ahmedabad-property-scam-4-84-crore-fraud-navrangpura

अहमदाबाद में 4.84 करोड़ रुपये का कथित प्रॉपर्टी घोटाला: नवरंगपुरा के कारोबारी दंपती पर दो FIR, पुराने चेक बाउंस मामले में सजा और बैंक विवादों का भी रिकॉर्ड

अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद में प्रॉपर्टी कारोबार (Ahmedabad Property Scam) के नाम पर करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है। शहर के पॉश इलाके नवरंगपुरा में कार्यालय संचालित करने वाले कारोबारी भरतकुमार प्राणलाल पोपट और उनकी पत्नी हर्षाबेन भरतकुमार पोपट के खिलाफ दर्ज दो अलग-अलग FIR में कुल 4.84 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि आरोपियों ने प्रॉपर्टी में निवेश, प्लॉट की बिक्री और जमीन का सौदा कराने का भरोसा देकर व्यापारियों से मोटी रकम हासिल की, लेकिन न तो तय शर्तों के अनुसार संपत्ति का हस्तांतरण किया और न ही पूरी रकम वापस की।

इस मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि उपलब्ध अदालती दस्तावेजों में भरतकुमार पोपट का नाम पुराने चेक बाउंस मामले, बैंक से जुड़े संपत्ति विवाद और अन्य न्यायिक कार्यवाहियों में भी सामने आता है। हालांकि, इन सभी मामलों की कानूनी स्थिति अलग-अलग है और इन्हें वर्तमान 4.84 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का न्यायिक रूप से प्रमाणित हिस्सा नहीं माना जा सकता।

दो FIR, दो कारोबारी और 4.84 करोड़ रुपये का मामला
नवरंगपुरा पुलिस स्टेशन में दर्ज दोनों शिकायतों के मुताबिक, आरोपियों ने अलग-अलग प्रॉपर्टी सौदों के माध्यम से व्यापारियों को अपने विश्वास में लिया था। पहली शिकायत में साणंद तालुका के मणिपुर गांव में प्लॉट बेचने के नाम पर 2.34 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का आरोप है, जबकि दूसरी शिकायत में अસારवा क्षेत्र की जमीन का सौदा कराने के नाम पर 2.50 करोड़ रुपये लेने का आरोप लगाया गया है। दोनों शिकायतों को मिलाकर कथित रकम 4.84 करोड़ रुपये होती है। पुलिस के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि इन लेनदेन में किन-किन लोगों की भूमिका थी, रकम कहां ट्रांसफर हुई और संबंधित संपत्तियों की वास्तविक कानूनी स्थिति क्या थी।

पहला मामला: साणंद में प्लॉट नंबर 37 और 38 के नाम पर 2.34 करोड़ की कथित धोखाधड़ी
पहली FIR बोपल निवासी 63 वर्षीय व्यापारी संजय जयंतिलाल मेहता की शिकायत पर दर्ज की गई है। शिकायत के अनुसार, साणंद तालुका के मणिपुर गांव में स्थित ‘सुरधारा रेजिडेंशियल प्लॉट्स’ योजना के प्लॉट नंबर 37 और 38 को लेकर सौदा किया गया था। आरोपियों ने व्यापारी को बताया कि संबंधित प्लॉट उन्होंने सुवास इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के बिल्डर से खरीदे हैं और अब उन्हें आगे बेचना चाहते हैं। इस सौदे में भरतकुमार प्राणलाल पोपट, उनकी पत्नी हर्षाबेन भरतकुमार पोपट और विलेश प्रफुलचंद्र शेठ के नाम सामने आए हैं।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि प्लॉट खरीदने के लिए उन्होंने 1.25 करोड़ रुपये एडवांस के तौर पर दिए थे। शेष भुगतान के बदले आठ महीने के भीतर बिल्डिंग मटेरियल उपलब्ध कराने की सहमति बनी थी। शुरुआत में आरोपियों ने कुछ बिल्डिंग मटेरियल और नकद राशि देकर व्यापारी का भरोसा बनाए रखा, लेकिन शिकायत के मुताबिक यह व्यवस्था केवल शुरुआती तीन महीनों तक चली। इसके बाद शेष रकम लौटाने और सौदे को पूरा करने के नाम पर लगातार आश्वासन दिए जाते रहे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कुल 2.34 करोड़ रुपये की बकाया रकम वापस नहीं की गई।

मामले में एक और गंभीर आरोप यह है कि सुरक्षा के तौर पर दिया गया चेक पहले से ही स्टॉप पेमेंट के निर्देश के कारण भुगतान के लिए स्वीकार नहीं हुआ। आरोपियों की ओर से दूसरी संपत्ति उपलब्ध कराने का भरोसा भी दिया जाता रहा, लेकिन शिकायतकर्ता को कथित तौर पर लंबे समय तक टालते रहे।

