सुलतानपुर। जिले के शास्त्रीनगर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में कक्षा 11वीं के एक छात्र की कथित पिटाई का मामला सामने आने के बाद पूरे जिले में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि शिक्षक रामाशंकर तिवारी ने छात्र को इतनी बुरी तरह पीटा कि उसकी पीठ पर चोट के स्पष्ट निशान पड़ गए।
घटना क्या है?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कक्षा 11 में पढ़ने वाले छात्र को किसी अन्य छात्र की गलती के कारण दंडित किया गया। छात्र के परिजनों का आरोप है कि उनके बेटे की कोई गलती नहीं थी, फिर भी शिक्षक ने उसे कठोर शारीरिक दंड दिया। पिटाई के बाद छात्र की पीठ पर चोट के निशान दिखाई दिए, जिससे परिवार गहरे सदमे में है।
छात्र के माता-पिता का कहना है कि घटना के बाद से वे मानसिक रूप से बेहद आहत हैं और बच्चे की शारीरिक व मानसिक स्थिति को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने स्कूल प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।
स्कूल प्रशासन की प्रतिक्रिया
घटना की जानकारी मिलते ही विद्यालय प्रबंधन हरकत में आया। सरस्वती विद्या मंदिर के शिक्षकों का एक प्रतिनिधिमंडल छात्र के घर पहुंचा और अभिभावकों से मुलाकात कर पूरे प्रकरण की जानकारी ली।
विद्यालय की प्रबंध समिति ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दो सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है, जो घटना की विस्तृत जांच करेगी। साथ ही आरोपी शिक्षक रमाशंकर तिवारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और उनसे लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है।
शिक्षक ने मांगी माफी
मामले पर पीड़ित छात्र पक्ष की तरफ से विद्यालय के पुरातन छात्र व जिले के जाने-माने अधिवक्ता मुकेश पाण्डेय ने शिक्षक से बातचीत की। जानकारी के अनुसार, शिक्षक ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए खेद व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि कक्षा में छात्र शोर कर रहे थे, जिसके कारण उन्होंने अनुशासन के तहत कार्रवाई की, लेकिन उनसे बड़ी भूल हो गई। शिक्षक ने छात्र और उसके अभिभावकों से माफी भी मांगी है।
जिले में चर्चा का विषय
यह घटना सामने आने के बाद पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है। शिक्षा जगत और अभिभावकों के बीच विद्यालयों में शारीरिक दंड को लेकर एक बार फिर से बहस छिड़ गई है। अभिभावकों का कहना है कि अनुशासन के नाम पर बच्चों के साथ हिंसक व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर विद्यालय प्रबंधन आगे की कार्रवाई करेगा। अभिभावकों और स्थानीय लोगों की नजर अब जांच के निष्कर्ष और संभावित अनुशासनात्मक कदमों पर टिकी हुई है।
फिलहाल, छात्र का परिवार न्याय और निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद कर रहा है, ताकि भविष्य में किसी भी छात्र के साथ इस प्रकार की घटना दोबारा न हो।
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