- यूपी में संगठन विस्तार से लेकर मिशन 2027 तक, जनता के बीच मजबूती से उतर रही आम आदमी पार्टी — प्रियंका श्रीवास्तव
- जाति और धर्म नहीं, बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य होंगे यूपी 2027 चुनाव के बड़े मुद्दे
- यूपी चुनाव में गठबंधन पर फैसला करेगा शीर्ष नेतृत्व, लेकिन संगठन बूथ स्तर तक मजबूत हो रहा
- भाजपा नैरेटिव सेट करती है और उनकी आईटी सेल लोगों की सोच प्रभावित कर रही है
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में आम आदमी पार्टी अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी में जुट गई है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच लगातार बैठकों, जनसंपर्क अभियानों और संगठन विस्तार को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने साफ संकेत दिए हैं कि वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी ने अभी से रणनीतिक तैयारी शुरू कर दी है।
पार्टी नेताओं का कहना है कि दिल्ली और पंजाब मॉडल को आधार बनाकर उत्तर प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी और रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर जनता के बीच पहुंच बनाई जाएगी। उनका दावा है कि जनता अब पारंपरिक राजनीति से अलग विकल्प चाहती है और आम आदमी पार्टी उसी विकल्प के रूप में खुद को स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है।
पार्टी के सभी कार्यकर्ता बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने, युवाओं और महिलाओं को जोड़ने तथा गांव-गांव तक पार्टी की नीतियां पहुंचाने के लिए कमर कस चुके हैं। संगठन विस्तार को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह भी देखा जा रहा है। पार्टी का दावा है कि पिछले कुछ महीनों में बड़ी संख्या में युवा और सामाजिक कार्यकर्ता संगठन से जुड़े हैं। आगामी समय में सदस्यता अभियान और जनसंवाद कार्यक्रमों को और व्यापक स्तर पर चलाने की तैयारी की जा रही है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिशों में जुटी आम आदमी पार्टी के सामने 2027 विधानसभा चुनाव सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि देश के सबसे बड़े राज्य में पार्टी के लिए राह आसान नहीं होगी। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश में किस रणनीति के साथ चुनावी मैदान में उतरेगी? क्या पार्टी अकेले दम पर चुनाव लड़ेगी या फिर किसी बड़े गठबंधन का हिस्सा बनेगी?
इसके अलावा पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप, दिल्ली और पंजाब मॉडल, संगठन विस्तार, बूथ स्तर की तैयारी, युवाओं की भागीदारी और यूपी की मौजूदा राजनीति जैसे तमाम मुद्दों को लेकर newsdelhincr.com की टीम ने आम आदमी पार्टी की उत्तर प्रदेश सचिव प्रियंका श्रीवास्तव से विशेष बातचीत की।
बेबाक अंदाज में प्रियंका श्रीवास्तव ने हर तीखे सवालों के जवाब दिए और पार्टी की आगामी राजनीतिक रणनीति से लेकर विपक्ष के आरोपों तक पर खुलकर अपनी बात रखी। पेश हैं इस खास राजनीतिक इंटरव्यू के प्रमुख अंश:
सवाल: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अब एक साल से भी कम समय बचा है। ऐसे में आम आदमी पार्टी की सबसे बड़ी चुनावी रणनीति क्या होगी? क्या पार्टी यूपी में खुद को तीसरे विकल्प के तौर पर स्थापित करने की कोशिश कर रही है? साथ ही प्रदेश की जनता के बीच इस समय सबसे बड़े चुनावी मुद्दे कौन-कौन से हैं?
प्रियंका: आम आदमी पार्टी को अपने पर विश्वास है अपने काम पर भरोसा है दिल्ली पंजाब अपने काम देखा है देखिए आम आदमी पार्टी रणनीति तैयार करने में विश्वास नहीं रखती अगर आप रणनीति शब्द का प्रयोग कर रहे हैं तो मैं सरल भाषा में शिक्षा स्वास्थ्य और बस सेवा एक कॉल पर राशन कार्ड आधार कार्ड बन जाना बैंक अकाउंट खुल जाना जैसी सुविधाओं को जैसे कि दिल्ली और पंजाब दोनों में जनता को दी गई है बिल्कुल जनता के लिए तीसरा विकल्प नहीं एक अच्छा विकल्प होगा। देखिए! जनता को सरकार से जो उम्मीद होती है उन्हीं मुद्दों पर आम आदमी पार्टी चुनाव लड़ती है शिक्षा ,स्वास्थ्य, रोजगार महिलाओं से जुड़ी सुरक्षा।
सवाल: हाल ही में राघव चड्ढा समेत आम आदमी पार्टी के कई नेताओं और सांसदों के भाजपा में शामिल होने की खबरें सामने आईं। क्या यह पार्टी के अंदर बढ़ती असंतुष्टि का संकेत है या फिर इसे सिर्फ राजनीतिक अवसरवाद के तौर पर देखा जाना चाहिए?