दूसरा मामला: अસારवा की जमीन बैंक के पास गिरवी होने का आरोप, फिर भी लिए 2.50 करोड़
दूसरी FIR सैटेलाइट निवासी 37 वर्षीय व्यापारी पार्थ कमलेशभाई दोशी की शिकायत पर दर्ज की गई है। शिकायत के मुताबिक, नवरंगपुरा के सेतु अवंती कॉम्प्लेक्स स्थित कार्यालय में भरतकुमार पोपट ने अસારवा तालुका के मुठिया गांव की सीमा में स्थित गैर-कृषि जमीन सस्ते दाम पर दिलाने का प्रस्ताव रखा था।

बताया गया कि संबंधित जमीन पहले GIDC नरोडा इंडस्ट्रियल एस्टेट के नाम से जानी जाती थी और कर्णावती ऑटो हब प्राइवेट लिमिटेड के प्रोपराइटर पार्थ बारोट के नाम से संबंधित थी। इस सौदे में भरतकुमार प्राणलाल पोपट, पार्थ बारोट, जिल भरत पोपट और पराग शाह समेत अन्य लोगों के नाम शिकायत में शामिल किए गए हैं।

व्यापारी का आरोप है कि जमीन पहले से ही आदित्य बिड़ला ग्रुप के पास मॉर्गेज यानी गिरवी रखी गई थी। इसके बावजूद जमीन की इस स्थिति की जानकारी छिपाकर सौदे की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, ऑनलाइन भुगतान, बैंक ट्रांसफर, आंगड़िया के माध्यम और नकद के जरिए कुल 2.50 करोड़ रुपये दिए गए। सौदे को विश्वसनीय दिखाने के लिए 18 नवंबर 2025 को जमीन का बानाखत यानी एग्रीमेंट टू सेल भी तैयार कराया गया। इसके अलावा शिकायतकर्ता के नाम से जमीन पर सार्वजनिक नोटिस भी लगवाया गया, जिससे उसे लगा कि सौदा कानूनी रूप से आगे बढ़ रहा है।

लेकिन बाद में अखबार में उसी जमीन की नीलामी से संबंधित सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित हुआ। इसके बाद शिकायतकर्ता को कथित तौर पर पता चला कि जमीन पहले से बैंक के पास गिरवी है। आरोप है कि इसके बाद न तो जमीन को बैंक के बंधक से मुक्त कराया गया और न ही 2.50 करोड़ रुपये वापस किए गए।

केवल नई FIR ही नहीं, पुराने चेक बाउंस मामले में भी हो चुकी है सजा
उपलब्ध अदालती दस्तावेजों में भरतकुमार प्राणलाल पोपट से संबंधित एक पुराना आपराधिक मामला भी सामने आता है, जो नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत चेक अनादर से जुड़ा है। अहमदाबाद की अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत में आपराधिक केस नंबर 631/2013 में अमित पोपट लाल परमार ने शिकायत दर्ज कराई थी।

इस मामले में 31 मार्च 2018 को अदालत ने भरतकुमार पोपट को दोषी ठहराया था। अदालत ने उन्हें एक वर्ष की साधारण कैद की सजा सुनाई थी। साथ ही शिकायतकर्ता को चेक की रकम मुआवजे के रूप में 60 दिनों के भीतर देने का आदेश दिया था। मुआवजे का भुगतान नहीं करने पर अतिरिक्त तीन महीने की साधारण कैद का प्रावधान भी किया गया था।

यहां मामला समाप्त नहीं हुआ। भरतकुमार पोपट ने इस फैसले को चुनौती देते हुए अहमदाबाद सिटी सिविल एंड सेशंस कोर्ट में क्रिमिनल अपील नंबर 140/2018 दाखिल की। 2 मार्च 2020 को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, कोर्ट नंबर 35, अहमदाबाद ने उनकी अपील खारिज कर दी और निचली अदालत द्वारा सुनाई गई दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा। अपील के फैसले में अदालत ने चेक पर हस्ताक्षर, पक्षकारों के बीच हुए समझौते और भुगतान की कानूनी जिम्मेदारी से जुड़े साक्ष्यों पर विचार किया था। अदालत ने आरोपी की ओर से प्रस्तुत बचाव को स्वीकार नहीं किया।

इस मामले में उपलब्ध हाईकोर्ट केस स्टेटस दस्तावेज के अनुसार, भरतकुमार पोपट ने इसके बाद क्रिमिनल रिवीजन एप्लीकेशन नंबर 7646/2020 भी दाखिल की थी। उपलब्ध रिकॉर्ड में यह याचिका लंबित दिखाई गई है। इसलिए इस मामले की वर्तमान स्थिति और अंतिम निर्णय की पुष्टि अलग से आवश्यक है।

बैंक और प्रॉपर्टी विवादों में भी सामने आया नाम
भरतकुमार पोपट और उनके कारोबारी परिवार से जुड़े उपलब्ध दस्तावेजों में बैंक और संपत्ति से संबंधित पुराने विवादों का भी उल्लेख मिलता है। अहमदाबाद की सिटी सिविल कोर्ट में सिविल सूट नंबर 760/2003 में आदर्श को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड और अन्य पक्षकारों के बीच विवाद दर्ज था। इस मामले में हर्षाबेन भरतभाई पोपट का नाम Benefit Publication की प्रोपराइटर के रूप में और भरतकुमार प्राणलाल पोपट का नाम JIL Printery के प्रोपराइटर के रूप में दर्ज है।

