लखनऊ। उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में श्वेत क्रांति ने महिलाओं की जिंदगी को नई दिशा दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले नौ वर्षों में विकास की रफ्तार तेज हुई है और डेयरी व्यवसाय ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है।
1,500 गांवों में फैला डेयरी कारोबार
तराई के बरेली, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, शाहजहांपुर, सीतापुर और रामपुर जैसे जिलों में डेयरी व्यवसाय अब 1,500 गांवों तक फैल चुका है। इस पहल के जरिए 51,000 महिलाएं उद्यमी बन चुकी हैं और आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं।
हर महीने सीधे खाते में पहुंच रही आय
इस योजना की खास बात यह है कि महिलाओं की कमाई सीधे उनके बैंक खातों में हर महीने 3, 13 और 23 तारीख को ट्रांसफर की जाती है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा मिली है।
1 लाख लीटर से ज्यादा दूध का रोजाना व्यापार
तराई क्षेत्र में अब रोजाना 1 लाख लीटर से अधिक दूध का उत्पादन और व्यापार हो रहा है। महिलाओं ने अब तक मिलकर 225 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी उपलब्धि है।
स्वयं सहायता समूह चला रहे पूरा सिस्टम
सृजनी एमपीसीएल (Srijani MPCL) के नेतृत्व में महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के जरिए दूध उत्पादन से लेकर संग्रहण और विपणन तक की पूरी जिम्मेदारी संभाल रही हैं। इससे गांवों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं।
ग्रामीण विकास में मिशन की अहम भूमिका
उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ने इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़कर उन्हें सशक्त बनाया गया है। अब महिलाएं सिर्फ भागीदार नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की प्रमुख संचालक बन गई हैं।
पूरे प्रदेश में दिख रहा असर
यह बदलाव केवल तराई तक सीमित नहीं है। पूरे उत्तर प्रदेश में महिलाएं मिलकर रोजाना करीब 10 लाख लीटर दूध संग्रह कर रही हैं। 31 जिलों में महिलाओं ने 5,000 करोड़ रुपये का कारोबार किया है और 6,000 से अधिक गांवों में यह मॉडल सफल साबित हुआ है।
आर्थिक के साथ सामाजिक बदलाव की कहानी
तराई की यह श्वेत क्रांति केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन का भी सशक्त उदाहरण बन चुकी है। आत्मनिर्भर बनकर महिलाएं न सिर्फ अपने परिवारों को सहारा दे रही हैं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी नई गति दे रही हैं।
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