Air India Employee Death Case Delhi

Air India Employee Death Case: हादसे और हत्या के बीच उलझी गुत्थी में न्याय के लिए भटक रहे माँ-बाप

  • Air India Employee Death Case: 26 मार्च 2021 की देर रात एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल अंजू 36 दिनों तक मौत से जंग लड़ती रही
  • मृतका अंजू इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, दिल्ली में एयरइंडिया कंपनी में बतौर केबिन क्रू कार्यरत थी
  • परिजनों ने मृतका के सहकर्मी पर लगाए हत्या के आरोप, दिल्ली पुलिस मामले से लगातार पल्ला झाड़ रही

[avatar user=”Jyoti Singh” size=”thumbnail” align=”left”]By Jyoti Singh[/avatar]

Air India Employee Death Case: नई दिल्ली। 26 मार्च की देर रात 3 बजे के आसपास मेरी बेटी अंजू के मोबाइल से मुझे कॉल आया। इतनी रात में बेटी के नंबर से कॉल आता देख मन किसी अनजान आशंका से भयभीत हो उठा। कॉल रिसीव करने के बाद कलेजा फट जाने वाली खबर सुनाई दी। मेरी बेटी अंजू एक सड़क दुर्घटना में बुरी तरह से घायल हो गयी थी। मैं हैरान और भ्रमित भी था क्योंकि मैं उस समय कोलकाता में था। मैंने जो कुछ भी कॉल पर सुना, उसकी पुष्टि करने के लिए कॉलर से वीडियो कॉल के लिए कहा। वीडियो कॉल के दौरान मैंने अपनी बेटी अंजू को माता चन्नन देवी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में वेंटिलेशन सपोर्ट के साथ बेहोश लेटी हुई देखा। इतना बताते-बताते उस लाचार पिता की आँखों में आंसू भर आये। इसके आगे वो पिता कुछ भी बोल पाने की हिम्मत न जुटा सका और बेटी की याद में फफक कर रो पड़ा।

कोलकाता एयरपोर्ट पर एयरइंडिया (Air India) में कार्यरत रवींद्र कुमार तिवारी की इकलौती 29 वर्षीया पुत्री अंजू तिवारी इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, दिल्ली में एयरइंडिया (Air India) में बतौर केबिन क्रू काम करती थी। अंजू जुलाई 2019 से पालम – राजनगर 1 में एक फ्लैट में रहती थी। 25-26 मार्च की देर रात डाबरी-पालम रोड पर हुए एक सड़क हादसे में अंजू गंभीर रूप से घायल हो गयी। जिसके बाद अंजू को एमरजेंसी में चन्नन देवी अस्पताल में भर्ती कराया गया। एक महीने से भी अधिक समय तक अंजू जिंदगी के लिए मौत से जंग लड़ती रही लेकिन 30 अप्रैल की सुबह 3:20 पर उसकी साँसों ने उसका साथ छोड़ दिया। ईश्वर से किसी चमत्कार की आस लगाए हुए माँ-बाप की तो जैसे दुनिया छिन सी गयी थी।

Air India Employee Death Case Delhi
फोटो: मृतका अंजू तिवारी

अंजू के परिजन उसकी मौत पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। इस मामले में बहुत से चौंकाने वाले तथ्यों के बावजूद कार्रवाई में सामने आयी लापरवाहियों के चलते सवाल उठने लाज़िमी है। अंजू के परिजनों ने अंजू की ह्त्या की आशंका जाहिर की है। अंजू के पिता ने कहा कि उन सभी को संदेह है कि रणविजय राय ने उनकी बेटी अंजू की हत्या की है, लेकिन ऐसी कोई जांच नहीं की गई और न ही रणविजय राय के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई की गई।

रणविजय राय भी एयरइण्डिया (Air India) में केबिन क्रू है। दुर्घटना वाली रात रणविजय राय अंजू के साथ बिना किसी कारण के बहुत तेज गति से अपनी बाइक चला रहा था। रणविजय ने हेलमेट तो पहन रखा था लेकिन अंजू को हेलमेट नहीं दिया। वे (रणविजय राय के बताए अनुसार) पंजाबी बाग के एक रेस्टोरेंट से पालम आ रहे थे। रणविजय ने पहले से ही बहुत शराब पी रखी थी और वो काफी नशे में था। अंजू के पिता ने बताया कि 26 मार्च को उसी ने अंजू के नंबर से कॉल कर हादसे के बारे में जानकारी दी। अंजू के पिता ने आगे कहा कि उन्होंने वीडियो कॉल में भी देखा कि रणविजय राय पूरी तरह से नशे की हालत में था और उसकी आंखें लाल थीं।