इस मुकदमे का निर्णय 26 नवंबर 2015 को हुआ था। इसके बाद गुजरात हाईकोर्ट में फर्स्ट अपील नंबर 2056/2016 दर्ज हुई। उपलब्ध केस स्टेटस में यह अपील लंबित दिखाई गई है। इससे अलग, गुजरात हाईकोर्ट में स्पेशल सिविल एप्लीकेशन नंबर 17298/2018 में श्री गायत्री बिल्डकॉन और इलाहाबाद बैंक के बीच विवाद सामने आया था। इस मामले में हर्षाबेन भारतकुमार पोपट और भरतकुमार पोपट का नाम प्रतिवादी पक्ष के रूप में दर्ज है।

इस याचिका में बिल्डकॉन की ओर से आरोप लगाया गया था कि छह फ्लैटों की बिक्री के लिए रजिस्टर्ड दस्तावेज किए गए, लेकिन कुल 1.80 करोड़ रुपये के बिक्री मूल्य में से केवल 90 लाख रुपये प्राप्त हुए और बाकी 90 लाख रुपये बकाया रहे। याचिकाकर्ता का यह भी कहना था कि संबंधित फ्लैट बैंक के पास मॉर्गेज थे और बैंक ने SARFAESI कानून के तहत कार्रवाई शुरू की थी।

11 दिसंबर 2018 को गुजरात हाईकोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार किया। अदालत ने कहा कि मुख्य कार्यवाही डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल (DRT) में लंबित है और संबंधित पक्ष अपने कानूनी तर्क वहां रख सकते हैं। हाईकोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर अंतिम निर्णय नहीं दिया था।

एक अन्य दस्तावेज में भरतकुमार प्राणलाल पोपट की ओर से देना बैंक के खिलाफ दायर स्पेशल सिविल एप्लीकेशन नंबर 13108/2018 का भी उल्लेख है। 27 अगस्त 2018 को गुजरात हाईकोर्ट ने इस याचिका को इस आधार पर खारिज किया कि याचिकाकर्ता ने वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने के लिए याचिका पर आगे जोर नहीं दिया। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की थी।

अब पुलिस के सामने कई बड़े सवाल
4.84 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के दोनों मामलों ने अहमदाबाद के प्रॉपर्टी कारोबार में दस्तावेजों की सत्यता, जमीन के स्वामित्व और बैंक मॉर्गेज की जानकारी की जांच को महत्वपूर्ण बना दिया है।

4.84 करोड़ की कथित धोखाधड़ी और पुराने मुकदमों का रिकॉर्ड, अब जांच पर निगाहें
एक ओर दो व्यापारियों ने प्रॉपर्टी सौदों के नाम पर करोड़ों रुपये गंवाने का आरोप लगाया है, वहीं दूसरी ओर उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड में भरतकुमार पोपट से जुड़ा पुराना चेक अनादर मामला, बैंक से संबंधित संपत्ति विवाद और अन्य कानूनी कार्यवाहियां भी दर्ज हैं।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि दोनों नई शिकायतों में कथित तौर पर दिए गए 4.84 करोड़ रुपये का वास्तविक हिसाब क्या है, संबंधित संपत्तियों की कानूनी स्थिति क्या थी और इस पूरे लेनदेन में किन लोगों की भूमिका सामने आती है।

About the Author

Mansi Bhatnagar
Mansi Bhatnagar
मानसी भटनागर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत एक क्षेत्रीय न्यूज़ प्लेटफॉर्म से की, जहाँ उन्होंने रिपोर्टिंग के मूलभूत सिद्धांतों को गहराई से समझा और उन्हें व्यवहार में उतारा। इसके बाद उन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम करते हुए समाचार जगत के विविध पहलुओं में व्यापक अनुभव अर्जित किया। लगभग दो दशकों के अपने समृद्ध अनुभव के दौरान मानसी भटनागर ने राजनीति, समाज और जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर प्रभावी और गहन रिपोर्टिंग की है। खासतौर पर राजनीतिक परिदृश्य और नीतिगत मुद्दों की समझ और विश्लेषण में उनकी विशेष दक्षता रही है। वर्तमान में मानसी भटनागर My Nation News में वरिष्ठ पत्रकार के पद पर कार्यरत हैं, जहाँ वे प्रमुख राजनीतिक खबरों, एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक लेखों पर सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। उनकी सूझबूझ और अनुभव संपादकीय टीम को एक मजबूत दिशा प्रदान करते हैं। मीडिया इंडस्ट्री में लंबे समय तक सक्रिय रहते हुए मानसी भटनागर ने निष्पक्षता, तथ्यात्मकता और निर्भीकता को अपनी पत्रकारिता की पहचान बनाया है, जिसके कारण उन्होंने एक विश्वसनीय और प्रभावशाली पत्रकार के रूप में अपनी अलग पहचान स्थापित की है।