- इस खबर को माइनेशन न्यूज़ ने गंभीरता के साथ उठाया था जिसके बाद संबंधित अधिकारी शव भेजवाने को लेकर सक्रिय हुए थे
- शव के ट्रांसपोर्टेशन में तकरीबन 12 हजार रियाल का खर्च आया है। जिसमें से पांच हजार रियाल दिलावर के कफील एमएनजे कहतानी ने दिए हैं और शेष धनराशि की व्यवस्था भारतीय समुदाय कोष (ICWUF) रिलीफ फंड से की गई है
[avatar user=”Rajendra Yadav” size=”thumbnail” align=”left”]राजेन्द्र यादव[/avatar]
Sultanpur (Uttar Pradesh) : कोरोना काल ने कुछ लोगों को ऐसे जख्म दिए हैं, जिनकी पीड़ा ताउम्र उन्हें सताती रहेगी। इस कठिन दौर ने एक बूढ़ी मां को जो दुख दिया, उसके बारे में सुनकर पत्थरदिल इंसान की भी रूह कांप उठेगी। जिस लाडले को दुनिया में लाने को उसने बड़े ही नाज से नौ महीने तक अपनी कोख में पाला था, मौत के बाद उसे इस संसार से विदा करने के लिए अभागी मां को चार माह से अधिक समय तक दर्दभरा इंतजार करना पड़ा। आखिरी बार बेटे का चेहरा देखने की आश लगाए बैठी इस मां की आंखें मानो पथरा सी गई हैं। जिले के एक युवा सामाजिक कार्यकर्ता के अथक प्रयासों से अब उनकी यह कष्टकारी प्रतीक्षा खत्म होने वाली है। गुरुवार को विदेश से उनके बेटे का शव भारत भेजा जाएगा।
सुल्तानपुर (Sultanpur) जिले के कूरेभार ब्लॉक क्षेत्र अंतर्गत भरथीपुर गांव निवासी दिलावर (38) पुत्र स्व. जानमोहम्मद करीब चार साल पहले सऊदी अरब गए थे। वहां पर वह रियाद निवासी एमएनजे कहतानी नामक शेख के यहां घरेलू नौकर का काम करते थे। बीते रमजान में 4 मई की शाम को हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई थी। इसकी सूचना जब उनके घरवालों को मिली तो वे अवाक रह गए। दिलावर की मां तकदीरुल निशा ने कादीपुर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता अब्दुलहक के जरिए विदेश मंत्री को पत्र लिखकर बेटे का शव स्वदेश मंगवाने की गुहार लगाई। विदेश मंत्रालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जेद्दा दूतावास (सऊदी अरब) को शव भेजवाने की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए। लंबी जद्दोजहद के बाद शव भेजने की प्रक्रिया पूरी हुई, मगर कोरोना संक्रमण के चलते हवाई यात्रा पर लगी पाबंदियां दिलावर की बाॅडी भारत भेजने में आड़े आने लगीं। गत दिनों सऊदी अरब से दिल्ली के बीच में हवाई यात्रा शुरू की गई तो अब्दुलहक ने जेद्दा एंबेसी के अधिकारियों से पुनः संपर्क किया। जिसके बाद 24 सितंबर को दिलावर का पार्थिव शरीर सऊदी एयरलाइंस से दिल्ली भेजने का फैसला किया गया।
अब्दुलहक ने बताया कि शव के ट्रांसपोर्टेशन में तकरीबन 12 हजार रियाल का खर्च आया है। जिसमें से पांच हजार रियाल दिलावर के कफील एमएनजे कहतानी ने दिए हैं और शेष धनराशि की व्यवस्था भारतीय समुदाय कोष (ICWUF) रिलीफ फंड से की गई है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि दिल्ली से सुल्तानपुर (Sultanpur) तक शव को लाने के लिए स्थानीय स्तर पर चंदा एकत्रित कर वाहन की व्यवस्था की गई है।
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