बवासीर (Piles) एक गुदा रोग है जिसमें मल त्याग के समय गुदा मार्ग से खून गिरना मुख्य लक्षण होता है। कुछ रोगी यह भी शिकायत करते है कि मल त्याग के समय बवासीर (Piles) के मस्से गुदा के बाहर आ जाते है तथा बाद में अपने आप अंदर चले जाते है। इसके इलावा गुदा में खुजली, सरसराहट या दर्द इत्यादि के लक्षण भी पाये जाते है।

बवासीर (Piles) एक गुदा रोग है जिसमें मल त्याग के समय गुदा मार्ग से खून गिरना मुख्य लक्षण होता है। कुछ रोगी यह भी शिकायत करते है कि मल त्याग के समय बवासीर (Piles) के मस्से गुदा के बाहर आ जाते है तथा बाद में अपने आप अंदर चले जाते है। इसके इलावा गुदा में खुजली, सरसराहट या दर्द इत्यादि के लक्षण भी पाये जाते है।
यह रोग अक्सर उन व्यक्तियों को ज्यादा होता है जिन्हें मल त्याग करते समय जोर लगाना पड़ता है। कई रोगियों को कब्ज के कारण मल त्याग के बाद गुदा में जलन की शिकायत होती है, वह बीमारी एनल फिशर (Anal Fissure) हो सकती है। गुदा मार्ग से खून का गिरना गम्भीर बीमारी का सूचक भी हो सकता है। जैसे बड़ी आंत का कैंसर या अल्सर इत्यादि। इन बीमारियों की अनदेखी घातक हो सकती है। ये जानकारी आयोजित एक बेविनार में आयुर्वेदाचार्य एवं कैनेडियन काँलेज आँफ आयुर्वेद एंड योग के प्रमुख डा0 हरीश वर्मा ने दी।
डा0 वर्मा ने बताया कि गुदा रोगों में डायग्नोसिस बहुत महत्वपूर्ण होता है। बवासीर (Piles) या एनल फिशर (Anal Fissure) रोग के उपचार के लिये सबसे पहले कब्ज को दूर करना चाहिये तथा शौच करते समय जोर न लगाये। कब्ज को दूर करने के लिये भोजन में हरी या सलाद खाए या ईसवगोल का बुरादा दो बडे चम्मच ताजे पानी में घोलकर शाम 6 बजे रात्रि भोजन से पहले सेवन करें।
मल त्याग के समय रोगी को गुदा में जलन की शिकायत हो तो मल त्याग के बाद गर्म पानी के टब में 15-20 मिनट तक बैठने से तुरन्त लाभ होता है। पाईल्स या बवासीर के मस्सों को दूर करने के कई तरीकों से ईलाज किये जाते है जैसे इन्जैक्शन, रबर बैन्ड लाईगेशन, सर्जरी या लेजर इत्यादि। लेकिन डा0 हरीश वर्मा ने रसौंत, अरीठा, जिमींकंद और अन्य जड़ी बूटियों के एक खास अनुपात के मिश्रण से फार्मूला तैयार किया और यह फार्मूला बवासीर या एनल फिशर रोग में बेहद प्रभावशाली है। डा0 वर्मा ने बवासीर या एनल फिशर रोगियों के लिये हेल्पलाइन नबंर 9910672020 भी जारी किया है।
डा0 हरीश वर्मा ने बताया कि रसौंत, अरीठा, जिमींकंद और अन्य जड़ी बूटियों का फार्मूला बवासीर या एनल फिशर रोग को जड़ से खत्म कर डालने में रामबाण है। कुछ सप्ताह तक जड़ी बूटियों का फार्मूला लेने से बवासीर के मस्से सूख जाते है तथा परहेज करने से रोग दोबारा नहीं होता है।
About the Author

-
मीडिया जगत में अपनी बेबाक और धारदार पत्रकारिता के लिए पहचानी जाने वाली श्रद्धा पिछले 10 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। अपने करियर के दौरान उन्होंने देश की राजनीति, सामाजिक सरोकारों और समसामयिक मुद्दों पर गहराई से रिपोर्टिंग की है।
राजनीतिक घटनाक्रम की सटीक समझ और तथ्य आधारित विश्लेषण उनकी खास पहचान है। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर स्टूडियो डिस्कशन तक, श्रद्धा ने हर मंच पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है।
वर्तमान में वह My Nation News में वरिष्ठ सम्पादक के पद पर कार्यरत हैं, जहाँ वह संपादकीय नेतृत्व संभालते हुए खबरों की दिशा और प्रस्तुति को मजबूती प्रदान कर रही हैं।
उन्होंने अपने करियर में राजनीतिक रिपोर्टिंग, ग्राउंड कवरेज, विशेष स्टोरीज़ और न्यूज़ एनालिसिस में विशेष दक्षता हासिल की है। निष्पक्षता, स्पष्टता और निर्भीक पत्रकारिता के साथ श्रद्धा आज मीडिया इंडस्ट्री में एक भरोसेमंद और प्रभावशाली नाम के रूप में स्थापित हैं।
Latest entries
BREAKING NEWSMarch 28, 2026SAP करेगा Reltio का अधिग्रहण, AI के लिए डेटा को बनाएगा ज्यादा शक्तिशाली
UTTAR PRADESHMarch 28, 2026नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बनेगा अत्याधुनिक MRO हब, अकासा एयर के साथ हुआ रणनीतिक समझौता
UTTAR PRADESHMarch 27, 2026जेवर एयरपोर्ट बनेगा यूपी की अर्थव्यवस्था का गेम चेंजर, कृषि से उद्योग तक होगा बड़ा बदलाव
UTTAR PRADESHMarch 27, 2026बाराबंकी की राजश्री शुक्ला बनीं ‘विद्युत सखी’, गांव-गांव में बदल रहीं महिलाओं की तस्वीर