प्रियंका: अगर मैं राघव चड्ढा की बात करूं तो पार्टी से जब कोई जाता है तो उसकी मनसा क्या है, यह हम नहीं जानते लेकिन पार्टी से जुड़े हैं तो पार्टी के आधार पर काम करना होगा। देखिए राघव चड्ढा जी का व्यक्तिगत निर्णय है। “वैसे आम आदमी पार्टी के अंदर खुद इतना दम है कि राघव चड्ढा जैसे नेताओं को जन्म देती है।” आप ऐसे समझ सकते हैं जैसे की मां-बाप अपने बच्चों परिपक्व करते हैं और ऐसे कई बच्चे हैं जो अपने मां-बाप को भूल जाते हैं। यह अवसरवाद भाजपा के लिए पंजाब में कितना काम आएगा समय बताएगा।
सवाल: एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से कटे, जिसका असर पश्चिम बंगाल चुनाव में भी चर्चा का विषय बना। आपको क्या लगता है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में एसआईआर का चुनावी नतीजों पर कितना प्रभाव पड़ सकता है? क्या इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं?
प्रियंका: एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में वोटो के नाम वेस्ट बंगाल, बिहार में एसआईआर के नाम पर काटे थे। दिल्ली में रोहिंग्या बांग्लादेशी के नाम पर ये एक तरीका है। देखिए एसआईआर के बाद उस राज्य का डाटा उनके (भाजपा) हाथ में आ जाता है। हिंदू-मुस्लिम आबादी, एससी-एसटी-ओबीसी सब, अब कहानी शुरू होती है यहां से, जिस जगह ये कमजोर होते हैं। बढ़त घटक करके जीत जाते हैं। एक बात और जनता के बीच मैसेज जाता है – सरकार निरपेक्ष जांच कर रही है जबकि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन मतदाता सूची की गहन जांच इलेक्शन कमीशन द्वारा की जाती है। हमारी पूरी कोशिश रहेगी कि किसी के वोटर लिस्ट से नाम ना काटे जाएँ। लोगों के अंदर जागरूकता और सतर्कता का काम आम आदमी पार्टी करेगी। BLA पूरी जिम्मेदारी से काम करेंगे और विधानसभा को बूथ लेवल पर मजबूत कराया जाएगा।
सवाल: आम आदमी पार्टी हमेशा खुद को आंतरिक लोकतंत्र वाली पार्टी बताती रही है। लेकिन पार्टी छोड़ने वाले कई नेताओं ने आरोप लगाया कि कुछ चुनिंदा लोगों को छोड़कर बाकी नेताओं की बात नहीं सुनी जाती। ऐसे में क्या पार्टी के भीतर आलोचना और असहमति की वास्तव में पूरी आज़ादी है?
प्रियंका: सभी पार्टियां आंतरिक लोकतंत्र के आधार पर ही काम करती है। यह बात सही है कि राष्ट्रीय लेवल पर संगठन होता है और उन सभी की राय ली जाती है। बात सही गलत पर निर्भर करती है। आंतरिक लोकतंत्र के संगठन से जुड़ा व्यक्ति गलत बात बोल रहा है – यह पार्टी का शीर्ष नेतृत्व तय करेगा। उसका नज़रिया क्या है.. चुनिंदा की कोई बात नहीं है। पार्टी में प्रोटोकॉल से काम होता है। आलोचना कौन किसकी कर रहा है – इस समय तय करेगा। कुछ लोग फालतू की बातें बोलते हैं।
सवाल: आम आदमी पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से निकली पार्टी मानी जाती है। लेकिन समय-समय पर पार्टी नेतृत्व और अरविंद केजरीवाल पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे। ऐसे में विपक्ष के इन आरोपों का जवाब आप किस तरह देती हैं? क्या इससे पार्टी की मूल विचारधारा को नुकसान पहुंचा है?
प्रियंका: बिल्कुल आम आदमी पार्टी आंदोलन से निकली पार्टी है। अरविंद केजरीवाल की छवि को गंदा करके, पार्टी की छवि को खराब करने का गंदा और घिनौना षड्यंत्र रचा गया था। आपने देखा होगा, चुनाव के समय हमारे नेताओं को जेल में झूठे मुकदमे लगाकर डाला गया, उनकी छवि खराब हुई लेकिन साथ ही पार्टी की कार्यप्रणाली पर गहरा असर हुआ और ईडी, सीबीआई, चुनाव आयोग सब आम आदमी पार्टी को बदनाम करने में लगे हुए थे।”सत्य को परेशान किया जा सकता है पराजित नहीं।” आखिरकार माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीबीआई को फटकार लगाते हुए अरविंद केजरीवाल और उनके सभी नेताओं को बरी कर दिया गया। सत्य की जीत, हुई सभी नेता बरी हुए।
सवाल: पिछले कुछ चुनावों में भाजपा का ‘सनातनी-हिन्दू’ और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद वाला एजेंडा काफी प्रभावी दिखाई दिया है। ऐसे में आम आदमी पार्टी, जिसकी छवि अपेक्षाकृत सेक्युलर राजनीति की रही है, भाजपा के इस मजबूत नैरेटिव का मुकाबला किस रणनीति से करेगी?
