Rising Burnout in Competitive Exams Signals Urgent Need for Balanced Learning Approaches

प्रतियोगी परीक्षाओं में बढ़ता Burnout: संतुलित पढ़ाई के मॉडल की जरूरत पर जोर

भारत में इंजीनियरिंग, मेडिकल, सरकारी और मैनेजमेंट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के बीच मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। बढ़ती प्रतिस्पर्धा और लंबे तैयारी चक्र के कारण छात्रों में बर्नआउट (Burnout) एक गंभीर चिंता बनता जा रहा है। शिक्षा विशेषज्ञ अब संतुलित और टिकाऊ पढ़ाई के मॉडल अपनाने की जरूरत पर जोर दे रहे हैं।

हालिया राष्ट्रीय स्तर के अध्ययनों के मुताबिक, भारत में 80 प्रतिशत से अधिक छात्र परीक्षा से जुड़े तनाव और चिंता का सामना कर रहे हैं, जो इस प्रणाली में मौजूद मानसिक दबाव को दर्शाता है। वहीं, एक अन्य सर्वे में यह सामने आया है कि हर पांच में से एक छात्र खुद को शांत, प्रेरित या भावनात्मक रूप से सुरक्षित महसूस नहीं करता, जिससे छात्रों में बढ़ती थकान और निराशा साफ नजर आती है।

देशभर में, खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों के उभरते एजुकेशन हब में, छात्रों पर पढ़ाई का दबाव लगातार बढ़ रहा है। लंबे समय तक पढ़ाई, लगातार टेस्ट और कड़ी प्रतिस्पर्धा छात्रों में तनाव, चिंता और मानसिक थकावट को बढ़ा रही है। हालांकि कोचिंग संस्थानों और डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच बढ़ी है, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान अभी भी पीछे है।

ओवर-प्रिपरेशन यानी जरूरत से ज्यादा पढ़ाई की संस्कृति अब सवालों के घेरे में है। छात्र अब नींद की कमी, मोटिवेशन में गिरावट और बढ़ती चिंता जैसे बर्नआउट के लक्षण महसूस कर रहे हैं, जो उनके भविष्य और स्वास्थ्य दोनों पर असर डाल सकते हैं।

इस स्थिति को देखते हुए, कोचिंग और एडटेक सेक्टर में धीरे-धीरे बदलाव दिखाई दे रहा है। अब पर्सनलाइज्ड और स्ट्रक्चर्ड लर्निंग मॉडल पर जोर दिया जा रहा है, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य, संतुलित समय-सारणी और स्मार्ट तैयारी को शामिल किया जा रहा है।

Crack Academy के Founder व CEO Neeraj Kansal का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मानसिक स्वास्थ्य की कीमत पर नहीं मिलनी चाहिए। आज जरूरत है स्मार्ट और संतुलित तैयारी की, जो छात्रों में आत्मविश्वास और स्थिरता पैदा करे।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या से निपटने में माता-पिता और शिक्षकों की भूमिका बेहद अहम है। वास्तविक अपेक्षाएं रखना, खुलकर संवाद करना और सिर्फ परिणाम नहीं बल्कि प्रयास को भी महत्व देना, छात्रों के मानसिक दबाव को काफी हद तक कम कर सकता है।

जैसे-जैसे भारत की परीक्षा प्रणाली विकसित हो रही है, मानसिक स्वास्थ्य अब शिक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। धीरे-धीरे फोकस केवल रिजल्ट से हटकर संतुलित, स्वस्थ और दीर्घकालिक सफलता की ओर बढ़ रहा है।

About the Author

Krupakshi M.
Krupakshi M.
क्रुपाक्षी एम. ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत एक स्थानीय न्यूज़ प्लेटफॉर्म से की, जहाँ उन्होंने रिपोर्टिंग के मूलभूत कौशल को समझते हुए जमीनी स्तर पर खबरों को कवर करना शुरू किया। शुरुआती दौर में ही उन्होंने समाचार चयन, तथ्य संग्रह और प्रस्तुति की बारीकियों पर मजबूत पकड़ बना ली।
पिछले 10 वर्षों के अपने अनुभव में क्रुपाक्षी एम. ने सामाजिक, राजनीतिक और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लगातार काम किया है। खासकर समसामयिक घटनाओं और नीतिगत मुद्दों की रिपोर्टिंग में उनकी स्पष्ट समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण देखने को मिलता है।
अपने करियर के दौरान उन्होंने विभिन्न मीडिया संस्थानों के साथ काम करते हुए डिजिटल और फील्ड जर्नलिज्म दोनों में संतुलन बनाए रखा है। उनकी रिपोर्ट्स में तथ्यात्मकता और संतुलन स्पष्ट रूप से झलकता है।
वर्तमान में क्रुपाक्षी एम. My Nation News के साथ जुड़ी हुई हैं, जहाँ वे प्रमुख खबरों, विशेष रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक स्टोरीज़ पर काम कर रही हैं। अपने 10 वर्षों के अनुभव के साथ उन्होंने निष्पक्ष और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से एक भरोसेमंद पहचान बनाई है।