता इन सबका हिसाब जरूर लेगी।

 

पिछले कई वर्षों से देश आर्थिक मंदी से जूझ रहा है जिसके चलते ही पहले ही बहुत से लोगों को नौकरियां गंवानी पड़ी और मौजूद हालात में लॉकडाउन के चलते तो इस मंदी के चलते बेरोजगार हुए लोगों का आंकड़ा तो बहुत ही ज़्यादा हो गया है। इस समस्या को आप किस तरह से देखते हैं?
-भारत सरकार की आर्थिक नीतियों के दुष्परिणाम स्वरुप देश की अर्थव्यवस्था पहले से ही मंदी के दौर से गुजर ही रही थी और इसीमें कोरोना ने और तबाही मचा दी। अर्थव्यवस्था डिप्रेशन में है जिसका परिणाम आने वाले समय में भय, भूख, भ्रष्टाचार, अपराध, आत्महत्याओं में अप्रत्याशित वृद्धि को जन्म दे सकता है। बेरोजगारी दर अब तक की सर्वोत्तम स्तर लगभग 23% से भी अधिक की हो गई है। अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए जो पैकेज भारत सरकार द्वारा अनाउंस किया गया है वह अन्य देशों के मुकाबले बहुत कम है और पूरी इकोनामी का 0.8% है जिससे इस देश का भला होने वाला नहीं है।

यह सरकार हर मोर्चे पर फेल है जहां प्रवासी मजदूरों की चिंता माननीय सुप्रीम कोर्ट को करनी पड़ रही है, जहां स्वास्थ्य सेवाएं खुद आईसीयू में है। उत्तर प्रदेश के अंदर गर्भवती महिला को अस्पताल में इलाज न मिलने के कारण एंबुलेंस में ही मरने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। महामारी का रोना रोने वाली सरकार कहती है कि महामारी ले लड़ने की लिए संशाधनों की कमी है। सेंटर फॉर डिजीज एंड इकोनामिक पॉलिसी के अनुसार पूरे देश में 714,000 वार्ड है जिसमे 35,000 मिनट सिर्फ आईसीयू वाले हैं। हिंदुस्तान के अंदर एक लाख जानसंख्या पर कुल 53 वार्ड हैं जबकि पड़ोसी देश बांग्लादेश में 87 और चीन में 439, रूस में 805 प्रति लाख हैं। भारत अपनी इकोनामी का सिर्फ 1.28% खर्च करता है जबकि मालदीप 9.4 और अपना गरीब देश भूटान 2.5% खर्च करता है। डॉक्टर्स की संख्या भी कम है और वर्ल्ड बैंक के एक सर्वे के अनुसार सिर्फ 30% डॉक्टर ही सही मर्ज की दवा हिंदुस्तान में कर पाते हैं। पूरे देश की आबादी के .02 फीसदी लोग भी कोरोना संक्रमित नहीं है तभी स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल है, यदि यह संख्या अधिक हुई तो विश्व की पांचवीं अर्थव्यवस्था वाला देश जिसके नेता 5 ट्रिलियन इकोनामी का दावा करते हैं, उसके नागरिक स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में मरने को मजबूर हो जाएंगे।

 

नागरिकता अधिनियम को लेकर देशव्यापी आंदोलन चले और इसका बहुत विरोध भी हुआ था और अभी भी इस अधिनियम को लेकर बहुत सर लोगों में नाराजगी है। लोगों की इस नाराजगी का आने वाले चुनावों में विपक्ष को कितना फायदा मिल सकता है?
-नागरिकता संशोधन अधिनियम राजनीतिक ध्रुवीकरण करने के लिए एक सोची समझी साजिश है। जब नागरिकता प्राप्त करने या अन्य विषयों के लिए भारत के संविधान में पहले से ही व्यवस्था है तो इसकी क्या जरूरत थी। धार्मिक आधार पर नागरिकता कानून बनाना देश के संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है। यह सिर्फ राजनीतिक ध्रुवीकरण करने की सोची समझी साजिश है।

 

