श्मशान बाबा: BJP का वो नेता जो बना हाता का सबसे बड़ा ‘दुश्मन’, हरिशंकर तिवारी के बाद बेटे विनय शंकर से भी छिनी विधायकी

<p style="text-align: justify;">उत्तर प्रदेश की चिल्लूपार विधानसभा सीट पर बाहुबलि हरिशंकर तिवारी के बेटे विनय शंकर तिवारी की हार हुई है. उन्हें श्मशान बाबा के नाम से मशहूर बीजेपी के राजेश त्रिपाठी ने शिकस्त दी है. राजेश त्रिपाठी वही नेता हैं जिन्होंने 2007 और 2012 के चुनाव में हरिशंकर तिवारी को मात दी थी. लगातार दो चुनाव हारने के बाद हरिशंकर तिवारी ने राजनीति ने संन्यास ले लिया. अगर कहा जाए कि राजेश त्रिपाठी ने हरिशंकर तिवारी के पॉलिटिकल करियर को खत्म कर दिया तो गलत नहीं होगा.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;">अब 10 साल बाद राजेश त्रिपाठी ने हरिशंकर तिवारी के बेटे विनय शंकर से विधायकी छिनी है. राजेश त्रिपाठी ने विनय शंकर को 20 हजार से ज्यादा वोटों से हराया है. राजेश त्रिपाठी को 96777 वोट मिले तो वहीं विनय शंकर को 75132 वोट हासिल हुए. विनय शंकर इस चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर लड़ रहे थे. वह चुनावों से पहले ही सपा का दामन थामे थे. इससे पहले वह बसपा में थे.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>2007 में बसपा के टिकट पर जीते थे राजेश त्रिपाठी&nbsp;</strong></p> <p style="text-align: justify;">पूर्व पत्रकार और श्मशान बाबा के नाम से मशहूर राजेश त्रिपाठी 2007 के चुनाव में हरिशंकर तिवारी को हराकर सु्र्खियों में आए थे. बसपा के टिकट पर लड़ते हुए उन्होंने 6933 वोटों से जीत हासिल की थी.</p> <p style="text-align: justify;">इसके बाद 2012 में वह फिर चुनाव में उतरे. यहां फिर से बाजी उन्होंने मारी. हरिशंकर तिवारी तीसरे स्थान पर पहुंच गए. इसके बाद हरिशंकर ने तय किया कि अब चुनाव में नहीं उतरेंगे. इस चुनाव में राजेश त्रिपाठी बसपा से ही मैदान में उतरे थे. दो लगातार हार के बाद हरिशंकर तिवारी ने चुनाव लड़ना बंद कर दिया. 2017 में हरिशंकर के बेटे विनय शंकर तिवारी बसपा के टिकट पर चुनाव में उतरे. राजेश त्रिपाठी बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े थे. पांच साल बाद उन्होंने इस हार का बदला लिया है. &nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>1985 से है ब्राह्मणों का कब्जा</strong></p> <p style="text-align: justify;">उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले की चिल्लूपार सीट पर साल 1985 यानी 37 साल से ब्राह्मणों का कब्जा है. यहां से हरिशंकर तिवारी साल 1985 से 2007 (22 वर्षों) तक विधायक रहे. यह वो दौर था, जिसमें हरिशंकर जिस भी पार्टी से मैदान में उतरते, उसी से जीतकर विधानसभा पहुंच जाते थे.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें- <a title="UP Election Result 2022: योगी का काम, मोदी का नाम, बुंदेलखंड के चुनावी एक्सप्रेसवे पर सरपट दौड़ा बीजेपी का बुलडोजर" href="https://www.abplive.com/elections/up-election-result-2022-defeat-on-3-seats-still-how-bjp-manage-strong-hold-in-bundelkhand-2079321" target="">UP Election Result 2022: योगी का काम, मोदी का नाम, बुंदेलखंड के चुनावी एक्सप्रेसवे पर सरपट दौड़ा बीजेपी का बुलडोजर</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="पंजाब विधानसभा चुनावों में ‘आप’ की जीत पर प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई, केजरीवाल ने दिया ये जवाब" href="https://www.abplive.com/news/india/punjab-assembly-elections-result-2022-pm-modi-congratulates-on-the-victory-of-aap-in-punjab-assembly-elections-2079341" target="">पंजाब विधानसभा चुनावों में ‘आप’ की जीत पर प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई, केजरीवाल ने दिया ये जवाब</a></strong></p> <p style="text-align: justify;">&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;">&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><br />&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;">&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

About the Author

Team My Nation News
Team My Nation News