- जब तक सरकार तीनों कृषि बिल वापस नहीं लेती, एमएसपी आदि मुद्दों पर कानून नहीं बनेगा: राकेश टिकैत
- सरकार दमनकारी नीतियां अपनाकर किसानों को डराने और फूट डालने की कोशिश कर रही है: युद्धवीर सिंह
- कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का देशव्यापी आंदोलन, राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर किसान डंटे
[avatar user=”Kunwar Digvijay Singh” size=”thumbnail” align=”left”]By Kunwar Digvijay Singh[/avatar]
दिल्ली। दिल्ली गाजीपुर बॉर्डर पर चल रहे किसान आँदोलन (farmers protest) में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि रविवार को 11 बजे से 01 बजे तक मौजूदा समय में चल रहे किसान आंदोलन में शहीद हुए शहीदों को श्रद्धांजलि दी जायेगी। उन्होंने यह भी कहा कि यूपी सरकार हमारे किसानों को बेवजह रोक रही है और जुर्माना लगा रही है। हमारा आंदोलन (farmers protest) सिर्फ केंद्र सरकार के खिलाफ है इसलिए राज्य सरकारें वह बीच में आकर किसानों को परेशान ना करें।
अपने सम्बोधन में चौधरी राकेश टिकैत ने यह भी कहा कि जब किसान अपनी खेती गाँव में कर रहा था तब सरकार दिल्ली में बैठी थी और अब किसान अपनी माँगों को लेकर जब दिल्ली आया है तो सरकार गाँव-गाँव जा रही है। यहाँ यूपी गेट पर पूर्ण रूप से शाँति है और शाँतिपूर्ण तरीके से अपना प्रदर्शन सब लोग करें।
मोदी जी के संबोधन में सबसे बड़ा झूठ गन्ना किसानों को 1600 करोड़ की मदद की जा रही हैं,यह मदद नही शुगर मिल पर किसानों का बकाया है उसका भुगतान शुगर मिल को करना था।अगर सरकार उसको दे रही है तो शुगर मिलो को मदद मिल रही है।सरकार अगर इसे इंसेंटिव के रूप में देती तो कोई लाभ होता है- टिकैत pic.twitter.com/5QB7CB7AX4
— Rakesh Tikait (@RakeshTikaitBKU) December 18, 2020
आंदोलन (farmers protest) में मौजूद सभी किसानों को अपने मुद्दे से न भटकने की नसीहत देते हुए हुए श्री टिकैत ने कहा कि रविवार के दिन इस आंदोलन (farmers protest) में शहीद हुए किसानों को याद करते हए उन्हें श्रद्धाजंलि दीजिये।
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने स्पष्ट करते हुए कहा कि जब तक सरकार तीनों कृषि बिल वापस नहीं लेती, एमएसपी आदि मुद्दों पर कानून नहीं बनेगा। जब तक इन कानूनों पर साफ़ बातचीत नहीं होगी तब तक किसान वापस अपने घर नहीं जाएगा।

राकेश टिकैत ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए बताया कि मंच से कुछ किसानों ने कहा है कि यूपी गेट पर आंदोलन (farmers protest) में आने वाली गाड़ियों का पुलिस द्वारा जबरन चालान किया जा रहा है। यहाँ आई गाड़ियों के नंबर ले लेते हैं और उन सभी के घर पर चालान भेजा जा रहा है तथा गाड़ियों पर कब्जा कराने की कोशिश की जा रही है, इसके अलावा रास्ते में गाड़ियाँ और ट्रैक्टर ट्रालियों को रोका भी जा रहा है। ऐसी दमनकारी नीतियों के खिलाफ किसानों ने चेताया है कि यह आंदोलन (farmers protest) तोड़ने के लिये सरकार द्वारा दमनकारी नीतियाँ अपनाई जा रही हैं। यदि किसानों को और परेशान किया गया तो हमें भी सड़कें जाम करनी पड़ेंगी।

राष्ट्रीय महासचिव युद्धवीर सिंह ने कहा कि यह सरकार दमनकारी नीतियां अपनाकर किसानों को डराने और फूट डालने की कोशिश कर रही है। किसान इनके डर से वापस लौटने वाला नहीं है। 26 जनवरी तक का अल्टीमेटम तो क्या, हम अगले साल की 26 जनवरी की परेड तक यहां मौजूद रहने का माद्दा रखते हैं और जब तक सरकार कानून वापस नहीं लेती, हम रुकेंगे। ऐसा लगता है कि सरकार देश के किसानों को बहुत ही मामूली समझ रही है।

गौरतलब है कि कृषि कानूनों के विरोध में पिछले तीन सप्ताह से लगातार देश के किसान दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन और आंदोलन कर रहे हैं। किसानों शमशेर राणा, राजवीर सिंह जादौन, दिगंबर सिंह, होशियार सिंह, राजेश सिंह मुकेश पँवार आदि पदाधिकारियों के साथ हजारों किसान दिल्ली सीमा पर डटे हुए हैं।
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