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Fact Check: उत्तर प्रदेश को तीन भागों में विभाजित करने और पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने वाली वायरल खबर की सच्चाई..

Fact Check News: इस इस वायरल खबर की सच्चाई जब पीआईबी की तरफ से चेक (Fact Check) की गई तो यह खबर फेक पाई गई है। जिसके बाद पीआईबी के आधिकारिक अकाउंट से ट्वीट कर इस खबर को फेक बताया गया है। केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश का किसी भी तरह से विभाजन करने का कोई भी विचार नहीं कर रही है। इसलिए लोग ऐसी किसी ख़बर पर भरोसा ना करे।

[avatar user=”Anand Madhav” size=”thumbnail” align=”left”]By Anand Madhav[/avatar]

नई दिल्ली। (Fact Check News) उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में अभी से हीराजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। इन्हीं खबरों के बीच गुरुवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिल्ली पंहुचे, जहां उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह व पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात की। उत्तर प्रदेश के इन्हीं खबरों के बीच एक नई खबर तेजी के साथ वायरल हो रही है। इस खबर में दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार उत्तर प्रदेश को दो से तीन हिस्सों में विभाजित करने और पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने पर विचार कर रही है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस खबर में दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार उत्तर प्रदेश को तीन हिस्सों में बांटने पर विचार कर रही है। जिसके तहत पूर्वांचल को एक अलग राज्य बनाने पर भी विचार किया जा रहा है। आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के ठीक पहले विचाराधीन इस विभाजन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच चर्चा भी हुई है। वायरल खबर के तहत यह भी कहा गया है कि अगर पूर्वांचल एक अलग राज्य बना तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गढ़ गोरखपुर एक अलग राज्य में शामिल हो जाएगा। इसके साथ ही अयोध्या, काशी और मथुरा तीनों ही अलग-अलग राज्यों में शामिल हो जायेंगे।

वहीं इस वायरल खबर की सच्चाई जब पीआईबी की तरफ से चेक (Fact Check) की गई तो यह खबर फेक पाई गई है। जिसके बाद पीआईबी के आधिकारिक अकाउंट से ट्वीट कर इस खबर को फेक बताया गया है। केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश का किसी भी तरह से विभाजन करने का कोई भी विचार नहीं कर रही है। इसलिए लोग ऐसी किसी ख़बर पर भरोसा ना करे।

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गौरतलब है कि नवंबर 2011 में तत्कालीन मायावती की बसपा सरकार ने उत्तर प्रदेश को पूर्वाचल, बुंदेलखंड, पश्चिमी प्रदेश और अवध प्रदेश में विभाजन करने का प्रस्ताव विधानसभा से पारित कराकर केंद्र सरकार को भेज दिया था। प्रस्ताव के तहत, पूर्वांचल प्रदेश में 32, पश्चिम प्रदेश में 22, अवध प्रदेश में 14 और बुंदेलखण्ड प्रदेश में 7 जिले शामिल होने थे। हालांकि इस प्रस्ताव पर तत्कालीन यूपीए 2 की केंद्र सरकार द्वारा कोई भी सहमति नहीं न मिलने की वजह से उत्तर प्रदेश का विभाजन वाला प्रस्ताव निरस्त हो गया।

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Anand Madhav
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