- भले ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लोगों को आशियाना नसीब हुआ होगा लेकिन एक मजदूर के नसीब में वह भी नहीं प्रधान से उसने जब भी इस सिलसिले पर बातचीत की तो हमेशा वह डांट डपट कर फटकार लगाकर भगा देते हैं
रिपोर्ट: राजकुमार शर्मा
सुलतानपुर। जी हां हम बात करते हैं, उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर (Sultanpur) जिले की जहां महिला और उसका परिवार घर की आस में दर-दर भटक रहा।
हाय रे बेबसी:- (Sultanpur) रहने को घर नहीं, सोने को बिस्तर नहीं अपना तो खुदा है रखवाला, अब तक उसी ने है पाला महेश भट्ट की चर्चित फिल्म सड़क का गाना संजय दत्त पर फिल्माया गया था और हिट भी हुआ था होता भी क्यों न गाना भी कुछ बेबसी की तर्ज पर था ऐसी ही बेबसी सुलतानपुर (Sultanpur) का एक मजदूर परिवार गीता देवी पति शिवकुमार पाल जो की सैफुल्लागंज, नन्हूई गांव का पूरा परिवार खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर है।
कांग्रेस का यूरिया की समस्या को लेकर प्रदर्शन
भले ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लोगों को आशियाना नसीब हुआ होगा लेकिन एक मजदूर के नसीब में वह भी नहीं प्रधान से उसने जब भी इस सिलसिले पर बातचीत की तो हमेशा वह डांट डपट कर फटकार लगाकर भगा देते और कहते हैं।
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प्रधान जी कहते हैं, सरकारी काम है, पैसा और समय लगेगा। इस तरीके से उसकी बातों को नजर अंदाज कर देते हैं कहते हैं जैसे रहते हैं वैसे ही रहो घर की क्या जरूरत कार्ड धारक होने के नाते राशन तो मिल जाता है। लेकिन खाना बनाने और रखने के लिए जगह नहीं अगर खाना किसी तरह बना भी लिया तो वह पलक झपकते कुत्ते उठा ले जाते हैं पीड़ित से ठिठुरन बारिश की सर्द रातों अपने बच्चों के साथ सड़क किनारे गुजारता है लेकिन कोई सुनने वाला नहीं। पीड़ित काफी गरीब है उसके पास ना तो कोई संपत्ति है ना ही घर है खुले आसमान के अलावा मेहनत मजदूरी करके परिवार का पेट पालता है पीड़ित का कहना है उसके पास राशन कार्ड के सहारे अपना जीवन व्यतीत कर रहा
सूबे के मुखिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आवास की गुहार…
उसके परिवार में पत्नी बच्चों सहित किसी तरह उसने झोपड़ी बनाकर रहना शुरू किया। अब बच्चों को लेकर वह कहां जाए पीड़ित ने योगी सरकार से आवास दिए जाने की गुहार लगाते हुए कहा कि अगर वह पात्र है तो उसे एक घर दिलाया जाए जिससे वहां अपने बच्चों के साथ रह सके।
जिला प्रशासन के अधिकारी भी घुमाते रहे…
घर की आस लगाए बैठे पीड़ित परिवार की अधिकारियों के पास दौड़ते-दौड़ते चप्पल घिस गए लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा तहसील स्तर के अधिकारी एक दूसरे के पास पीड़ित का प्रार्थना पत्र आगे बढ़ाते गए।
वोट लेने के वक्त याद आते हैं गरीब…
दुखी मन से पीड़ित परिवार ने कहा कि कोई भी चुनाव होता है तो नेताओं को गरीब याद आते हैं तब यह नेता वोट के लिए गरीब के आगे हाथ जोड़ते हैं चुनाव समाप्त हो जाने के बाद क्षेत्र में दर्शन तक नहीं देते पीड़ित परिवार का कहना है। इस बार वह किसी भी झूठे नेता को वोट नहीं देंगे वोटिंग का बहिष्कार करेंगे।
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