प्रियंका: देखिए, सनातनी हिंदू से आप क्या समझ रहे हैं? आप राजनीति और धर्म एक साथ नहीं देख सकते। धर्म से देश नहीं चलाया जाता। भारत में सभी धर्म के लोग रहते हैं। एक धर्म का नाम लेकर दूसरे धर्म को गलत साबित करना – ये कहां की राजनीति है। आम आदमी पार्टी सबको साथ में लेकर चलती है। जो मुद्दे एक राज्य में है, वह सभी राज्य में रहेंगे।
सवाल: आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश में लगातार संगठन विस्तार और बूथ स्तर की मजबूती पर फोकस कर रही है। ऐसे में 2027 विधानसभा चुनाव में पार्टी अकेले चुनाव लड़ना पसंद करेगी या फिर INDIA गठबंधन के साथ जाने पर विचार कर सकती है?
प्रियंका: बूथ लेवल पर काम करना एक मजबूत प्रक्रिया मानी जाती है। 2027 के चुनाव में हम अकेले लड़ेंगे या गठबंधन के साथ – ये पार्टी के शीश नेतृत्व तय करेंगे। वैसे गठबंधन एक अच्छा विकल्प है।
सवाल: आज के दौर में सोशल मीडिया, आईटी सेल और डिजिटल कैंपेन चुनावों को किस हद तक प्रभावित करते हैं? क्या अब चुनावी जीत सिर्फ जमीनी राजनीति से नहीं, बल्कि नैरेटिव और डिजिटल वॉरफेयर से भी तय होने लगी है?
प्रियंका: आईटी सेल, मीडिया, डिजिटल कैंपेन यह सब किसी के लिए भी आसानी से नॉरेटिव सेट कर सकती हैं। आईटी सेल का असर चुनाव पर बहुत पड़ता है। जैसा कि आपने देखा होगा – एक वीडियो बहुत वायरल हुआ था। एक बच्चा बोल रहा था मेरे हिंदू भाई को मारेगा, मैं भी मारूंगा। जबकि उस बच्चे को कुछ भी नहीं पता था। जब आप जैसे किसी पत्रकार बंधु ने उससे पूछा कि किसको मारोगे और क्यों मारोगे तो उस बच्चे के पास कोई जवाब नहीं था। जो पढ़े-लिखे नहीं होते हैं, उनके लिए आईटी सेल दिमाग में ज़हर की तरह काम करता है, जो उनकी सोचने-समझने की क्षमता को खत्म कर देता है।
सवाल: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में आम आदमी पार्टी के सामने सबसे बड़ी राजनीतिक और संगठनात्मक चुनौतियां क्या हो सकती हैं? क्या यूपी की जातीय और ध्रुवीकृत राजनीति में अपनी जगह बनाना पार्टी के लिए सबसे कठिन चुनौती होगी?
प्रियंका: भारत का दुर्भाग्य है कि यहां वोट जातिगत राजनीति के आधार पर डाले जाते हैं। लेकिन आम आदमी पार्टी ने देश के राजनीति की सोच को बदलने का काम किया है। दिल्ली, पंजाब जैसे मॉडल उदाहरण हैं। जनता सर्वोपरि है। मुझे विश्वास है कि फिर से आम आदमी पार्टी दिल्ली के बाद कई राज्यों में अपनी जगह बनाएगी।
About the Author

- मानसी भटनागर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत एक क्षेत्रीय न्यूज़ प्लेटफॉर्म से की, जहाँ उन्होंने रिपोर्टिंग के मूलभूत सिद्धांतों को गहराई से समझा और उन्हें व्यवहार में उतारा। इसके बाद उन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम करते हुए समाचार जगत के विविध पहलुओं में व्यापक अनुभव अर्जित किया। लगभग दो दशकों के अपने समृद्ध अनुभव के दौरान मानसी भटनागर ने राजनीति, समाज और जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर प्रभावी और गहन रिपोर्टिंग की है। खासतौर पर राजनीतिक परिदृश्य और नीतिगत मुद्दों की समझ और विश्लेषण में उनकी विशेष दक्षता रही है। वर्तमान में मानसी भटनागर My Nation News में वरिष्ठ पत्रकार के पद पर कार्यरत हैं, जहाँ वे प्रमुख राजनीतिक खबरों, एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक लेखों पर सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। उनकी सूझबूझ और अनुभव संपादकीय टीम को एक मजबूत दिशा प्रदान करते हैं। मीडिया इंडस्ट्री में लंबे समय तक सक्रिय रहते हुए मानसी भटनागर ने निष्पक्षता, तथ्यात्मकता और निर्भीकता को अपनी पत्रकारिता की पहचान बनाया है, जिसके कारण उन्होंने एक विश्वसनीय और प्रभावशाली पत्रकार के रूप में अपनी अलग पहचान स्थापित की है।
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