- निजी स्कूलों (Private Schools) में हो रही मनमानी फीस वसूली पर शासन व प्रशासन दोनों ही मूक-बधिर बने हुए हैं
- सरकार ने मनमानी वसूली रोकने के लिए उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय अधिनियम (2018) पारित किया लेकिन अब इस कानून को गंभीरता से लागू करवाने की सुध नहीं ले रहे हैं
संवाददाता: मयंक शुक्ला
सुलतानपुर। निजी स्कूलों (Private Schools) में हो रही मनमानी फीस वसूली पर कार्यवाही करने में शासन प्रशासन गम्भीर नही लगता है। जबकि इसी सरकार ने मनमानी वसूली रोकने के लिए उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय अधिनियम (2018) पारित किया है जिसके अनुसार प्रत्येक विद्यालय को सत्र आरम्भ से पूर्व ही वेबसाइट पर शुल्क की डिटेल अपलोड करना होगा। यह भी बताना होगा कि शुल्क किस प्रकार मासिक, त्रैमासिक या छमाही लिया जाएगा। पूर्व सूचना के बगैर कोई शुल्क अधिग्रहित नही किया जाएगा। प्रति छात्र अधिकतम वार्षिक शुल्क भी निर्धारित किया गया है। प्रत्येक शुल्क की रशीद दी जाएगी। इसी प्रकार यूनिफार्म में परिवर्तन 5 शिक्षण सत्र के पूर्व नही किये जायेंगे। यूनिफार्म और किताबें निश्चित दुकान से खरीदने का दबाव नही बनाया जाएगा। इस तरह के कई और ऐसे बिंदु है जो कि जनता के लिए बहुत हितकारी साबित होंगे। इस अधिनियम को पारित तो कर दिया गया। लेकिन कोई स्कूल संचालक इसका पालन नही करता है और सरकार लागू करवाने में पूरी तरह फेल है।
मानवाधिकार कार्यकर्ता अभिषेक सिंह का कहना है कि सरकार इस अधिनियम को स्कूल संचालक मानते नही है। बार बार शिकायत करने पर भी शासन प्रशासन इस ओर ध्यान नही देते हैं।

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श्री सिंह ने बताया कि 16 अप्रैल 2019 से लेकर आज तक कम से कम इस बाबत 30 शिकायती पत्र विभिन्न जिम्मेदार लोगों को मनमानी वसूली रोकने के लिए दे चुका हूं। पर आज तक एक भी मांगपत्र पर कार्यवाही नही हुई है। अक्टूबर 2017 में प्रदेश सरकार को एक मांगपत्र दिया था। जिसे संज्ञान में लेकर प्रदेश सरकार ने प्रमुख सचिव को कार्यवाही करने का आदेश दिया था। कार्यवाही के लिए 7 दिसम्बर की तिथि तय की थी परंतु लगभग 6 महीने बीत चुके हैं अभी तक समस्या निस्तारित नही हुई है। बहुत बार रिमाइंडर भेज चुका हूं।

इसी प्रकार लॉकडाउन के दौरान अप्रैल में एक और पत्र प्रदेश सरकार को दिया पुनः प्रदेश सरकार ने कार्यवाही के लिए जिलाधिकारी को आदेशित किया। इस कार्यवाही के लिए एक महीने का समय दिया 27 मई तक मामला निस्तारित करने की तिथि तय हुई। इस बार भी निस्तारण नही हुआ। एक सप्ताह बीत चुका है। हमने एक रिमाइंडर भी भेज दिया है फिर भी कार्यवाही नही हुई है। इसके अलावा बहुत पत्र बहुत मेल है। शासन प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। श्री सिंह ने कहा कि जबतक अधिनियम का पालन नही होगा तबतक लड़ाई जारी रहेगी।
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