उत्तर प्रदेश की वर्तमान योगी सरकार की यदि समाजवादी पार्टी की पिछली अखिलेश सरकार से तुलना करें तो आपको किसका कार्यकाल बेहतर लगता है और क्यों?
-उत्तर प्रदेश के अंदर समाजवादी पार्टी की अखिलेश यादव जी के नेतृत्व वाली सरकार और वर्तमान भाजपा की योगी सरकार की तुलना किया जाना संभव ही नहीं है। अखिलेश जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में विकास की गंगा बह रही थी। योगी जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में अगर बढ़त हासिल हुई है तो वह है नफरत और सिर्फ नफरत। उत्तर प्रदेश सरकार में अराजकता व भ्रष्टाचार चरम पर है, अपराध की भयावह स्थिति है, स्वास्थ्य सेवाएं बेहाल हैं। विकास के कोई कार्य हो नहीं रहे हैं। रही बात प्रवासी कामगारों के उत्तर प्रदेश में आने की, तो यह बहुत ही शर्मनाक स्थिति है क्योंकि 12,000 से अधिक बसों का बेड़ा उत्तर उत्तर प्रदेश परिवहन के पास होने के बावजूद भी विभिन्न प्रांतों से आने वाले कामगारों को पैदल, साइकिल पर बच्चों को लादे, सामान लादे, भूख से, प्यास से, कितने दिनों तक सफर करना पड़ा।

 

पिछले कुछ वर्षों से देश का एक अल्पसंख्यक वर्ग लगातार असुरक्षा और डर के माहौल में जीवन-यापन की आवाज़ उठा रहा है। इसके अलावा देश के बहुत से स्थानों से मॉब लिंचिंग जैसी कई घटनाएं भी सामने आई हैं। इस तरह की घटनाओं और अपराधों को रोकने के लिए प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार को लेकर आपका क्या नजरिया है?
-वर्तमान में चाहे केंद्र कि मोदी जी के नेतृत्व वाली सरकार हो या उत्तर प्रदेश में योगी जी की सरकार, दोनों सरकारें देश के सिर्फ एक बहुत ही चुने हुए वर्ग के लिए कार्य कर रही हैं। यह पूँजीपतियों की सरकार है। उन्होंने देश के एक बहुत बड़े वर्ग में असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। डर का माहौल बन गया है जिसके कारण समाज में असुरक्षा की भावना और बड़ी खाई बन गई है जो कि किसी भी समाज के लिए घातक व विघटनकारी है।

 

प्रधानमंत्री मोदी ने एक नारा दिया – सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास। क्या पीएम मोदी को सबक साथ मिल रहा है, सभी का विकास हो रहा है और सभी वर्गों का विश्वास जीत पाने में सफल रहे हैं?
-सबका साथ सबका विकास का नारा देकर सत्ता में आए मोदी जी सिर्फ पूंजीपतियों के लिए कार्य कर रहे हैं। यह गोएबल्स के सिद्धांतों की पोषक सरकार है जो सिर्फ झूठ बोलती है और फिर जनता के सामने उसी झूठ को सच साबित करने में लगी रहती है। इस दौर में हेडलाइन कुछ और है और हकीकत कुछ और है।

 

कुछ दिन पहले प्रवासी मजदूरों से जुड़े बस मुद्दे को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती ने प्रदेश सरकार का पक्ष लेते हुए कांग्रेस पर सवाल उठाए थे तो क्या यह मन जाए कि मायावती इस बार समाजवादी पार्टी का साथ छोड़कर भाजपा का दामन थाम सकती हैं?
-जहां तक बहन जी का प्रश्न है, सीधी बात यह है कि जो उत्तर प्रदेश के अंदर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन जनता के बहुत बड़े वर्ग, कार्यकर्ताओं की इच्छाओं और आकांक्षाओं पर हुआ था; समाजवादी पार्टी से गठबंधन तोड़ कर बहन जी ने उत्तर प्रदेश की जनता के साथ धोखा किया। पहले भी भाजपा के साथ मिलकर उन्होंने सरकार बनायी है तो इसमें कुछ नया नहीं कि वह सत्ता के लालच में फिर से भाजपा की गोद में खेलने लगें।

 

इस बार उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी किन मुद्दों पर चुनाव लड़ेगी?
-उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव में समाजवादी पार्टी सामाजिक न्याय, विकास, अपराध, बेरोजगारी, स्वास्थ्य, शिक्षा, गरीब नौजवान व किसान के मुद्दे पर चुनाव लड़ेगी और वर्तमान सरकार के झूठ को बेनकाब कर सत्ता से उखाड़ फेंकेगी।

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Team My Nation News