इसके आगे सवाल उठाते हुए परिजनों ने कहा कि अंजू के सिर पर गंभीर चोट थी, सीटी स्कैन में खून के थक्के पाए गए। उसी दिन 2 न्यूरो सर्जनों द्वारा उसी अस्पताल में ब्रेन सर्जरी की गई। डॉक्टरों ने बताया कि उसकी बाईं ओर की 3 पसलियां टूट गई हैं, जिससे उसके फेफड़े भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार अंजू के पेट के अंग भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। जबकि रणविजय राय के शरीर में सिर्फ 4-5 कट और मामूली चोट के निशान थे। यह कैसे संभव है वो भी जब दोनों एक ही बाइक और एक ही गति में थे? अंजू की ब्रेन सर्जरी हुई थी और वह बेहोश, वेंटिलेशन सपोर्ट पर थी जबकि रणविजय राय फिट और ठीक पाए गए थे।

अंजू परिजनों ने आगे बताया कि 26 मार्च से 30 अप्रैल तक अंजू बेहोश थी और वेंटिलेशन सपोर्ट पर जीवित थी। इस अवधि के दौरान रणविजय राय कभी भी अस्पताल में अंजू के पास नहीं गया और न ही कोई मदद की पेशकश की। अंजू ने अस्पताल में 36 दिनों तक जीवन के लिए संघर्ष किया लेकिन दुर्भाग्य से 30 अप्रैल 21 को सुबह 3.20 बजे उनकी मृत्यु हो गई। हम चौंक गए और टूट गए।

घातक घटना डाबरी-पालम रोड पर हुई और जांच अधिकारी जनकपुरी थाने के एसआई सतवीर मोड़ हैं। अंजू के पिता ने कहा “मेरी बेटी की मृत्यु के बाद मेरी मुलाकात एसआई सत्वीर से हुई। उन्होंने मुझे एक कागज़ का टुकड़ा दिया और मुझे घटना के बारे में 3-4 पंक्तियों में लिखने के लिए कहा, जो मैंने 26 मार्च 20 21 को कोलकाता से आने के बाद देखा। मैं और मेरा परिवार हमारी बेटी के लिए रो रहे थे। मेरी पत्नी रो रही थी और एसआई सत्वीर से हाथ जोड़कर कह रही थी ‘मेरी बेटी को इंसाफ जरूर दिलायेगा आप’ लेकिन एसआई सत्वीर ने उस मां को कोई जवाब नहीं दिया जिसने अपनी 29 साल की इकलौती बेटी खो दी है अपराधी रणविजय राय के कारण।

अस्पताल प्रशासन ने कुछ दस्तावेजों के साथ अंजू का शव एसआई सत्वीर को सौंप दिया था। अंजू के पिता द्वारा एसआई सत्वीर से अस्पताल से प्राप्त कागजात की फोटो कॉपी मांगने पर इनकार कर दिया गया अदालत से लेने को कहा दिया। अंजू के परिजनों ने बताया कि एसआई सत्वीर के व्यवहार से वे सभी दंग थे। वो उनके साथ सहयोग नहीं कर रहे थे। एसआई सत्वीर ने अंजू के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए दीन दयाल अस्पताल भेजा और उसके बाद हरिनगर, नई दिल्ली के सुभाष नगर श्मशान घाट पर अंजू का अंतिम संस्कार किया गया।

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अंजू के पिता ने आगे बताया कि 1 मई से अभी तक वो एसआई सत्वीर और एसएचओ जनकपुरी जय प्रकाश से एफआईआर कॉपी/डेथ सारांश/सीसीटीवी फुटेज/एमएलसी रिपोर्ट/रणविजय राय/पोस्टमार्टम रीरॉर्ट/ड्राइविंग लाइसेंस की अल्कोहल टेस्ट रिपोर्ट और के लिए जानकारियां मांग रहे हैं। लेकिन उन्हें अभी तक इन सभी के बारे में कोई भी जानकारी नहीं दी गयी है। अंजू की मृत्यु के बाद पता चला कि जनकपुरी थाने में एक एफआईआर 7 अप्रैल 2021 को दर्ज की गई थी और मृतका के परिजनों को इस बारे में कोई सूचना नहीं दी गयी थी। अंजू की मृत्यु के बाद भी रणविजय राय को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया जबकि वो पहले से ही आईपीसी 304ए (गैर-जमानती) आरोपी है।

फिलहाल मृतका अंजू के परिजनों ने दिल्ली पुलिस के बड़े अधिकारियों से शिकायत करते हुए घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच व दोषियों पर उचित कार्रवाई किये जाने की मांग की है।

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Jyoti Singh
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